शहरी परिवारों के लिए खुशखबरी! PMAY-U 2.0 में घर बनाने, खरीदने और किराये पर लेने के लिए मिलेगी सीधी मदद
शहरों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए घर का सपना अब ज्यादा करीब आता दिख रहा है. सरकार की नई पहल में पात्रता, आय सीमा और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा फायदा आम शहरी परिवारों को मिल सकता है.
PMAY Urban 2.0 scheme: शहरों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए अपना घर आज भी एक बड़ा सपना बना हुआ है. महंगे मकान, बढ़ता किराया और सीमित आय के बीच यह सपना अक्सर अधूरा रह जाता है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Awas Yojana-Urban 2.0 यानी PMAY-U 2.0 को लागू किया है. यह योजना शहरी गरीब, निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को सस्ता और सुरक्षित घर उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
क्या है PMAY-U 2.0 योजना
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पात्र परिवारों को घर बनाने, खरीदने या किराये पर लेने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी. यह योजना 2024 से 2029 तक, यानी पूरे 5 साल तक लागू रहेगी. इसका उद्देश्य है कि शहरी इलाकों में रहने वाला कोई भी योग्य परिवार बिना पक्के मकान के न रहे.
कौन कर सकता है आवेदन
इस योजना के तहत वही परिवार आवेदन कर सकते हैं, जो शहरी क्षेत्र में रहते हों और जिनके पास देश में कहीं भी अपने नाम या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर पक्का घर न हो. योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को मिलेगा.
EWS, LIG और MIG की आय सीमा
PMAY-U 2.0 में आय के आधार पर वर्ग तय किए गए हैं. EWS कैटेगरी में वे परिवार आते हैं, जिनकी सालाना आय 3 लाख रुपये तक है. LIG कैटेगरी में 3 लाख से 6 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवार शामिल हैं. वहीं MIG कैटेगरी में 6 लाख से 9 लाख रुपये तक सालाना कमाने वाले परिवारों को रखा गया है.
अगर किसी व्यक्ति ने पिछले 20 वर्षों में केंद्र, राज्य या स्थानीय सरकार की किसी भी आवास योजना का लाभ लिया है, तो वह PMAY-U 2.0 के लिए पात्र नहीं होगा.
क्या है जियो-टैगिंग का मतलब
योजना में पारदर्शिता और निगरानी के लिए जियो-टैगिंग को अहम बनाया गया है. जियो-टैगिंग का मतलब है निर्माण से जुड़ी तस्वीरों या वीडियो में लोकेशन की जानकारी जोड़ना. इससे यह पता चलता है कि मकान किस जगह और किस चरण में बन रहा है. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में यह तरीका पहले ही सफल साबित हो चुका है.
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AHP प्रोजेक्ट में जियो-टैगिंग कैसे होगी
अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप यानी AHP प्रोजेक्ट्स में निर्माण के पांच चरणों पर जियो-टैगिंग की जाएगी. इसमें लेआउट, नींव, ढांचा, फिनिशिंग और अंत में बुनियादी सुविधाओं के साथ परियोजना की स्थिति दर्ज की जाएगी. इसके लिए BHARAT App का इस्तेमाल होगा.
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