अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद गोल्ड का क्या होगा? आगे की दिशा तय करेंगे ये 4 बड़े फैक्टर; समझिए पूरा गणित
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद गोल्ड मार्केट की दिशा को लेकर निवेशकों की नजरें टिकी हैं. मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने से सेफ हेवन डिमांड घट सकती है, लेकिन डॉलर, इन्फ्लेशन, इंटरेस्ट रेट्स और सेंट्रल बैंक बाइंग जैसे कारक गोल्ड की कीमतों पर बड़ा असर डालेंगे.

Gold outlook 2026: पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में राहत का माहौल देखने को मिल रहा है. युद्ध के दौरान सेफ हेवन एसेट के तौर पर गोल्ड में निवेश बढ़ा था, लेकिन अब संघर्ष समाप्त होने के संकेतों के बीच निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले महीनों में गोल्ड की कीमतों का रुख कैसा रहेगा. युद्ध शुरू होने के बाद गोल्ड की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, क्योंकि निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट क्लासेज से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों का रुख किया था. हालांकि, हाल के दिनों में गोल्ड अपने उच्चतम स्तर से कुछ नीचे आया है. अब जब युद्ध खत्म होने की खबरें सामने आ रही हैं, तो गोल्ड मार्केट की दिशा कई आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी.
जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी से घट सकती है सेफ हेवन डिमांड
गोल्ड को हजारों वर्षों से सुरक्षित निवेश का दर्जा प्राप्त है. जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक संकट या अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक गोल्ड की ओर आकर्षित होते हैं. मिडिल ईस्ट संघर्ष के दौरान भी यही देखने को मिला. लेकिन अब जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं, तो गोल्ड की सेफ हेवन डिमांड पर दबाव पड़ सकता है. यदि आने वाले दिनों में समझौता कायम रहता है और क्षेत्र में शांति बनी रहती है, तो निवेशकों का रुझान दोबारा इक्विटी मार्केट्स और अन्य जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ सकता है.
डॉलर की चाल होगी अहम
गोल्ड की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर का सीधा प्रभाव पड़ता है. आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर गोल्ड पर दबाव बनता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमत डॉलर में तय होती है. युद्ध के दौरान वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं ने डॉलर को समर्थन दिया था. निवेशकों ने अमेरिकी मुद्रा को सुरक्षित विकल्प माना, जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ.
यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी रहती है, तो डॉलर को समर्थन मिलता रह सकता है, जो गोल्ड की तेजी को सीमित कर सकता है. हालांकि, यदि आर्थिक गतिविधियां तेजी से सामान्य होती हैं और निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा लौटता है, तो डॉलर कमजोर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति गोल्ड के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है.
इंटरेस्ट रेट आउटलुक भी करेगा फैसला
गोल्ड की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक अन्य बड़ा कारक इंटरेस्ट रेट्स हैं. गोल्ड कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए जब सेंट्रल बैंक्स ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो निवेशकों का झुकाव फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स की ओर बढ़ सकता है. युद्ध के दौरान क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेजी ने इन्फ्लेशन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं. यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है, तो सेंट्रल बैंक्स ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं या जरूरत पड़ने पर बढ़ा भी सकते हैं.
यह गोल्ड के लिए नकारात्मक कारक माना जाएगा.
दूसरी ओर, यदि होर्मुज स्ट्रेट के सामान्य रूप से खुलने और ऑयल सप्लाई बहाल होने से क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आती है, तो इन्फ्लेशन का दबाव कम हो सकता है. ऐसी स्थिति में सेंट्रल बैंक्स भविष्य में रेट कट पर विचार कर सकते हैं, जो गोल्ड को समर्थन दे सकता है.
2026 में किन सवालों पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार गोल्ड की आगे की दिशा कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब पर निर्भर करेगी. इनमें मिडिल ईस्ट में शांति कितनी स्थायी साबित होती है, होर्मुज स्ट्रेट से ऑयल और गैस सप्लाई कितनी तेजी से सामान्य होती है, वैश्विक आर्थिक वृद्धि कितनी प्रभावित होती है और सेंट्रल बैंक्स की मॉनेटरी पॉलिसी क्या रुख अपनाती है, जैसे मुद्दे शामिल हैं.
इसके अलावा, हाल के वर्षों में कई देशों के सेंट्रल बैंक्स ने गोल्ड रिजर्व बढ़ाए हैं. यदि यह खरीदारी जारी रहती है, तो गोल्ड को मजबूत आधार मिल सकता है. कुल मिलाकर, युद्ध समाप्त होने से गोल्ड पर तत्काल दबाव बन सकता है, लेकिन इन्फ्लेशन, इंटरेस्ट रेट्स, डॉलर और सेंट्रल बैंक बाइंग जैसे कारक आने वाले समय में इसकी दिशा तय करेंगे. ऐसे में 2026 गोल्ड मार्केट के लिए उतार-चढ़ाव वाला साल साबित हो सकता है.
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