कच्चे तेल की आग में झुलसेगा आपका बजट; महंगा हो सकता है पेट्रोल- डीजल; $70 अरब पहुंच सकता है देश का तेल बिल
पश्चिम एशिया तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और जल्द कम होने की उम्मीद नहीं है. भारत का सालाना तेल आयात बिल 70 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है. सप्लाई चेन बाधित होने, रिफाइनरी नुकसान और शिपिंग लागत बढ़ने से दबाव और बढ़ेगा. सरकार वैकल्पिक सोर्स से आयात बढ़ा सकती है, लेकिन महंगाई, मांग और मैन्युफैक्चरिंग पर असर पड़ना तय माना जा रहा है.

Crude Oil Prices: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और जल्द कम होने की उम्मीद नहीं है. पहले जो कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी वह अब काफी ऊपर बनी हुई है. भारत रोजाना करीब 43 लाख बैरल तेल आयात करता है. ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल पर बड़ा दबाव बनेगा. रिपोर्ट के मुताबिक सालाना आयात बिल में 70 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कीमतें पुराने स्तर पर लौटना मुश्किल है. इससे भारत जैसे बड़े आयातक देश पर सीधा असर पड़ेगा. कीमतों का ऊंचा स्तर लंबे समय तक बना रह सकता है. यह स्थिति बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा रही है.
भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा
भारत हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है. सालाना यह खर्च करीब 180 अरब डॉलर तक पहुंचता है. अब कीमतें बढ़ने से इसमें 70 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त बोझ आ सकता है. इससे देश के चालू खाते और वित्तीय संतुलन पर दबाव बढ़ेगा. सरकार और कंपनियों दोनों के लिए लागत बढ़ने वाली है.
होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ी चिंता
दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा तेल की सप्लाई को प्रभावित कर सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह क्षेत्र अभी सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है. अगर यहां तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है. इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी.
सप्लाई चेन पर पड़ा गहरा असर
युद्ध के कारण कई तेल और गैस रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा है. इन्हें दोबारा शुरू होने में काफी समय लगेगा. जब सप्लाई कम होती है तो कीमतें अपने आप बढ़ जाती हैं. इसके अलावा शिपिंग, बीमा और टैंकर की लागत भी बढ़ गई है. ये सभी कारक मिलकर तेल को और महंगा बना रहे हैं.
पेट्रोल डीजल और गैस पर बढ़ेगा दबाव
सरकार ने पहले एक्साइज ड्यूटी कम करके राहत देने की कोशिश की थी. लेकिन अब एविएशन फ्यूल और LPG के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर आम लोगों के खर्च पर पड़ेगा.
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भारत करेगा नए सोर्स से आयात
स्थिति से निपटने के लिए भारत अन्य देशों से तेल और गैस खरीद बढ़ा सकता है. इसमें अमेरिका रूस नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं. इससे सप्लाई में कुछ संतुलन आ सकता है. हालांकि कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं. इसका असर महंगाई, मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी दिखेगा.