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1.2 करोड़ गिग वर्कर्स के सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स के लिए प्लान, हर ट्रांजैक्शन पर एग्रीगेटर्स से वसूलेगी सरकार 2% फीस

इस योजना को अंतिम रूप देने और इसके एग्जीक्यूशन की देखरेख के लिए पिछले हफ्ते गठित 'नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड' इस महीने के दूसरे भाग में बैठक करेगा, जिसमें योजना के स्वरूप पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

गिग वर्कर को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स Image Credit: money9live

Highlights

  • के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि यह योजना लगभग तैयार है.
  • इसमें केंद्र सरकार या गिग वर्करों की ओर से कोई योगदान नहीं होगा.
  • एग्रीगेटर्स पर ट्रांजैक्शन-बेस्ड शुल्क लगाने का प्रस्ताव इंडस्ट्री की ओर से आए सुझावों के बाद आया है.

सरकार 1 करोड़ 20 लाख (12 मिलियन) से अधिक गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा बेनिफिट्स को फंड करने की योजना बना रही है. इसके लिए सरकार एग्रीगेटर्स पर कुल टर्नओवर के बजाय प्रति ट्रांजैक्शन 2 फीसदी लेवी (शुल्क) लगाने पर विचार कर रही है. इस योजना को अंतिम रूप देने और इसके एग्जीक्यूशन की देखरेख के लिए पिछले हफ्ते गठित ‘नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड’ इस महीने के दूसरे भाग में बैठक करेगा, जिसमें योजना के स्वरूप पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

ट्रांजैक्शन-आधारित बेनिफिट्स

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस चर्चा में शामिल एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एग्रीगेटर्स का एक वर्ग दूसरे वर्ग को सब्सिडी न दे. इसलिए इसे टर्नओवर-आधारित बनाने के बजाय ट्रांजैक्शन-आधारित बनाने का झुकाव है. एक अन्य एक्सपर्ट ने कहा, ‘इस बात पर लगभग सहमति है कि शुल्क केवल उस गिग रेवेन्यू पर लगाया जाना चाहिए जो सीधे तौर पर बिजनेस से जुड़ा हो.’

2027 में पेश की जा सकती है स्कीम

ईटी ने सरकार के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि यह योजना लगभग तैयार है और इसे 2027 में पेश किया जा सकता है. इससे पता चलता है कि सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को जल्द से जल्द सामाजिक सुरक्षा कवर देने पर विशेष ध्यान दे रही है. बेनिफिट्स की सूची का विस्तार बाद में किया जाएगा.

इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, इस योजना के लिए पूरा फंड एग्रीगेटर्स द्वारा ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ के माध्यम से दिया जाएगा. इसमें केंद्र सरकार या गिग वर्करों की ओर से कोई योगदान नहीं होगा.

किस तरह के बेनिफिट्स मिलेंगे?

इस योजना के तहत जीवन और दिव्यांगता बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ जैसे फायदे मिलने की उम्मीद है. हालांकि, पेंशन, प्रोविडेंट फंड और बुढ़ापे से जुड़े अन्य लाभ बाद में शुरू किए जा सकते हैं, जब सरकार को यह भरोसा हो जाए कि गिग वर्कर लंबे समय तक इस काम से जुड़े रहेंगे.

इंडस्ट्री की ओर से आए सुझाव

एग्रीगेटर्स पर ट्रांजैक्शन-बेस्ड शुल्क लगाने का प्रस्ताव इंडस्ट्री की ओर से आए सुझावों के बाद आया है. इंडस्ट्री का कहना है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर टर्नओवर की गणना करने का तरीका अलग-अलग होता है. भारत में गिग वर्कफोर्स 2020-21 के 7.7 मिलियन से 55% बढ़कर 2025-26 में 12 मिलियन हो गई है, जो भारत के कुल वर्कफोर्स का 2% से अधिक है.

गिग इकोनॉमी वर्कफोर्स

नीति आयोग का अनुमान है कि 2029-30 तक भारत की गिग इकोनॉमी में कुल वर्कफोर्स का 6.7% हिस्सा होगा. इसमें लगभग 23.5 मिलियन वर्कर शामिल होंगे और ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) में इनका योगदान 2.35 लाख करोड़ रुपये होगा.

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत, सामाजिक सुरक्षा बेनिफिट्स पाने के लिए एक वित्तीय वर्ष में किसी एक एग्रीगेटर के साथ 90 दिन काम करना, या अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर काम करने की स्थिति में कुल मिलाकर 120 दिन काम करना अनिवार्य है.

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