गिग वर्कर यूनियन ने कमाई के आंकड़ों पर दीपिंदर गोयल के दावों पर उठाए सवाल, कहा- नहीं मिलती पेड लीव व इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं

Zomato के सीईओ दीपिंदर गोयल के गिग मॉडल दावों पर तेलंगाना की गिग यूनियन ने सवाल उठाए हैं. यूनियन के मुताबिक, ईंधन व मेंटेनेंस खर्च जोड़ने पर नेट कमाई घटकर ₹81/घंटा रह जाती है और पेड लीव व सोशल सिक्योरिटी जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं हैं. जबकि दीपिंदर गोयल ने दावा किया है कि डिलीवरी पार्टनर्स की औसत कमाई ₹102 प्रति घंटा है.

गिग वर्कर्स Image Credit: money9live & canva

फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर में गिग वर्कर्स की सैलरी और सुविधाओं को लेकर बहस तेज हो गई है. Zomato के सीईओ दीपिंदर गोयल द्वारा गिग मॉडल के समर्थन में दिए गए बयानों पर अब तेलंगाना की डिलीवरी वर्कर्स यूनियन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. यूनियन ने मौजूदा कार्य परिस्थितियों को “डिसेंट वर्क नहीं” करार देते हुए पेड लीव, सोशल सिक्योरिटी और बीमा जैसे बुनियादी लाभों की कमी पर सवाल उठाए हैं. जैसे-जैसे बहस तेज हो रही है, गिग इकोनॉमी में पारदर्शिता और कमाई के आंकड़ों के सार्वजनिक खुलासे की मांग भी जोर पकड़ रही है, ताकि गिग वर्क और फॉर्मल नौकरियों के बीच वास्तविक तुलना हो सके.

दीपिंदर गोयल का बयान

हाल ही में दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया था कि 2025 में Zomato और Blinkit के डिलीवरी पार्टनर्स की औसत कमाई ₹102 प्रति घंटा रही (टिप्स को छोड़कर), जो साल-दर-साल आधार पर 10.9% की बढ़ोतरी को दिखाता है. उन्होंने यह भी कहा कि डिलीवरी पार्टनर्स अपने काम के घंटे खुद चुनते हैं, उन्हें ग्राहकों से मिलने वाली 100% टिप्स मिलती हैं और 10 मिनट डिलीवरी जैसे वादों के चलते उन पर असुरक्षित ड्राइविंग का दबाव नहीं डाला जाता. गोयल ने बीमा और पेंशन जैसी वेलफेयर स्कीम्स का भी जिक्र किया.

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स एसोसिएशन का आरोप

हालांकि, तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स एसोसिएशन (TGPWA) ने इन दावों को चुनौती दी है. यूनियन के मुताबिक, अगर ईंधन, वाहन मेंटेनेंस और अन्य खर्चों को जोड़ा जाए, तो डिलीवरी पार्टनर्स की वास्तविक कमाई करीब ₹81 प्रति घंटा बैठती है. यूनियन का कहना है कि 10 घंटे रोज और महीने में 26 दिन काम करने पर यह कमाई लगभग ₹21,000 प्रति माह होती है, जो कई शहरी इलाकों में जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है.

यूनियन ने यह भी आरोप लगाया है कि डिलीवरी पार्टनर्स को पेड लीव, सोशल सिक्योरिटी कवर या गारंटीड एक्सीडेंट इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं. साथ ही, टिप्स को लेकर किए गए दावों पर भी सवाल उठाए गए. यूनियन के अनुसार, Zomato पर केवल करीब 5% ऑर्डर्स में ही टिप मिलती है, जिससे अतिरिक्त आय का दायरा काफी सीमित हो जाता है.

ये हैं मांगे

इस मुद्दे पर देशभर की कई गिग वर्कर यूनियनों ने भी आवाज उठाई है. कुछ संगठनों ने न्यूनतम मजदूरी तय करने और कानूनी श्रम सुरक्षा लागू करने की मांग करते हुए प्रदर्शन और हड़तालों का समर्थन किया है. वहीं, गिग मॉडल के समर्थकों का तर्क है कि यह काम पारंपरिक नौकरियों के बजाय फ्लेक्सिबल साइड इनकम के लिए होता है और कई लोग इसी आजादी को प्राथमिकता देते हैं.

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