गुरुवार की रफ्तार में Gold ETF ने चांदी को पछाड़ा, 13% तक उछले दाम, जानें क्या रही वजहें

वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच कीमती धातुओं पर निवेशकों की नजर फिर से टिक गई है. वायदा बाजार से लेकर ETF तक, हलचल साफ दिख रही है. सुरक्षित निवेश की तलाश, अंतरराष्ट्रीय संकेत और बड़े निवेशकों की रणनीति में बदलाव ने इस सेगमेंट को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

Gold ETF Image Credit: money9 live AI image

गुरुवार, 29 जनवरी की सुबह कीमती धातुओं के बाजार में हलचल लेकर आई. सोना और चांदी दोनों के दाम तेजी से ऊपर गए, लेकिन इस बार चर्चा के केंद्र में गोल्ड ETF रहे. वायदा बाजार में आई तेज उछाल का असर सीधे ETF की कीमतों पर दिखा. वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों को लेकर संकेतों ने मिलकर ऐसा माहौल बना दिया, जहां Gold ETFs ने Silver ETFs से आगे निकलकर बाजी मार ली.

वायदा बाजार से शुरू हुई तेजी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के फरवरी वायदा कॉन्ट्रैक्ट में करीब 9 फीसदी की जोरदार छलांग देखने को मिली और यह 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. अप्रैल और जून के कॉन्ट्रैक्ट भी इसी रफ्तार से ऊपर गए और उन्होंने भी नए रिकॉर्ड बना लिए. चांदी में भी तेजी रही, लेकिन रफ्तार थोड़ी धीमी रही. मार्च वायदा कॉन्ट्रैक्ट लगभग 6 फीसदी बढ़कर 4,07,456 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंचा. मई और जुलाई के कॉन्ट्रैक्ट में भी इसी के आसपास बढ़त दर्ज हुई.

ETF में दिखा असर, गोल्ड आगे

वायदा बाजार की इस तेजी का असर सीधे ETF में दिखा. गोल्ड ETF की बढ़त सिल्वर ETF से ज्यादा रही. Kotak Gold ETF में 13 फीसदी से ज्यादा की उछाल आई और यह 155 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. Baroda BNP Paribas Gold ETF में करीब 10 फीसदी की तेजी रही. Axis Gold ETF, 360 ONE Gold ETF, Union Gold ETF, और LIC म्यूचुअल फंड के गोल्ड ETF में भी लगभग 9 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.

चांदी की बात करें तो मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ETF करीब 8 फीसदी चढ़कर 371.91 रुपये के नए उच्च स्तर पर पहुंचा. निप्पॉन इंडिया समेत अन्य सिल्वर ETF में भी लगभग इतनी ही तेजी रही, लेकिन कुल मिलाकर गोल्ड ETF ने बेहतर प्रदर्शन किया.

तेजी के पीछे क्या वजह रही

इस उछाल के पीछे कई वैश्विक कारण एक साथ सामने आए. अमेरिका के बढ़ते कर्ज और वैश्विक व्यापार ढांचे को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है. अब दुनिया का व्यापार एक ही देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता. अलग-अलग क्षेत्रीय देशों के समूह बन रहे हैं, और इसी अनिश्चित माहौल में निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं.

भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी तनाव कम नहीं है. अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी ने बाजार की चिंता बढ़ाई. इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों में कोई बदलाव न करना भी सोने और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स के लिए सकारात्मक रहा.

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गोल्ड और सिल्वर के बीच बदला संतुलन

पिछले 12 महीनों में चांदी ने करीब 200 फीसदी की शानदार बढ़त दिखाई है, जबकि सोने में लगभग 80 फीसदी की तेजी रही. इसी वजह से गोल्ड-सिल्वर रेशियो, जो महामारी के समय 127 तक चला गया था, अब घटकर 50 के आसपास आ गया है. इसका मतलब यह है कि चांदी पहले ही काफी तेज दौड़ चुकी है, जबकि हालिया दौर में सोना ज्यादा स्थिर और मजबूत दिख रहा है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.