श्रद्धालुओं को बड़ी राहत! रोपवे के बाद अब केदारनाथ मार्ग पर सुरंग की तैयारी, 48 दिनों में ₹300 करोड़ की हुई कमाई

पहाड़ी तीर्थयात्रा को लेकर सरकार की नई तैयारी अब सिर्फ सुविधा तक सीमित नहीं है. बढ़ती भीड़, सुरक्षा जरूरतों और लगातार बढ़ रहे आर्थिक योगदान ने इंफ्रास्ट्रक्चर को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. आने वाले समय में यात्रा का अनुभव काफी बदल सकता है.

केदारनाथ Image Credit: UK tourism

Kedarnath Temple Tunnel: हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसे Kedarnath Temple तक पहुंचना हमेशा से आस्था और चुनौती, दोनों का संगम रहा है. हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन रास्तों, बदलते मौसम और सीमित सुविधाओं के बावजूद बाबा केदार के दर्शन के लिए निकल पड़ते हैं. अब इसी यात्रा को ज्यादा सुरक्षित, तेज और आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केदारनाथ मार्ग पर एक नए 7 किलोमीटर लंबे सुरंग प्रोजेक्ट की योजना बनाई गई है, जिससे न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा बल्कि आपात स्थितियों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी बेहतर होगी.

कहां बनेगी नई सुरंग

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित सुरंग उत्तराखंड के कालिमठ घाटी में चौमासी से सोनप्रयाग तक बनाई जाएगी. सोनप्रयाग वही स्थान है, जहां से भविष्य में केदारनाथ तक जाने वाली रोपवे की शुरुआत होगी. इस सुरंग के बनने से यात्रियों को एक वैकल्पिक और ज्यादा सुरक्षित रास्ता मिलेगा, खासकर तब जब मौसम खराब हो या भूस्खलन जैसी स्थिति बन जाए.

यह सुरंग ट्विन-ट्यूब यानी दो समानांतर रास्तों वाली होगी. एक ट्यूब से सामान्य आवाजाही होगी, जबकि दूसरी ट्यूब को आपातकालीन निकासी मार्ग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. पहाड़ी इलाकों में अचानक हालात बिगड़ने पर यह सुविधा बेहद अहम मानी जा रही है. इसके साथ ही चौमासी की ओर से एक अलग पैदल रास्ता और पैदल सुरंग बनाने की संभावना भी तलाशी जा रही है, ताकि अंतिम चरण की यात्रा और आसान हो सके.

मौजूदा सड़क और विस्तार की योजना

फिलहाल सोनप्रयाग और गौरीकुंड तक जाने वाले सभी वाहन नेशनल हाईवे-107 से होकर गुजरते हैं. नई योजना के तहत कालिमठ घाटी की एक लेन वाली सड़क को दो लेन में बदला जाएगा. यह सड़क उत्तराखंड सरकार के अधीन है. सुरंग शुरू होने के बाद यहां ट्रैफिक बढ़ने की पूरी संभावना है, जिसे संभालने के लिए यह विस्तार जरूरी माना जा रहा है.

हाल ही में सड़क परिवहन मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा हुई. अधिकारियों ने बताया कि केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. पिछले साल यह संख्या करीब 17.7 लाख थी. अनुमान है कि 2030 तक यह 25 लाख और 2040 तक लगभग 40 लाख तक पहुंच सकती है.

सिलक्यारा सुरंग हादसे से सबक लेते हुए सरकार इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. निर्माण से पहले विस्तृत भूवैज्ञानिक और जलवैज्ञानिक अध्ययन किए जाएंगे, ताकि हिमालयी क्षेत्र में सुरंग बनाते समय किसी तरह की अनहोनी से बचा जा सके.

रोपवे से बदलेगी यात्रा की तस्वीर

इसी कड़ी में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक बनने वाली 12.9 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजना पहले ही अडानी एंटरप्राइजेज को सौंपी जा चुकी है. यह रोपवे 2031–32 तक शुरू होने की उम्मीद है. इसके जरिए प्रति घंटे करीब 1,800 श्रद्धालु यात्रा कर सकेंगे और एक तरफ का सफर महज 40 मिनट में पूरा होगा.

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श्रद्धालु और अर्थव्यवस्था

केदारनाथ यात्रा सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था की बड़ी रीढ़ बन चुकी है. 2025 सीजन में मंदिर ने सिर्फ 48 दिनों में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल की. 2 मई को खुले मंदिर में अब तक 11.64 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. इस बढ़ती भीड़ को देखते हुए राज्य सरकार पंजीकरण, परिवहन, ठहरने और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर लगातार काम कर रही है. नई सुरंग, चौड़ी सड़कें और रोपवे, ये तीनों मिलकर आने वाले वर्षों में केदारनाथ यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल सकते हैं.