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1,26,68,06,12,956.76 करोड़ का था बकाया, Videocon के पूर्व डायरेक्टर वेणुगोपाल धूत हुए दिवालिया

Venugopal Nandlal Dhoot Bankrupt: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अर्जी पर बैंकरप्ट घोषित कर दिया है.

वेणुगोपाल नंदलाल धूत Image Credit: Ashesh Shah/Mint via Getty Images

Highlights

  • वेणुगोपाल धूत को घोषित किया दिवालिया.
  • एसबीआई की याचिका पर आया फैसला.
  • कर्ज भुगतान योजना पूरी तरह फेल.

Venugopal Nandlal Dhoot Bankrupt: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की याचिका पर दिवालिया घोषित कर दिया है. यह याचिका उनके पर्सनल इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस और रीपेमेंट प्लान के फेल होने के बाद दायर की गई थी. ज्यूडिशियल मेंबर विनय गोयल और टेक्निकल मेंबर चरणजीत सिंह गुलाटी वाले ट्रिब्यूनल ने 5 नवंबर को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत बैंकरप्सी ऑर्डर पास किया है.

NCLT ने नोट किया कि SBI ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (VIL) द्वारा ली गई क्रेडिट सुविधाओं के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर धूत के खिलाफ बैंकरप्सी की कार्रवाई शुरू की थी. ऑर्डर के अनुसार, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर धूत ने कंपनी को दी गई अलग-अलग क्रेडिट सुविधाओं के संबंध में पर्सनल गारंटी दी थी. इन सुविधाओं में टर्म लोन, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड से संबंधित सुविधाएं और वर्किंग कैपिटल लोन शामिल थे.

ट्रिब्यूनल ने रिकॉर्ड किया कि लेंडर्स ने फरवरी 2018 में गारंटी का इस्तेमाल किया था. डिमांड नोटिस में लोन फैसिलिटी के तहत 3,171.37 करोड़ रुपए, VTL फैसिलिटी के तहत 676.91 करोड़ रुपए और वर्किंग कैपिटल फैसिलिटी के तहत 795.57 करोड़ रुपए के क्लेम शामिल थे, साथ ही लागू ब्याज और दूसरी रकम भी शामिल थी.

वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को जून 2018 में कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस में शामिल किया गया था. बाद में इस कार्रवाई को वीडियोकॉन ग्रुप की दूसरी कंपनियों से जुड़ी कार्रवाई के साथ मिला दिया गया और ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के जमा किए गए रिजॉल्यूशन प्लान को जून 2021 में NCLT ने मंजूरी दे दी. ऑर्डर में कहा गया कि धूत का पर्सनल इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस अप्रैल 2026 में शुरू किया गया था. हालांकि, उनके प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान को क्रेडिटर्स से मंजूरी नहीं मिली.

36 महीने में 600 करोड़ देने की पेशकश

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, धूत ने सिलीगुड़ी में एक प्रस्तावित डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा एक रीपेमेंट प्रपोजल दिया था, जिसमें 36 महीने के समय में 600 करोड़ रुपए देने की पेशकश की गई थी. ट्रिब्यूनल ने दर्ज किया कि यह प्रपोजल भविष्य के डेवलपमेंट, मंजूरी और कैश फ्लो पर निर्भर था और इसमें किसी भी शुरुआती पेमेंट का कोई प्रावधान नहीं था.

रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने यह भी बताया था कि रीपेमेंट प्लान IBC के तहत ज़रूरी होने पर उनसे सलाह करके तैयार नहीं किया गया था. इसके बाद क्रेडिटर्स ने पर्सनल इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस को बंद करने और बैंकरप्सी की कार्रवाई शुरू करने का फ़ैसला किया.

12668 करोड़ की रकम थी बाकी

NCLT ने पहले 17 जुलाई को रीपेमेंट प्लान को खारिज कर दिया था और पर्सनल इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस को खत्म कर दिया था, जबकि क्रेडिटर्स और देनदार को IBC के नियमों के तहत बैंकरप्सी की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार दिया था. इसके बाद SBI ने मौजूदा बैंकरप्सी याचिका दायर की, बैंक ने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक, ब्याज और पेनल्टी मिलाकर कुल डिफ़ॉल्ट रकम 1,26,68,06,12,956.76 रुपए या लगभग 12,668 करोड़ रुपए थी.

रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट्स की जांच करने के बाद, ट्रिब्यूनल ने कहा कि वह संतुष्ट है कि याचिका IBC की धारा 123 के तहत बताई गई जरूरतों का पालन करती है. ट्रिब्यूनल ने याचिका स्वीकार करने से पहले कहा, हम संतुष्ट हैं कि याचिका कोड की धारा 123 में बताई गई सभी जरूरतों का पालन करती है. इसके बाद NCLT ने धूत को दिवालिया घोषित कर दिया और बैंकरप्सी प्रोसेस को पूरा करने के लिए आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया.

ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि धूत की संपत्ति तुरंत बैंकरप्सी ट्रस्टी के पास चली जाएगी और IBC के नियमों के अनुसार क्रेडिटर्स के बीच इसका मैनेजमेंट और बंटवारा किया जाएगा. धूत को सात दिनों के अंदर ट्रस्टी को अपनी फाइनेंशियल स्थिति का स्टेटमेंट जमा करने का भी निर्देश दिया.

बैंकरप्सी ट्रस्टी को क्रेडिटर्स को बताने, क्लेम मंगाने के लिए पब्लिक नोटिस जारी करने और बैंकरप्सी शुरू होने की तारीख से 90 दिनों के अंदर NCLT और कमिटी ऑफ़ क्रेडिटर्स को शुरुआती रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक धूत को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के सेक्शन 138 के तहत डिस्चार्ज नहीं कर दिया जाता.

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