अब सोना-चांदी होगा सस्‍ता, सरकार ने घटाया बेस इंपोर्ट प्राइस, कस्टम ड्यूटी का बोझ होगा कम, जानें किसे मिलेगा फायदा

सरकार ने सोना और चांदी पर लगने वाले बेस इंपोर्ट प्राइस घटाकर कस्टम ड्यूटी का बोझ कम कर दिया है, जिससे इन धातुओं का आयात सस्ता पड़ेगा और कारोबारियों को राहत मिलेगी. सोने की बेस कीमत पर इंपोट ड्यूटी कम होने का फायदा बुलियन और ज्वैलरी इंडस्ट्री को मिलेगा. हालांकि वैश्विक कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होने से आयात बिल और ट्रेड डेफिसिट पर दबाव बना रह सकता है.

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Gold-Silver Import base price cut: सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड हाई पर पहुंच चुके हैं. हाल ही में तीन दिन की गिरावट के बाद इन कीमती धातुओं ने दोबारा बाउंस बैक किया है. जिसके चलते 3 फरवरी से दोबारा इनकी कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिला. गोल्‍ड और सिल्‍वर की बढ़ती कीमतों के चलते ये खरीदारों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है, लेकिन जल्‍द निवेशकों को राहत मिलने वाली है. दरअसल सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर बड़ी राहत दी है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स यानी CBIC ने बेस इंपोर्ट प्राइस घटा दी है, जिससे सोना-चांदी अब सस्‍ते हो जाएंगे.

नए नोटिफिकेशन के मुताबिक सोने की बेस इंपोर्ट प्राइस करीब 50 डॉलर घटाकर 1,518 डॉलर प्रति 10 ग्राम कर दी गई है. वहीं चांदी की कीमत में 800 डॉलर से ज्यादा की कटौती करते हुए इसे 2,657 डॉलर प्रति किलोग्राम कर दिया गया है. इससे बुलियन आयातकों और ज्वैलरी कारोबारियों को सीधा फायदा मिलेगा. इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से कस्टम ड्यूटी की गणना कम वैल्यू पर होगी और आयात सस्ता पड़ेगा. यह फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें रिकॉर्ड हाई के आसपास बनी हुई हैं.

इन चीजों पर लागू होगा नियम

इंपोर्ट ड्यूटी में यह राहत हाई प्योरिटी गोल्ड बार, गोल्ड कॉइन, सिल्वर बुलियन और मेडेलियन पर लागू होगी. हालांकि ज्वैलरी, तैयार आभूषण और पोस्ट या कूरियर से आने वाले आयात इस दायरे में शामिल नहीं हैं. बता दें सरकार आमतौर पर हर पखवाड़े बेस इंपोर्ट प्राइस की समीक्षा करती है. इससे पहले चांदी की कीमत 27 जनवरी और सोने की 22 जनवरी को तय की गई थी.

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दुनिया का सबसे बड़ा गोल्‍ड उपभोक्‍ता

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है, जबकि चांदी का सबसे बड़ा बाजार है. देश अपनी करीब पूरी सोने की जरूरत और 80% से ज्यादा चांदी विदेशों से मंगाता है. पिछले साल सोना-चांदी आयात पर देश ने विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा खर्च किया था, और 2026 में बढ़ती कीमतों के कारण यह बिल और बढ़ सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर सोना-चांदी महंगा होने के बावजूद बेस प्राइस घटाने से आयात बिल पर कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन भारत अपनी ज्यादातर मांग आयात से पूरी करता है, ऐसे में कीमतें ऊंची रहने से ट्रेड डेफिसिट और रुपये पर दबाव बढ़ने का खतरा बना रहेगा.