फिर लुढ़का रुपया, टच किया 92 का लेवल; कच्चे तेल की कीमत और ग्लोबल टेंशन ने बिगाड़ी चाल

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है. इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 91.96 प्रति डॉलर पर सेटल हुआ. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी फंड आउटफ्लो और जियोपॉलिटिकल टेंशन ने रुपये पर दबाव बनाए रखा.

रुपये में गिरावट जारी Image Credit: money9live.com

Rupee vs Dollar: दुनियाभर में बढ़ती अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते ग्लोबल मार्केट में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट बना हुआ है. इसी माहौल के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के बेहद करीब बंद हुआ. इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में बुधवार को रुपया 91.96 (प्रोविजनल) प्रति डॉलर पर सेटल हुआ. यह स्तर रुपये के ऐतिहासिक क्लोजिंग लो के आसपास है. फॉरेक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी फंड आउटफ्लो, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल टेंशन ने रुपये पर दबाव बनाए रखा.

दिनभर का कारोबार कैसा रहा

फॉरेक्स मार्केट में रुपये की शुरुआत 91.95 के स्तर पर हुई थी. शुरुआती कारोबार में रुपये ने मजबूती दिखाते हुए 91.82 का उच्च स्तर भी छुआ, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई. दिन चढ़ने के साथ विदेशी फंड्स की बिकवाली और डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर होता चला गया और कारोबार के दौरान 92 प्रति डॉलर का ऑल-टाइम इंट्रा-डे लो छू लिया. हालांकि, आखिर में रुपया पिछले बंद स्तर से 3 पैसे की मामूली बढ़त के साथ 91.96 पर बंद होने में सफल रहा.

विदेशी कारणों का दबाव

वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर दबाव डाला है. इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं. डॉलर इंडेक्स हल्की गिरावट के साथ 96.37 पर कारोबार करता दिखा. वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल 69.64 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, लेकिन हालिया उतार-चढ़ाव ने रुपये की चाल को प्रभावित किया.

इकोनॉमिक सर्वे ने जताई चिंता

संसद में पेश इकोनॉमिक सर्वे में भी बाहरी सेक्टर से जुड़े जोखिमों और विदेशी पूंजी के आउटफ्लो को लेकर चिंता जाहिर की गई है. सर्वे के मुताबिक, रुपये का 92 प्रति डॉलर तक फिसलना भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद को पूरी तरह नहीं दिखाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नियंत्रित महंगाई और बेहतर ग्रोथ आउटलुक के बावजूद निवेशकों की हिचकिचाहट की जांच की जानी चाहिए.

उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव

चॉइस वेल्थ के रिसर्च एंड प्रोडक्ट हेड अक्षत गर्ग ने कहा, “लगातार डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी पोर्टफोलियो आउटफ्लो ने मिलकर उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव बनाए रखा है, जिसमें रुपया भी कोई अपवाद नहीं है.” गर्ग ने आगे कहा कि महीने के आखिर में इंपोर्टर्स की मांग और प्रिकॉशनरी हेजिंग ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया है.

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