कच्चा तेल 70 डॉलर के पार! जंग की आशंका से डरा बाजार, चार महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंचा ब्रेंट क्रूड

वैश्विक तेल बाजार में अचानक हलचल तेज हो गई है. अमेरिका और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिससे आगे सप्लाई और महंगाई को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं. बाजार की नजर अब आने वाले फैसलों पर टिकी है.

तेल के दामों में इजाफा Image Credit: Getty Images

Global crude oil market: दुनिया के कच्चे तेल बाजार में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव की आंच महसूस की जा रही है. अमेरिका और ईरान के बीच तीखी बयानबाजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जो पिछले करीब चार महीनों में पहली बार देखा गया स्तर है. बाजार को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.

70 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

लंदन में गुरुवार सुबह के कारोबार के दौरान ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड 2.4 फीसदी की तेजी के साथ 70.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. यह सितंबर के बाद पहली बार है जब ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर के ऊपर गया है. वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी तेज उछाल देखने को मिला और यह 2.6 फीसदी बढ़कर 64.82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. जून 2025 में तेल की कीमत 74 डॉलर तक पहुंची थी.

तेल बाजार में यह तेजी अचानक नहीं आई है. इसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंका है, जिसने सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है.

ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव

इस तेजी की बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का सख्त बयान है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर तुरंत बातचीत की मेज पर आना चाहिए.

ट्रंप ने साफ शब्दों में लिखा कि वह किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान ने बातचीत नहीं की तो अगला हमला पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है. ट्रंप का यह बयान जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों के संदर्भ में आया है.

ईरान की सख्त प्रतिक्रिया

ट्रंप की धमकी पर ईरान की ओर से भी कड़ा जवाब आया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि अगर अमेरिका ने कोई भी सैन्य कार्रवाई की तो ईरान तुरंत और पूरी ताकत से जवाब देगा. ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन पश्चिमी देश इसे परमाणु हथियार बनाने की कोशिश मानते हैं. इस टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का माहौल बना दिया है.

तेल सप्लाई पर मंडराता खतरा

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इसका सीधा असर तेल की सप्लाई पर पड़ेगा. ईरान रोजाना करीब 30 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है. किसी भी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में यह उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

इसके अलावा सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है. यह चैनल दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट रास्तों में से एक है. खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यहां टैंकरों की आवाजाही में रुकावट आती है तो वैश्विक बाजार में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.

बाजार क्यों हो रहा है चिंतित

हर्ग्रीव्स लैंसडाउन के इक्विटी रिसर्च प्रमुख डैरेन नाथन के मुताबिक, ईरान से जुड़ा कोई भी बड़ा टकराव न सिर्फ उत्पादन बल्कि ट्रांसपोर्ट को भी खतरे में डाल सकता है. उनका कहना है कि शब्दों की यह जंग जैसे-जैसे तेज हो रही है, वैसे-वैसे ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊपर जा रही हैं.

निवेशक पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक संकटों से सतर्क हैं. ऐसे में पश्चिम एशिया में एक और बड़ा तनाव तेल बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.

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फिलहाल बाजार पूरी तरह खबरों पर निर्भर है. अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोई सकारात्मक पहल होती है तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है. लेकिन अगर धमकियां हकीकत में बदलती हैं, तो तेल 70 डॉलर से भी ऊपर टिक सकता है और आगे और महंगा हो सकता है.