अमेरिका में धुरंधर हैं ये 42 भारतीय कंपनियां, ट्रेड डील ने दिया गोल्डन चांस, USA से 100% तक कमाई, शेयरों पर रखें नजर

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद अमेरिकी बाजार एक बार फिर भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर के रूप में उभरा है. लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि कई भारतीय आईटी और फार्मा कंपनियां अपनी कमाई के लिए अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर हैं. यह निर्भरता जहां विकास का रास्ता दिखाती है, वहीं जोखिम भी बढ़ाती है.

Indian Companies on US Revenues Image Credit: @AI/Money9live

Indian Companies on US Revenues: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से इंतजार की जा रही ट्रेड डील के बाद भारतीय निवेशकों, उद्योगपतियों और कॉरपोरेट कंपनियों की नजरें एक बार फिर अमेरिकी बाजार पर टिक गई हैं. इस डील से नए व्यापारिक अवसर खुलने की उम्मीद है, लेकिन इसी बीच एक अहम सवाल भी उठ रहा है. क्या भारतीय कंपनियां अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो चुकी हैं?

EY Parthenon में मैनेजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) Ankur Aggarwal ने अपने लिंक्डइन अकाउंट पर एक डेटा साझा किया है. इसके अनुसार, कई बड़ी भारतीय कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है. खासकर आईटी (Software Services) और फार्मा सेक्टर की कंपनियां अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर हैं. जैसे-जैसे इन कंपनियों का कारोबार बढ़ता है उसी तरह इनके शेयरों में भी हलचल दिख सकता है. इसलिए निवेशकों को इनके शेयरों पर नजर रखनी चाहिए.

IT कंपनियों की सबसे ज्यादा निर्भरता

आईटी सेक्टर इस लिस्ट में सबसे आगे है. Birlasoft की करीब 86% कमाई अमेरिका से होती है, वहीं MphasiS की 81% और eClerx Services की लगभग 76% आय अमेरिकी क्लाइंट्स से आती है. इससे साफ है कि भारत की आईटी इंडस्ट्री के लिए अमेरिका सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि कमाई की रीढ़ बन चुका है. अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती आती है, तो इसका सीधा असर इन कंपनियों पर पड़ सकता है.

कंपनीUSA से रेवेन्यू (%)
KPIT Technologies20.58
Newgen Software Tech21.64
Oracle Financial Services27
Tata Elxsi30.9
Tech Mahindra50.8
Coforge56
Wipro62.68
HCL Technologies65.5
Firstsource Solutions66.3
Zensar Technologies67.3
eClerx Services76
Mphasis81.43
Birlasoft85.7

फार्मा सेक्टर भी पीछे नहीं

दवा बनाने वाली भारतीय कंपनियां भी अमेरिका पर काफी निर्भर हैं. Granules India की करीब 77% आय, Dr. Reddy’s Lab की लगभग 46% और Zydus Lifesciences की करीब 45% कमाई अमेरिका से आती है. अमेरिका का हेल्थकेयर बाजार बड़ा है और यहां से मिलने वाला मुनाफा भारतीय फार्मा कंपनियों को रिसर्च और विस्तार का मौका देता है, लेकिन ज्यादा निर्भरता जोखिम भी बढ़ाती है.

कंपनीUSA से रेवेन्यू (%)
Ipca Laboratories17.83
Divi’s Lab18.25
Ajanta Pharma19.55
Alkem Laboratories28.88
Sun Pharma Industries33.26
Lupin38
Neuland Laboratories39.54
Biocon43.75
Zydus Lifesciences44.89
Aurobindo Pharma45.3
Dr. Reddy’s Lab48.66
Marksans Pharma51.8
Gland Pharma52.69
Natco Pharma70.49
Granules India77

आईटी-फार्मा के अलावा भी अमेरिका का असर

सिर्फ आईटी और फार्मा ही नहीं, बल्कि केमिकल्स, एफएमसीजी और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर भी अमेरिकी बाजार से जुड़े हैं. Clean Science, Tata Chemicals, LT Foods और Avanti Feeds जैसी कंपनियों की आय का अच्छा-खासा हिस्सा अमेरिका से आता है. इससे पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था किस तरह वैश्विक बाजारों से जुड़ चुकी है. साथ ही अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर है.

Chemicals Sector

कंपनीUSA से रेवेन्यू (%)
Clean Science18
Gujarat Fluorochemicals19.35
Tata Chemicals35.06

Auto Ancillary

कंपनीUSA से रेवेन्यू (%)
Samvardhana Motherson20

Consumer Durables / Manufacturing

कंपनीसेक्टरUSA से रेवेन्यू (%)
Sundram FastenersConsumer Durables22.36
Elgi EquipmentsPumps23.24
HindalcoMetals23.08
Bharat ForgeForging & Casting44.33

FMCG / Food

कंपनीUSA से रेवेन्यू (%)
LT Foods38.53
Avanti Feeds69

Textiles

कंपनीUSA से रेवेन्यू (%)
Trident39.28

पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर कंपनी

Sagility India एक ऐसा उदाहरण है, जिसकी 100% कमाई अमेरिका से आती है. यह एक तरफ बड़ा मौका है, लेकिन दूसरी तरफ बहुत बड़ा जोखिम भी. अगर किसी वजह से अमेरिकी बाजार में दिक्कत आती है, तो ऐसी कंपनियों के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.

कंपनीUSA से रेवेन्यू (%)
Syngene International64.66
Sagility India100

कितना सही है एक देश पर निर्भरता?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से नए मौके जरूर बनेंगे और अमेरिकी बाजार भारतीय कंपनियों के लिए आगे भी अहम बना रहेगा. लेकिन कंपनियों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा. यूरोप, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और एशिया जैसे वैकल्पिक बाजारों में भी विस्तार जरूरी है, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके.

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