अब इंडियन बास्केट में भी कच्चा तेल टूटा, कीमतों में 65 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट, कंपनियों को सीधा फायदा

जब भी दुनिया के किसी बड़े तेल प्रोडक्शन सेक्टर में तनाव बढ़ता है, उसका असर सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देता है. पिछले कुछ महीनों में वेस्ट एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने भी यही तस्वीर दिखाई. अब हालात बदलते दिख रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद बाजार का माहौल पहले से बेहतर हुआ है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. जहां जंग के दौरान तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, वहीं अब इनमें बड़ी गिरावट आई है.

क्या कम होंगी पेट्रोल की कीमतें. Image Credit: Canva/ Money9

India Basket Crude Oil Price: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के बाद भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है. अब इंडियन बास्केट में भी कच्चा तेल टूट चुका है. इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल की कीमत 24 जून 2026 तक घटकर 70.71 डॉलर प्रति बैरल रह गई है. जंग के दौरान यही कीमत 136 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी. यानी अब कच्चा तेल करीब 65 डॉलर प्रति बैरल सस्ता हो चुका है. इससे भारत का तेल आयात बिल कम हो सकता है. साथ ही तेल मार्केटिंग कंपनियों की लागत घटने और आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद बढ़ गई है.

जंग के दौरान तेजी से बढ़ी थीं कीमतें

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी. इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट को भी बंद कर दिया गया था. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इसके बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी.

  • जंग के दौरान 4 मई को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी.
  • तेल की कीमतों में इस तेजी का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों और अर्थव्यवस्थाओं पर भी देखने को मिला.
  • महंगे कच्चे तेल की वजह से कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई थी.
सोर्स: Trading Economics

अब कीमतों में आई बड़ी गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद बाजार में राहत देखने को मिली है. भारत के लिए इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल की कीमत 24 जून 2026 तक घटकर 70.71 डॉलर प्रति बैरल रह गई है. यह कीमत जंग के दौरान 136 डॉलर प्रति बैरल से भी पार कर गई हैं. इससे भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना पहले के मुकाबले सस्ता हो गया है.

सोर्स: PPAC.gov.in

क्या होता है इंडियन बास्केट?

इंडियन बास्केट वह औसत कीमत है, जिस पर भारत अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है. इसमें ब्रेंट, ओमान और दुबई ग्रेड के कच्चे तेल को शामिल किया जाता है. भारत की रिफाइनरियां हर महीने अलग-अलग अनुपात में इन ग्रेड का आयात करती हैं और उसी आधार पर इंडियन बास्केट की कीमत तय होती है.

कच्चे तेल (इंडियन बास्केट) की साल-दर-साल इंटरनेशनल FOB (फ्री ऑन बोर्ड) कीमत

सोर्स: Dataful.in

भारतीय तेल कंपनियों पर कैसा रहा असर

  • Q4 रिजल्ट के आंकड़ें कुछ और ही कर रहें बयां
कंपनी2025-26 मुनाफा (₹ करोड़)2024-25 मुनाफा (₹ करोड़)अंतर (₹ करोड़)ग्रोथ
IOC (इंडियन ऑयल)14,458.088,123.646,334+77.98%
BPCL (भारत पेट्रोलियम)5,624.544,391.831,233+28.07%
HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम)6,065.263,415.442,650+77.58%
  • पूरे साल का मुनाफा
कंपनी2025-26 मुनाफा (₹ करोड़)2024-25 मुनाफा (₹ करोड़)अंतर (₹ करोड़)ग्रोथ
IOC42,096.2613,507.0028,589+212%
BPCL25,843.4513,336.5512,507+93.8%
HPCL18,046.896,735.7011,311+168%
सोर्स: Q4 रिजल्ट

भारत को कैसे मिलेगा फायदा?

अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम रहती हैं, तो भारत का आयात बिल घट सकता है. इससे सरकार पर दबाव कम होगा और पेट्रोल, डीजल, गैस तथा अन्य ईंधन की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है. इसके साथ ही महंगाई को कंट्रोल करने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि आगे की स्थिति पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि वेस्ट एशिया में शांति कितने समय तक बनी रहती है.

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