भारतीय नौसेना में शामिल हुआ ‘डॉल्फिन हंटर’ INS Anjadip, निर्माण में SAIL की रही अहम भूमिका, शेयरों में भी तेजी

भारतीय नौसेना के लिए तैयार हो रहा एक नया युद्धपोत चर्चा में है. स्वदेशी तकनीक, मजबूत निर्माण और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी खास क्षमताओं ने इसे खास बना दिया है. इसके निर्माण में देश की औद्योगिक ताकत की अहम भूमिका रही है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़े बदलाव का संकेत देती है.

INS Anjadip Image Credit: Money9 Live

भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है. शुक्रवार को भारतीय नौसेना ने युद्धपोत INS Anjadip को शामिल किया. INS Anjadip इस बात का उदाहरण है कि देश रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है. खास बात यह है कि इस जहाज के निर्माण में इस्तेमाल हुआ पूरा स्पेशल स्टील देश की सरकारी स्टील कंपनी Steel Authority of India Limited (SAIL) ने उपलब्ध कराया है, जिससे स्वदेशी उत्पादन की ताकत भी साफ दिखाई देती है. भारतीय नौसेना में स्टील इंडिया के बढ़ते रोल को देखते शेयर बाजार में भी निवेशक उमड़ रहे हैं. बीते एक साल में कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को 55 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा दिया है.

INS Anjadip के निर्माण में SAIL की भूमिका

SAIL ने बताया कि उसने Garden Reach Shipbuilders & Engineers Ltd (GRSE) द्वारा बनाए जा रहे INS Anjadip के लिए पूरी मात्रा में विशेष ग्रेड का स्टील उपलब्ध कराया है. INS Anjadip, Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW-SWC) कैटेगरी का तीसरा पोत है. इससे पहले INS Arnala और INS Androth को पिछले साल नौसेना में शामिल किया जा चुका है.

कुल मिलाकर, SAIL ने ASW-SWC कैटेगरी के आठ युद्धपोतों के लिए करीब 3,500 टन स्पेशल स्टील की आपूर्ति की है. यह स्टील SAIL के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट्स से आया है, जो देश की मजबूत घरेलू सप्लाई चेन को दर्शाता है.

क्यों कहा जाता है INS Anjadip को ‘डॉल्फिन हंटर’

INS Anjadip को खासतौर पर दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है. इसी वजह से इसे ‘डॉल्फिन हंटर’ कहा जाता है. PTI के मुताबिक, यह पोत तटीय इलाकों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है.

यह युद्धपोत 77 मीटर लंबा है और इसमें हाई-स्पीड वॉटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा है. इसकी मदद से यह पोत 25 नॉट्स की रफ्तार से चल सकता है, जिससे तेजी से प्रतिक्रिया देना और लंबे समय तक ऑपरेशन करना संभव होता है. इसमें अत्याधुनिक और स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम लगाए गए हैं.

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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम

INS Anjadip में SAIL की भागीदारी भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करती है. SAIL पहले भी INS Vikrant, INS Udaygiri, INS Nilgiri और INS Surat जैसे बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स के लिए स्पेशल स्टील सप्लाई कर चुकी है. यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है.

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