ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल नहीं हुए भारतीय बॉन्ड, ऑपरेशनल अड़चनों के चलते फैसला टला, ब्लूमबर्ग ने खुला रखा रिव्यू
ब्लूमबर्ग ने ऑपरेशनल अड़चनों के चलते भारतीय सरकारी बॉन्ड्स को ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल करने का फैसला टाल दिया है. पोस्ट-ट्रेड सेटलमेंट, ऑटोमेशन की कमी और फंड रजिस्ट्रेशन जैसे मुद्दों पर चिंता जताई गई है. ब्लूमबर्ग ने कहा कि इन फीडबैक के आधार पर उसकी अगली समीक्षा रिपोर्ट मिड-2026 में जारी की जाएगी.
भारतीय सरकारी बॉन्ड्स को अपने ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल करने को लेकर ब्लूमबर्ग इंडेक्स सर्विसेज ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. ऑपरेशनल चुनौतियों को देखते हुए ब्लूमबर्ग ने इस प्रक्रिया की समीक्षा को खुला रखने का फैसला किया है और 2026 तक बाजार से जुड़े सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत अपने सरकारी बॉन्ड बाजार में ज्यादा से ज्यादा विदेशी फंड आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है. जानकारों के मुताबिक, अगर भारतीय बॉन्ड्स को किसी बड़े ग्लोबल बेंचमार्क में शामिल किया जाता है, तो इससे अरबों डॉलर का पैसिव निवेश देश में आ सकता है.
अगली समीक्षा रिपोर्ट मिड-2026 में जारी की जाएगी
ब्लूमबर्ग की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भारतीय सरकारी बॉन्ड्स को ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल करने को लेकर हुई कंसल्टेशन प्रक्रिया में कई अहम चिंताएं सामने आई हैं. इनमें पोस्ट-ट्रेड टैक्स से जुड़ी सेटलमेंट और रिपैट्रिएशन में देरी, ट्रेडिंग वर्कफ्लो में पूरी तरह ऑटोमेशन की कमी और फंड रजिस्ट्रेशन की लंबी व जटिल प्रक्रिया शामिल है. वैश्विक निवेशकों का मानना है कि इन ऑपरेशनल कमियों को दूर किए बिना व्यापक निवेशक आधार वाले ग्लोबल बेंचमार्क में शामिल होना मुश्किल है.
ब्लूमबर्ग ने कहा कि इन फीडबैक के आधार पर उसकी अगली समीक्षा रिपोर्ट मिड-2026 में जारी की जाएगी. निवेशकों का मानना है कि मौजूदा ढांचे में सुधार जरूरी है, क्योंकि ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स ऐसे निवेशकों को दर्शाता है जिनकी ऑपरेशनल जरूरतें और मानक कहीं ज्यादा व्यापक और सख्त होते हैं.
विदेशी निवेशकों के लिए क्या कदम उठाए गए
कंसल्टेशन में शामिल प्रतिभागियों ने यह भी स्वीकार किया कि भारत ने अपने डेट मार्केट को खोलने की दिशा में अहम सुधार किए हैं. खासतौर पर फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए कई कैपिटल कंट्रोल हटाए गए हैं जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड्स में निवेश आसान हुआ है. बावजूद इसके, निवेशकों का कहना है कि उभरते बाजारों के लिए बने इंडेक्स और ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स की अपेक्षाएं अलग-अलग होती हैं और बाद वाले के लिए ज्यादा ऑपरेशनल एफिशिएंसी जरूरी है.
भविष्य की योजनाएं
ब्लूमबर्ग इंडेक्स सर्विसेज ने कहा है कि वह बाजार सहभागियों, कस्टोडियंस, रेगुलेटर्स और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर और पोस्ट-ट्रेड प्रक्रियाओं में सुधार की संभावनाओं पर काम करता रहेगा. कंपनी ने यह भी साफ किया कि अगर भविष्य में भारतीय बॉन्ड्स को इंडेक्स में शामिल करने का फैसला लिया जाता है, तो इसकी घोषणा पहले से की जाएगी और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. घोषणा और अमल के बीच कम से कम एक साल का समय दिया जाएगा, ताकि बाजार में किसी तरह की अस्थिरता न आए.