Rajesh Exports को लग सकता है एक और बड़ा झटका! SEBI की कार्रवाई के बाद अब PLI स्कीम से बाहर होने का मंडराया खतरा

SEBI द्वारा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए जाने के बाद Rajesh Exports की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. केंद्र सरकार की ACC बैटरी स्टोरेज PLI स्कीम से कंपनी को बाहर किए जाने पर विचार किया जा रहा है और इस संबंध में अंतिम फैसला जल्द लिया जा सकता है. SEBI ने कंपनी पर 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने, फंड डायवर्जन और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं.

राजेश एक्सपोर्ट Image Credit: Money9 Live

Rajesh Exports: SEBI द्वारा लगाए गए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद Rajesh Exports की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. केंद्र सरकार की एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज PLI स्कीम से कंपनी को बाहर किए जाने पर विचार किया जा रहा है. मामले में अंतिम फैसला आने वाले दिनों में लिया जा सकता है. मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्री (MHI) अगले कुछ दिनों में इस संबंध में अंतिम निर्णय ले सकती है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब SEBI ने हाल ही में कंपनी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं.

मंत्रालय में बन रही है कंपनी को हटाने की राय

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्री (MHI) के भीतर इस बात को लेकर मजबूत राय बन रही है कि Rajesh Exports को PLI स्कीम के लाभार्थियों की सूची से बाहर कर दिया जाए. पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मामले को केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के समक्ष रखा जाएगा, जो हाल ही में किर्गिस्तान की आधिकारिक यात्रा से लौटे हैं. अंतिम निर्णय अगले कुछ दिनों में लिए जाने की संभावना है.

SEBI ने लगाए 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू बढ़ाने के आरोप

3 जून को जारी 109 पन्नों के अंतरिम आदेश में SEBI ने आरोप लगाया था कि बेंगलुरु स्थित Rajesh Exports ने वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच अपने रेवेन्यू के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया. नियामक के अनुसार, कंपनी ने कथित तौर पर 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू अधिक दिखाया, जो उसकी सहायक कंपनियों के कुल रेवेन्यू का लगभग 99.8 फीसदी हिस्सा था.

SEBI ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी से जुड़ी इकाइयों के माध्यम से फंड डायवर्जन, संबंधित पक्षों के साथ अपारदर्शी लेनदेन और आवश्यक खुलासों में चूक जैसी अनियमितताएं हुई हैं. जांच के दायरे में एलेस्ट प्राइवेट लिमिटेड और एसीसी एनर्जी स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड जैसी इकाइयां भी शामिल हैं, जो कंपनी के लिथियम-आयन सेल कारोबार से जुड़ी हैं.

प्रमोटर पर भी कार्रवाई

SEBI ने कंपनी के प्रमोटर और चेयरमैन Rajesh Mehta को अगली सूचना तक कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार का लेनदेन करने से रोक दिया है. इसके अलावा, नियामक ने कंपनी के खातों का नया फॉरेंसिक ऑडिट कराने का भी निर्देश दिया है.

कंपनी ने आरोपों को किया खारिज

Rajesh Exports और Rajesh Mehta ने SEBI के आरोपों से इनकार किया है. कंपनी का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है और उचित मंच पर अपना पक्ष रखेगी. एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज PLI स्कीम भारत में बैटरी निर्माण और एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. ऐसे में यदि Rajesh Exports को इस योजना से बाहर किया जाता है, तो यह कंपनी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.

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