थेरेपी से जिम तक का खर्च उठा रही कंपनियां, कर्मचारियों की सेहत से ऐसे हो रही 480 रुपये की बचत
कंपनियां अब कर्मचारियों को सिर्फ स्वास्थ्य बीमा तक सीमित नहीं रख रही हैं. थेरेपी, जिम, स्वास्थ्य जांच और टेलीहेल्थ जैसी सुविधाओं पर भी खर्च बढ़ रहा है. प्लम की रिपोर्ट के मुताबिक, बचाव वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर निवेश करने वाली कंपनियों में पुरानी बीमारियों से जुड़े बीमा क्लेम 13 फीसदी कम रहे. इससे हर कर्मचारी पर करीब 480 रुपये की प्रीमियम बचत हुई.
Highlights
- कंपनियां अब कर्मचारियों को थेरेपी, जिम और हेल्थ चेकअप जैसी सुविधाएं दे रही हैं.
- Preventive Healthcare पर खर्च करने वाली कंपनियों में Chronic Disease Claims 13 फीसदी कम रहे.
- कंपनियों को प्रति कर्मचारी करीब 480 रुपये की Premium Saving हुई.
अब कंपनियां कर्मचारियों को सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस नहीं दे रही हैं. कई कंपनियां थेरेपी, हेल्थ चेकअप, टेलीहेल्थ और जिम जैसी सर्विस भी दे रही हैं. इसका फायदा कर्मचारियों की सेहत के साथ कंपनियों को भी मिल रहा है. बचाव वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने वाली कंपनियों में पुरानी बीमारियों से जुड़े इंश्योरेंस क्लेम 13 फीसदी कम रहे. इससे कंपनियों को हर कर्मचारी पर करीब 480 रुपये की प्रीमियम बचत हुई. यानी कर्मचारियों की सेहत पर खर्च करने से कंपनियों का खर्च भी कम हो सकता है.
सेहत पर क्यों खर्च कर रही हैं कंपनियां
प्लम की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों के कर्मचारी लाभ देने का तरीका बदल रहा है. पहले कर्मचारी के बीमार होने के बाद इलाज और बीमा क्लेम पर खर्च किया जाता था. अब कंपनियां बीमारी से पहले ही उसकी जांच और रोकथाम पर पैसा खर्च कर रही हैं. इसमें हेल्थ चेकअप, टेलीहेल्थ और बीमारी की शुरुआती जांच जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसका मकसद बीमारी को गंभीर होने से पहले पहचानना है. इससे आगे चलकर कंपनी का स्वास्थ्य खर्च कम हो सकता है.
हर कर्मचारी पर 480 रुपये की बचत
रिपोर्ट के मुताबिक, बचाव वाली स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाली कंपनियों में पुरानी बीमारियों से जुड़े बीमा क्लेम 13 फीसदी कम रहे. इसकी तुलना ऐसी ही दूसरी कंपनियों से की गई, जहां ये सुविधाएं नहीं थीं. इस अंतर से कंपनियों को हर कर्मचारी पर करीब 480 रुपये की प्रीमियम बचत हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, यह बचत आगे भी बढ़ सकती है. अगले तीन साल में यह फायदा करीब 6 फीसदी सालाना की दर से बढ़ने की उम्मीद है.
थेरेपी और जिम का इस्तेमाल बढ़ा
कंपनियों की ओर से दी जा रही इन सुविधाओं का कर्मचारी इस्तेमाल भी कर रहे हैं. 61 फीसदी कर्मचारियों ने पहली बार हेल्थ चेकअप सुविधा का इस्तेमाल किया. 74 फीसदी कर्मचारियों ने पहली बार मानसिक स्वास्थ्य सहायता ली. वहीं 31 फीसदी कर्मचारियों ने पहली बार जिम सदस्यता का फायदा उठाया. इन सुविधाओं की वजह से कर्मचारियों को अपनी सेहत पर ध्यान देने का मौका मिला.
दोबारा हेल्थ चेकअप कराने वालों को फायदा
जिन कर्मचारियों ने दोबारा हेल्थ चेकअप कराई, उनमें से 70 फीसदी में हेल्थ चेकअप से जुड़े संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया. इसमें न्यूट्रिशन बॉडी मेटाबॉलिज्म और हार्ट हेल्थ जुड़े संकेतक शामिल थे. इसका मतलब है कि दोबारा हेल्थ चेकअप कराने से कई कर्मचारियों की सेहत में सुधार देखा गया. इससे कर्मचारियों को अपनी सेहत पर नजर रखने में मदद मिल सकती है.
कंपनियां अब बीमा से आगे बढ़ रही हैं
व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाली कंपनियों की हिस्सेदारी चार साल में 5 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हो गई है. 5 लाख रुपये से ज्यादा का बीमा कवर देने वाली कंपनियों की संख्या 53 फीसदी बढ़ी है. वहीं 75,000 रुपये से ज्यादा मातृत्व कवर देने वाली कंपनियों में 155 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. टर्म लाइफ और व्यक्तिगत दुर्घटना कवर देने वाली कंपनियों की संख्या भी 179 फीसदी बढ़ी है.
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स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की औसत संख्या एक से बढ़कर तीन हो गई है. वहीं कुल कर्मचारी लाभ खर्च में स्वास्थ्य सुविधाओं की हिस्सेदारी चार गुना बढ़ी है. करीब 2 फीसदी वेतन खर्च स्वास्थ्य लाभ पर करने वाली कंपनियां दो साल पहले शीर्ष 2 फीसदी कंपनियों में थीं. अब ऐसी कंपनियां करीब शीर्ष 10 फीसदी में आती हैं. इससे पता चलता है कि कंपनियां कर्मचारियों की सेहत पर पहले से ज्यादा खर्च कर रही हैं.
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