Gensol BluSmart की 5000 EVs की होगी नीलामी! 663 करोड़ के लोन वसूली का PFC और IREDA बना रहे प्लान

Gensol को 5,000 से ज्यादा EVs खरीदने के लिए लोन देने वाली पावर फाइनेंस कॉर्प (PFC) और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) अब उन इलेक्ट्रिक वाहनों को नीलाम करने की योजना बना रही हैं ताकि जेनसोल को दिए गए लोन की वसूली की जा सके.

जेनसोल से लोन वसूलने के लिए Ireda करेगा 5000 EVs की नीलामी Image Credit: Freepik

Gensol Update: जेनसोल पर सेबी का डंडा चलने के बाद से इसकी मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही. जेनसोल को एक और झटका देते हुए इसे लोन देने वाली कंपनियों ने इसकी EVs को नीलाम करने का फैसला किया है. सरकारी वित्तीय संस्थाएं पावर फाइनेंस कॉर्प (PFC) और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) ने जेनसोल को EV खरीदने के लिए लोन दिया था. जेनसोल ने EVs खरीदकर BluSmart नाम की कैब सर्विस को गाड़ियां लीज पर दी थी. अब जेनसोल आर्थिक संकट में फंसा है और PFC और IREDA इस पर विचार कर रही हैं कि EVs को नीलाम कर जेनसोल को दिया लोन रिकवर किया जाए.

Gensol के पास कितनी EVs हैं?

PFC और IREDA ने कुल मिलाकर 5,000 से ज्यादा EVs के लिए फाइनेंस किया था, जो अब उनके नाम पर गिरवी रखी गई हैं. उन्हें डर है कि जेनसोल अगर डिफॉल्ट करता है तो ये लोन NPA बन जाएगा और पैसा वसूलना मुश्किल हो जाएगा.

दोनों कंपनियों की चिंताएं भी सही है क्योंकि जेनसोल ने गाड़ियां BluSmart को दी थी और जेनसोल को ब्लूस्मार्ट से लीज का पैसा आता था लेकिन अब 17 अप्रैल से ब्लूस्मार्ट बंद हो गई तो अब जेनसोल के पास लोन चुकाने का जरिया भी बंद हो गया है.

Gensol को कितना लोन मिला था?

PFC और IREDA ने जेनसोल को लगभग 663 करोड़ रुपए का लोन दिया था.

वहीं जरूरत पड़ने पर लोन देने वाली कंपनियां स्वतंत्र रूप से जेनसोल और उसके प्रमोटरों के खिलाफ वसूली की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं और उनके गिरवी रखे गए शेयरों को भी बेच सकती हैं. स्टॉक एक्सचेंज के अनुसार, प्रमोटरों के पास जेनसोल के 62.65% शेयर हैं, जिनमें से 81.6% हिस्सेदारी गिरवी रखी हुई है.

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Gensol के साथ क्या हुआ?

जेनसोल और BluSmart इन दोनों कंपनियों के प्रमोटर हैं अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी. सेबी ने इन दोनों पर आरोप लगाए कि इन्होंने कंपनी का पैसा गलत तरीके से इस्तेमाल किया है. इसके चलते इन पर शेयर बाजार में बैन लगा दिया गया है और ये किसी भी लिस्टेड कंपनी में कोई पद नहीं रख सकते. दोनों भाइयों ने बोर्ड और मैनेजमेंट से इस्तीफा दे दिया है. अब उन्हें अपना जवाब देने के लिए 21 दिन का समय मिला है.

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