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NSE IPO के पीछे ‘Rothschild’ कौन? जिसने ब्रिटेन युद्धों को फंड किया और अमेरिका को डिफॉल्ट से बचाया

NSE के मेगा IPO के लिए रोथ्सचाइल्ड एंड कंपनी को सलाहकार चुना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही वह बैंकिंग परिवार है जिसने नेपोलियन युद्धों के दौरान सरकारों को कर्ज दिया, स्वेज नहर सौदे में मदद की और अमेरिका को डिफॉल्ट से बचाने में भूमिका निभाई थी.

NSE IPO के सलाहकार Image Credit: Getty Images

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने आखिरकार अपना DRHP फाइल कर दिया है. दुनिया के इस सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज ने इस मेगा-लिस्टिंग की कानूनी और वित्तीय बारीकियों को संभालने के लिए वैश्विक वित्तीय सलाहकार फर्म रोथ्सचाइल्ड एंड कंपनी (Rothschild & Co) को अपना स्वतंत्र सलाहकार नियुक्त किया है. कंपनी इस लिस्टिंग के लिए लीड बैंकर्स, लीगल काउंसल और अन्य ब्रोकर्स को चुनने की प्रक्रिया का नेतृत्व कर रही है.

रोथ्सचाइल्ड एंड कंपनी कोई आम कंसल्टेंसी फर्म नहीं है. यह वही नाम है जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपने इंवेस्टमेंट से चमकाया है. जिसने जंग लड़ रहे देशों को कर्ज दिया, स्वेज नहर की खरीद में मदद की, अमेरिका जैसी महाशक्ति को डिफॉल्ट होने से बचाया और दुनिया के हीरा बाजार पर राज किया.

आइए जानते हैं कि एनएसई के इस मेगा-आईपीओ के पीछे मौजूद इस ‘रोथ्सचाइल्ड’ नाम का असल इतिहास और ताकत क्या है.

कौन हैं रोथ्सचाइल्ड?

इस साम्राज्य की शुरुआत 1744 में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में मेयर एम्सशेल रोथ्सचाइल्ड (Mayer Amschel Rothschild) के जन्म के साथ हुई थी. मेयर ने एक बेहद चतुर रणनीति अपनाई, उन्होंने अपने पांच बेटों को यूरोप के पांच प्रमुख वित्तीय केंद्रों (फ्रैंकफर्ट, लंदन, वियना, नेपल्स और पेरिस) में भेजा.

इस तरह उन्होंने आपस में जुड़े बैंकिंग घरानों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसने आने वाले समय में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया. एक मुट्ठी में बंद पांच तीर यह उनका पारिवारिक लोगो है जो उनकी एकता और पांचों भाइयों के साम्राज्य को दर्शाता है. जहां पुराने जमाने के बैंकर युद्ध या राजनीतिक उथल-पुथल में अपना सब कुछ गंवा बैठते थे, वहीं रोथ्सचाइल्ड परिवार ने अपनी संपत्ति को स्टॉक, बॉन्ड और कर्ज जैसे वित्तीय साधनों में सुरक्षित रखा.

इतिहास के वो फैसले, जिसने बदला दुनिया का नक्शा

19वीं और 20वीं सदी में इस बैंकिंग परिवार का दबदबा इतना था कि ब्रिटिश चांसलर डेविड लॉयड जॉर्ज ने एक बार नाथन लॉर्ड रोथ्सचाइल्ड को ब्रिटेन का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बताया था. इस परिवार के प्रभाव का अंदाजा इन ऐतिहासिक घटनाओं से लगाया जा सकता है:

  • ब्रिटेन के युद्ध की फंडिंग: 1803 के नेपोलियन युद्धों के दौरान, इस परिवार ने ब्रिटेन की सेना को सोने की सप्लाई और फंड पहुंचाने का काम किया. अकेले 1815 में, रोथ्सचाइल्ड ने ब्रिटिश सहयोगियों को 9.8 मिलियन पाउंड (आज के हिसाब से करीब 850 मिलियन पाउंड) का कर्ज दिया था.
  • स्वेज नहर और देशों की आजादी: ब्रिटिश सरकार को स्वेज नहर में हिस्सेदारी खरीदने के लिए वित्तीय मदद देने से लेकर ब्राजील को पुर्तगाल से आजादी दिलाने के लिए फंड जुटाने तक में इस परिवार की सीधी भूमिका थी.
  • अमेरिका को डिफॉल्ट से बचाया: साल 1893 के आर्थिक संकट के दौरान जब अमेरिका का सोने का रिजर्व खत्म होने की कगार पर था, तब रोथ्सचाइल्ड ने जेपी मॉर्गन के साथ मिलकर अमेरिकी सरकार को आपातकालीन मदद दी और देश को डिफॉल्ट होने से बचा लिया.
  • ग्लोबल बिजनेस की नींव: दुनिया की दिग्गज हीरा कंपनी ‘डी बीयर्स’ (De Beers) और माइनिंग क्षेत्र की बड़ी कंपनी ‘रियो टिंटो’ को खड़ा करने और उन्हें दुनिया पर राज कराने के पीछे इसी परिवार का पैसा था. डी बीयर्स का तो एक समय दुनिया के 80 से 85 फीसदी रफ डायमंड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में हिस्सेदारी थी.

आज कहां है रोथ्सचाइल्ड परिवार?

समय के साथ यह विशाल संपत्ति परिवार की कई शाखाओं में बंट गई. आज यह कोई एक एकल बैंकिंग साम्राज्य नहीं है, बल्कि दुनिया भर में फैले इसके वंशज इन्वेस्टमेंट, प्राइवेट बैंकिंग और परोपकार के कामों से जुड़े हैं. इंटरनेट पर अक्सर इस परिवार को लेकर कई तरह की अफवाहें और कॉन्सपिरेसी थ्योरी चलती हैं, लेकिन असलियत यह है कि आज यह परिवार अमीर और प्रभावशाली होने के बावजूद दुनिया का सबसे अमीर परिवार नहीं है.

हाल के वर्षों में इस परिवार के दो सबसे बड़े चेहरे- बैरन बेंजामिन डी रोथ्सचाइल्ड (2021 में निधन) और जैकब रोथ्सचाइल्ड (2024 की शुरुआत में निधन) का देहांत हो चुका है. आज की रोथ्सचाइल्ड एंड कंपनी एक आधुनिक वैश्विक वित्तीय सलाहकार घराना है, जो दुनिया भर की सरकारों, केंद्रीय बैंकों और विशाल कॉरपोरेट्स को विलय और पूंजी जुटाने की सलाह देती है.

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NSE के लिए क्यों है खास?

एनएसई द्वारा रोथ्सचाइल्ड को चुनना यह दिखाता है कि भारत के सबसे महत्वपूर्ण पूंजी बाजार संस्थान ने एक ऐसे सलाहकार पर भरोसा किया है जिसके पास वित्तीय जटिलताओं को सुलझाने का सदियों का अनुभव है.

19वीं सदी में देशों के युद्धों को फाइनेंस करने वाला यह नाम, आज 21वीं सदी के भारत के सबसे बड़े वित्तीय मील के पत्थर, यानी NSE के मेगा IPO को हकीकत बनाने के लिए पर्दे के पीछे से कमान संभाल रहा है.