कितने तरह का होता है कच्चा तेल, रुस और वेनेजुएला के तेल में क्या अंतर; कौन है सस्ता

कच्चा तेल अलग -अलग क्वालिटी का होता है और इसकी कीमत घनत्व और सल्फर की मात्रा से तय होती है. इसी आधार पर तेल को हल्का, भारी, मीठा और खट्टा कैटेरगी में बांटा जाता है. रूस और वेनेजुएला दोनों भारी और खट्टे तेल के लिए जाने जाते हैं, लेकिन रूस का तेल कम गाढ़ा है. मौजूदा हालात में रूस का तेल वेनेजुएला की तुलना में सस्ता मिल रहा है.

तेल को हल्का, भारी, मीठा और खट्टा कैटेरगी में बांटा जाता है. Image Credit: money9live

Crude Oil Types: कच्चा तेल दुनिया की अर्थव्यवस्था का अहम आधार माना जाता है. पेट्रोल- डीजल से लेकर प्लास्टिक और केमिकल तक इसी से बनते हैं. लेकिन हर कच्चा तेल एक जैसा नहीं होता. उसकी क्वालिटी, घनत्व(Density) और सल्फर की मात्रा पर निर्भर करती है. इन्हीं वजहों से अलग- अलग देशों के तेल की कीमत भी अलग होती है. रूस और वेनेजुएला दोनों बड़े तेल के प्रोड्यूसर देश हैं, लेकिन उनके तेल में फर्क है. भारत के लिए भी यह फर्क काफी मायने रखता है क्योंकि देश अपनी ज्यादातर जरूरत आयात से पूरी करता है.

कितने प्रकार का होता है कच्चा तेल

कच्चा तेल मुख्य रूप से घनत्व और सल्फर की मात्रा के आधार पर बांटा जाता है. हल्का तेल कम गाढ़ा होता है और इससे पेट्रोल डीजल आसानी से बन जाता है. भारी तेल ज्यादा गाढ़ा होता है जिससे डामर जैसे प्रोडक्ट ज्यादा निकलते हैं. इसी तरह मीठा (Sweet) तेल वह होता है जिसमें सल्फर कम होता है. खट्टे (sour) तेल में सल्फर ज्यादा होता है और इसे साफ करना महंगा पड़ता है.

हल्का और भारी तेल में अंतर

हल्का कच्चा तेल रिफाइन करना आसान होता है और इससे ज्यादा उपयोगी ईंधन निकलता है. इसलिए इसकी कीमत आमतौर पर ज्यादा होती है. भारी तेल गाढ़ा और चिपचिपा होता है. इससे डामर और फ्यूल ऑयल ज्यादा बनता है. भारी तेल को प्रोसेस करने में ज्यादा लागत आती है. इसी कारण कई रिफाइनरी हल्के तेल को ज्यादा पसंद करती हैं.

क्यों अहम है मीठा और खट्टा तेल

मीठे तेल में सल्फर की मात्रा कम होती है. यह पर्यावरण के लिए कम नुकसानदायक माना जाता है. खट्टे तेल में सल्फर ज्यादा होता है जिससे प्रदूषण बढ़ता है. इसे उपयोग लायक बनाने के लिए खास तकनीक की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि खट्टा तेल आमतौर पर सस्ता बिकता है. कीमत तय करने में यह बड़ा फैक्टर माना जाता है.

रूस और वेनेजुएला के तेल में क्या फर्क

रूस का प्रमुख यूराल्स कच्चा तेल भारी और खट्टा कैटेगरी में आता है. लेकिन यह वेनेजुएला के तेल के मुकाबले कम गाढ़ा होता है. वहीं वेनेजुएला का तेल दुनिया के सबसे भारी तेलों में गिना जाता है. यह डामर जैसा चिपचिपा होता है. इसे निकालने और रिफाइन करने के लिए एडवांस टेक्निक और ज्यादा खर्च लगता है.

कौन सा तेल ज्यादा सस्ता

वर्तमान हालात में रूस का तेल ज्यादा सस्ता पड़ रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद लगे प्रतिबंधों के कारण रूस कई देशों को डिस्काउंट पर तेल बेच रहा है. रिपोर्ट के अनुसार रूसी तेल वेनेजुएला के तेल से प्रति बैरल कई डॉलर सस्ता है. वेनेजुएला का तेल करीब 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास माना जा रहा है. हालांकि अगर वेनेजुएला ज्यादा छूट दे तो वह रूस को टक्कर दे सकता है.

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भारत के लिए कौन सही

भारत अपनी लगभग 89 फीसदी तेल जरूरत आयात से पूरी करता है. रूस फिलहाल भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन चुका है. सस्ता तेल मिलने से भारत को महंगाई और व्यापार घाटा संभालने में मदद मिलती है. इसी वजह से रूस और वेनेजुएला के तेल की क्वालिटी और कीमत भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम है.