कलानिधि मारन का दावा, SpiceJet पर ब्याज समेत ₹400 करोड़ से अधिक का बकाया; पेमेंट को लेकर जारी है विवाद
KAL Airways की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील जयंत मेहता ने दलील दी कि 'उनकी बुक में ब्याज की गणना ठीक से नहीं की जा रही है. 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बकाया है. अदालत SpiceJet की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने हाई कोर्ट के पिछले आदेश के खिलाफ राहत मांगी थी.
सन ग्रुप के चेयरमैन कलानिधि मारन ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि स्पाइसजेट पर उनके लंबे समय से चल रहे आर्बिट्रेशन विवाद में ब्याज समेत 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बकाया है, जो कि नकदी की कमी से जूझ रही एयरलाइन द्वारा बताए गए 144.5 करोड़ रुपये के आंकड़े से कहीं अधिक है. KAL Airways की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील जयंत मेहता ने दलील दी कि ‘उनकी बुक में ब्याज की गणना ठीक से नहीं की जा रही है. 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बकाया है.
SpiceJet की याचिका पर सुनवाई
अदालत SpiceJet की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने हाई कोर्ट के पिछले आदेश के खिलाफ राहत मांगी थी. उस आदेश में SpiceJet को 14 अप्रैल तक 144.5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया था. SpiceJet की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में संघर्ष और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों के कारण मैं आर्थिक संकट से जूझ रहा हूं. इसीलिए मैं अगली तारीख से पहले अपनी संपत्ति बेचकर बकाया चुकाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं.
कोर्ट ने क्या कहा?
दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि 2023 में जिस चीज का पालन किया जाना था, उसमें 2026 की मैटेरियल को जोड़ा जा रहा है और अब पार्टी अपने केस के समर्थन में 2026 में होने वाले युद्ध का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है. फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने 270 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी को कैश कराने का निर्देश दिया और SpiceJet को एक तय समय-सीमा के भीतर ब्याज के तौर पर 75 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था. साथ ही चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न करने पर अवार्ड पूरी तरह से लागू हो जाएगा.
गुरुवार को, SpiceJet ने दलील दी कि पारित किया गया आदेश जनहित में होना चाहिए, और यह भी बताया कि यह देश की तीसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है.
फैसला सुरक्षित
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले सोमवार को, स्पाइसजेट ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि अगर उसे कलानिधि मारन और KAL एयरवेज के साथ चल रहे अपने लंबे विवाद में तुरंत 144.5 करोड़ रुपये जमा करने के लिए मजबूर किया गया, तो वह ‘ठप’ हो सकती है. इसके लिए उसने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुई रुकावटों का हवाला दिया.
KAL Airways ने दलील दी कि रिव्यू एप्लीकेशन ‘तलवार लटकाए रखने’ के लिए दायर की गई थी और कहा कि अवार्ड का भुगतान पैसे के रूप में किया जाना चाहिए, न कि प्रॉपर्टी के रूप में.
कमर्शियल प्रॉपर्टी देने का प्रस्ताव
SpiceJet ने 7 अप्रैल को एक रिव्यू पिटीशन दायर की, जिसमें हाई कोर्ट के उस पिछले निर्देश से राहत मांगी गई थी, जिसके तहत उसे 14 अप्रैल तक 44.5 करोड़ रुपये जमा करने थे. एयरलाइन ने तुरंत कैश पेमेंट करने की बजाय, सिक्योरिटी के तौर पर गुरुग्राम में एक एकड़ की कमर्शियल प्रॉपर्टी देने का भी प्रस्ताव रखा.
रोहतगी ने बताया कि यह प्रॉपर्टी किसी भी तरह के बोझ से मुक्त है और कंपनी की अपनी है. SpiceJet कोर्ट के सामने प्रॉपर्टी के टाइटल डीड्स जमा करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने इस एसेट को कैश में बदलने के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं, लेकिन ऐसे ट्रांजेक्शन में कई महीने लग सकते हैं और उसे किसी मजबूरी में कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘ मुझे बताया गया है कि सरकार एक पैकेज ला रही है, जिससे मुझे सरकारी गारंटी पर PSU बैंकों से लोन लेने का मौका मिलेगा. सरकार एयरलाइंस के लिए गारंटी देगी.’
लंबी कानूनी लड़ाई
KAL Airways के मालिक कलानिधि मारन हैं और SpiceJet तथा मारन के बीच चल रही लंबी कानूनी लड़ाई कई अदालती दौर से गुजर चुकी है. जुलाई 2018 में ट्रिब्यूनल ने मारन के 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने के दावे को खारिज कर दिया, लेकिन SpiceJet को वारंट और प्रेफरेंस शेयरों के संबंध में ब्याज सहित 579 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया.
SpiceJet ने कहा कि उसने मारन और KAL Airways को मूल राशि और ब्याज सहित लगभग 730 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है. जनवरी में दिल्ली हाई कोर्ट ने SpiceJet और उसके प्रमोटर अजय सिंह को 144.5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने पाया कि पिछले निर्देशों के तहत कुल 194.51 करोड़ रुपये बकाया थे. पहले से जमा किए गए 50 करोड़ रुपये को एडजस्ट करने के बाद, बकाया राशि 144.51 करोड़ रुपये रह गई.
कितना पुराना विवाद?
यह विवाद जनवरी 2015 का है, जब एयरलाइन की गंभीर वित्तीय संकट के दौरान मारन और KAL Airways ने SpiceJet में अपनी 58.46 फीसदी हिस्सेदारी अजय सिंह को ट्रांसफर कर दी थी. इस सौदे के हिस्से के रूप में मारन और KAL Airways ने कन्वर्टिबल वारंट और प्रेफरेंस शेयरों के जरिए एयरलाइन में लगभग 679 करोड़ रुपये का निवेश किया था.
बाद में मारन ने आरोप लगाया कि ये इंस्ट्रूमेंट्स नए मैनेजमेंट द्वारा जारी नहीं किए गए थे और रिफंड की मांग की, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों वाले तीन-सदस्यीय ट्रिब्यूनल के समक्ष आर्बिट्रेशन की कार्यवाही शुरू हुई.
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