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Tata Sons के IPO पर पहली बार बोले नोएल टाटा, बाजार में लिस्ट नहीं कराने की बताई वजह; ट्रस्ट्स का रुख साफ

Tata Sons Listing: टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स ने अपना रुख साफ कर दिया, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि विवाद अभी और लंबा चल सकता है. गुरुवार को टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह टाटा संस लिमिटेड को पब्लिक करने (शेयर बाजार में लिस्ट करने) के लिए सहमत नहीं है.

नोएल टाटा Image Credit: TV9 Bharatvarsh

Highlights

  • नोएल टाटा ने कहा कि बोर्ड लिस्टिंग के सवाल पर पहले ही फैसला ले चुका है.
  • नोएल टाटा ने कहा कि RBI के आदेश में लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है.
  • फैसला रेगुलेटरी नियमों के पालन की दिशा में एक बदलाव को दिखाता है.

Tata Sons Listing: टाटा समूह का विवाद हर बोर्ड मीटिंग के बाद उलझता ही जा रहा है. बीते दिन यानी गुरुवार 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बैठक में बोर्ड रूम के मतभेद एक बार फिर से सड़कों पर आ गए. एक तरफ एन.चंद्रशेखरन को मिले कार्यकाल विस्तार पर विवाद ने जोर पकड़ लिया, दूसरी तरफ टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स ने अपना रुख साफ कर दिया, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि विवाद अभी और लंबा चल सकता है.

गुरुवार को टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह टाटा संस लिमिटेड को पब्लिक करने (शेयर बाजार में लिस्ट करने) के लिए सहमत नहीं है.

ट्रस्ट का रुख

चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप के 100 साल से अधिक पुराने स्ट्रक्चर को ‘बनाए रखने’ के ट्रस्ट के रुख को फिर से दोहराया. एक बयान में टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर की बैठक में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कम्युनिकेशन पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि सिर्फ लिस्टिंग ही नहीं, बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों पर अच्छी तरह से विचार किया जाना चाहिए.

17 सितंबर को जारी बयान में कहा गया, ‘बोर्ड इस बात पर सहमत हुआ कि सिर्फ लिस्टिंग ही नहीं, बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों पर तुरंत अच्छी तरह से विचार और मूल्यांकन किया जाना चाहिए और नतीजों व सुझावों को बोर्ड के सामने पेश किया जाना चाहिए.’

लिस्टिंग पर फैसला

टाटा संस को दिए अपने बयान में नोएल टाटा ने कहा कि बोर्ड लिस्टिंग के सवाल पर पहले ही फैसला ले चुका है. उन्होंने कहा, ‘इस तरह के मामले में कागजात, स्पष्टीकरण, सलाह और समय की जरूरत होती है, और मुझे कोई शक नहीं है कि ये सब इकट्ठा किए जा रहे हैं. बोर्ड को पूरी जानकारी (ब्रीफिंग) की जरूरत होगी.’

नोएल टाटा ने आगे कहा कि RBI के आदेश में लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है. उन्होंने बताया कि इसमें किसी खास कदम का निर्देश नहीं दिया गया है और न ही यह कहा गया है कि टाटा संस ने नियमों का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा, ‘इसका कानूनी असर क्या है और यह कंपनी से क्या और कब तक करने की उम्मीद करता है, इन सवालों पर बोर्ड ने अभी कोई राय नहीं बनाई है.’

उन्होंने यह भी साफ किया कि ये बयान किसी व्यक्ति या रेगुलेटर के खिलाफ नहीं थे, बल्कि ये उनके सुझाव थे कि बोर्ड को क्या करना चाहिए.

लिस्टिंग के खिलाफ क्यों हैं नोएल

लिस्टिंग के खिलाफ अपनी वजहें बताते हुए नोएल टाटा ने कहा कि इससे टाटा संस इंस्टीट्यूशनल और विदेशी शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह हो जाएगी, ‘जिनका मुख्य हित फाइनेंशियल रिटर्न (वित्तीय लाभ) होता है.’

उन्होंने कहा कि इस बात पर संदेह है कि क्या ऐसे शेयरधारक किसी मुश्किल में फंसी ग्रुप कंपनी को बचाने के लिए कैपिटल लगाने, या किसी ऐसे ग्रीनफील्ड वेंचर (नए प्रोजेक्ट) को फंड देने की मंजूरी देंगे, जिसका रिटर्न 15 साल बाद मिलना हो.

उन्होंने आगे कहा, ‘यह उनकी आलोचना नहीं है. यह उनके मैंडेट (काम के दायरे) का विवरण है, जो हमारा मैंडेट नहीं है. दांव पर जो चीज लगी है, वह बहुत बुनियादी है. एक अनोखे संस्थान के तौर पर टाटा ग्रुप का स्वरूप और चरित्र.’

RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब टाटा संस के बोर्ड ने RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का पालन करने की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया है. यह फैसला सेंट्रल बैंक द्वारा होल्डिंग कंपनी की उस अर्जी को खारिज करने के कुछ दिनों बाद लिया गया है, जिसमें उसने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी.

टाटा संस ने 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग के बाद एक बयान में कहा, ‘बोर्ड ने RBI के लागू नियमों का पालन करने के लिए कदम उठाने का फैसला किया है और नियमों के पालन से जुड़ी जरूरतों पर RBI, टाटा ट्रस्ट्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेगा.’

अनलिस्टेड रखने पर बनी थी सहमति

यह फैसला रेगुलेटरी नियमों के पालन की दिशा में एक बदलाव को दिखाता है. इससे पहले टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी ने दो साल से अधिक समय तक RBI के दायरे से बाहर निकलने की कोशिश की थी, जो लिस्टिंग का रास्ता साफ कर सकता था. टाटा ट्रस्ट्स के बयान में 24 मार्च को दिवंगत रतन टाटा के समय लिए गए उस फैसले का जिक्र किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से टाटा संस को अनलिस्टेड रखने पर सहमति बनी थी.

ट्रस्ट्स ने कहा, ‘जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किए कि कंपनी को अनलिस्टेड रहना चाहिए और जरूरी कार्रवाई के लिए इसकी जानकारी टाटा संस को दे दी गई थी. इस तरह, टाटा ट्रस्ट्स का रुख एक जैसा और बिना किसी बदलाव के बना हुआ है.

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