होर्मुज संकट के बीच US का बड़ा दांव, रूसी तेल पर छूट बढ़ाने की तैयारी; 11 अप्रैल को खत्म हो रही डेडलाइन
ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. ट्रंप प्रशासन रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट को बढ़ाने पर विचार कर रहा है, ताकि सप्लाई स्थिर रखी जा सके और महंगाई को नियंत्रित किया जा सके. होर्मुज स्ट्रेट संकट ने सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ाया है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं. इस फैसले से भारत जैसे देशों को राहत मिल सकती है.
US Russian Oil Waiver: ईरान-इजरायल तनाव के बीच ग्लोबल ऑयल मार्केट में मची उथल-पुथल को संभालने के लिए अमेरिका बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन रूसी तेल पर लगी पाबंदियों में ढील देने वाले छुट को बढ़ा सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बढ़े और कीमतों पर दबाव कम किया जा सके. यह फैसला ऐसे समय पर लिया जा रहा है, जब युद्ध के चलते तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं महंगाई के दबाव से जूझ रही हैं.
क्या है छुट और क्यों है अहम
अमेरिकी ट्रेजरी ने मार्च के मध्य से 30 दिन का छुट लागू किया था, जिसके तहत कुछ देशों को समुद्री रास्ते से रूसी तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदने की अनुमति दी गई. यह छुट 11 अप्रैल को खत्म हो रहा है, लेकिन रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इसे जल्द ही बढ़ाया जा सकता है. इसका मकसद ग्लोबल सप्लाई को स्थिर रखना और ऊर्जा कीमतों को काबू में रखना है.
रूस के राष्ट्रपति दूत किरिल दिमित्रीव ने पहले कहा था कि इस छुट से करीब 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आ सकता है, जो लगभग एक दिन की वैश्विक खपत के बराबर है. ऐसे में यह कदम सप्लाई शॉक को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
युद्ध का असर और सप्लाई संकट
ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते होर्मुज स्ट्रेट आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है. इसी कारण कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई डिसरप्शन बताया है.
ऊर्जा कीमतों में तेजी अमेरिका में राजनीतिक मुद्दा भी बन गई है, खासकर नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले. ट्रंप प्रशासन के लिए फ्यूल प्राइस कंट्रोल करना एक बड़ा एजेंडा बन चुका है.
सहयोगियों और विपक्ष की चिंता
हालांकि इस छुट एक्सटेंशन को लेकर अमेरिका के भीतर और उसके सहयोगियों में मतभेद साफ दिख रहे हैं. उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने साफ कहा है कि रूस पर प्रतिबंधों को ढीला करने का यह सही समय नहीं है. उनका मानना है कि इससे यूक्रेन युद्ध में रूस को आर्थिक फायदा मिलेगा.
अमेरिका के भीतर भी विरोध तेज हो गया है. रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. सांसदों का कहना है कि इससे रूस और ईरान को फायदा होगा, जो पहले से ही अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं.
भारत समेत कई देशों के लिए राहत
इस बीच भारत जैसे देशों के लिए यह संभावित फैसला राहत भरा हो सकता है. भारत, जो ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है, युद्ध के चलते बढ़ती कीमतों से प्रभावित हो रहा है. ऐसे में रूसी तेल की उपलब्धता जारी रहने से भारत को सस्ता कच्चा तेल मिल सकता है और महंगाई पर भी कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है.
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