TV9 NETWORK
User
Sign In

By signing in or creating an account, you agree with Associated Broadcasting Company's Terms & Conditions and Privacy Policy.

$107 पहुंचा कच्चा तेल! 35 साल के ट्रेंड से समझें अब कब मिलेगी राहत, महंगाई में सबसे ज्यादा झुलसते हैं ये सेक्टर्स

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है और इतिहास बता रहा है कि एक बार 80 डॉलर के ऊपर जाने के बाद कीमतें जल्दी नहीं गिरतीं. इसका असर महंगाई, कंपनियों के मुनाफे और आम लोगों की जेब पर साफ दिख सकता है, खासकर ऑटो, FMCG और सीमेंट सेक्टर में.

Crude Oil Trend Image Credit: Money9 Live

Crude Oil Price Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं. उबलती तेल की कीमतों के बीच, हालिया डेटा और पुराने ट्रेंड्स एक अहम संकेत दे रहे हैं. अगर टेक्निकल डेटा पर नजर डालें, तो ये पता चलता है कि जब भी कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाती है, तो इस लेवल से भाव को नीचे आने में फिर महीनों लग जाते हैं. यानी सस्ते कच्चे तेल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. आंकड़े और ट्रेंड बताते हैं कि 80 डॉलर से ऊपर से तेल की कीमतों में गिरावट आने में करीब एक साल का वक्त लग जाता है.

यही वजह है कि बाजार में तेल के बढ़ते दाम के साथ डर बढ़ता जा रहा है और अस्थिरता फैलती जा रही है. लंबे वक्त तक तेल जब ऊंचे स्तर पर रहता है तो इसका प्रभाव केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर कई स्तरों पर असर दिखाई देता है.

35 साल में चौथी बार 80 डॉलर के पार गया तेल

Ambit ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 35 साल में यह चौथी बार है जब कच्चा तेल 80 डॉलर के ऊपर ट्रेंड कर रहा है. इससे पहले 2007-08, 2010-14 और 2021-23 के दौरान भी ऐसा हुआ था, और हर बार कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं.

नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं कि जब भी तेल 80 डॉलर के स्तर को पार करता है, तो वह 12 महीने या उससे ज्यादा समय तक उस लेवल से नीचे नहीं आता.

  • एक फेज में तेल की कीमतें 13 महीने तक ऊंची बनी रहीं
  • दूसरे में तेल का भाव 50 महीने तक 80 डॉलर के ऊपर रहा
  • हालिया फेज में भी करीब 19 महीने तक कीमतें ऊंची स्तर पर थीं

इस ट्रेंड के आधार पर ये अनुमान लगाया जा सकता है कि, शुक्रवार को 107 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहे तेल कीमतों में गिरावट जल्दी नहीं आएगी.

तेल की बढ़ती कीमतें बढ़ाएगी महंगाई

ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल कमोडिटी इंडेक्स में 10 फीसदी बढ़ोतरी से भारत का WPI 5.7 फीसदी तक बढ़ सकता है. तेल की कीमतों का असर महंगाई पर आम तौर पर 1 महीने की देरी से दिखता है.

यानी, तेल की कीमतों में तेजी एक मल्टी-लेयर इन्फ्लेशन ट्रिगर बन जाती है.

यह भी पढ़ें: सरकार ने Income Tax Rules, 2026 किया नोटिफाई, शेयर, प्रॉपर्टी और एसेट्स पर टैक्स कैलकुलेशन का पूरा खेल बदला

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा मार?

जब तेल महंगा होता है, तो कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है. खासतौर पर वे सेक्टर जो कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स पर ज्यादा निर्भर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन हाई-ऑयल फेज में, कंपनियों की कच्चे माल की लागत 15% से 40% तक बढ़ी. वहीं ग्रॉस मार्जिन 78 से 658 बेसिस प्वाइंट तक घटे.

तेजी से बढ़ते दाम के बीच कुछ सेक्टर की कंपनियां अपने प्रोडक्ट की कीमत तुरंत नहीं बढ़ा पाती, जिससे उनका मुनाफा दब जाता है. इस माहौल के जद में सबसे ज्यादा ये सेक्टर आते हैं:

  • केमिकल्स
  • सीमेंट और बिल्डिंग मटेरियल
  • ऑटो
  • FMCG