2019 से गोल्ड ने कराई बंपर कमाई, 7 साल में दिया 23% CAGR रिटर्न; इंफ्लेशन का समझें पूरा खेल

गोल्ड ने 2019 से 31 अगस्त 2026 तक करीब 23% CAGR रिटर्न दिया है. हालांकि, गोल्ड का लंबा इतिहास बताता है कि इसमें कई वर्षों तक कमजोर रिटर्न का दौर भी रहा है. फंड्सइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लंबी अवधि में गोल्ड ने इंफ्लेशन को पीछे छोड़ा है, लेकिन भविष्य के रिटर्न का अनुमान लगाते समय हालिया तेजी को आधार बनाना सही नहीं होगा.

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Highlights

  • 2019 से गोल्ड ने दिया 23% सीएजीआर रिटर्न, लेकिन हालिया प्रदर्शन को भविष्य के रिटर्न का आधार मानना सही नहीं होगा.
  • लॉन्ग-टर्म में गोल्ड रिटर्न का अनुमान 6.82% से 8.82% सालाना लगाया जा सकता है, जिसमें इंफ्लेशन को ध्यान में रखा गया है.
  • गोल्ड में निवेश से पहले वोलैटिलिटी का रखें ध्यान, क्योंकि इतिहास में कई लंबे दौर ऐसे रहे हैं, जब गोल्ड का रिटर्न करीब 0% रहा है.

Gold Return: गोल्ड ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. 2019 से 31 अगस्त 2026 तक गोल्ड ने करीब 23% CAGR रिटर्न दिया है. हालांकि, गोल्ड के लंबे इतिहास पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है. गोल्ड ने कई ऐसे लंबे दौर देखे हैं, जब इसके रिटर्न बेहद सीमित रहे. ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे भविष्य के रिटर्न का अनुमान लगाते समय मौजूदा प्रदर्शन को ही आधार न बनाएं और इंफ्लेशन को भी ध्यान में रखें.

हाल के वर्षों में गोल्ड का प्रदर्शन मजबूत

सितंबर 2026 फंड्सइंडिया वेल्थ कन्वर्सेशंस रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड ने अलग-अलग लंबी अवधि में भी मजबूत रिटर्न दिया है. पिछले 10 वर्षों में इसका एनुअलाइज्ड रिटर्न 17.3%, 20 वर्षों में 14.5%, 30 वर्षों में 12.2% और 40 वर्षों में 11.9% रहा है. ये आंकड़े 31 अगस्त 2026 तक के हैं और गोल्ड की यूएसडी कीमतों को यूएसडी/आईएनआर एक्सचेंज रेट के आधार पर रुपये में बदला गया है.

हालांकि, हाल के महीनों में गोल्ड प्राइस में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है. 31 अगस्त 2026 को गोल्ड की कीमत 13,961 रुपये प्रति ग्राम थी, जबकि एक महीने पहले यह 12,349 रुपये प्रति ग्राम थी. छह महीने पहले गोल्ड 15,292 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर था. इससे पता चलता है कि लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न के बावजूद बीच-बीच में कीमतों में काफी वोलैटिलिटी हो सकती है.

लंबे समय में कई बार कमजोर रहे रिटर्न

गोल्ड का इतिहास यह भी बताता है कि हर दौर में निवेशकों को ऊंचा रिटर्न नहीं मिला है. 1980 से 1989 के बीच गोल्ड ने करीब 0% रिटर्न दिया. इसके बाद 1989 से 1996 के बीच इसका CAGR करीब 12% रहा. फिर 1996 से 2002 के दौरान रिटर्न करीब 0% रहा.

इसी तरह 2002 से 2012 के बीच गोल्ड ने करीब 19% CAGR रिटर्न दिया, लेकिन 2012 से 2019 के बीच एक बार फिर इसका रिटर्न करीब 0% रहा. इसके बाद 2019 से अगस्त 2026 तक गोल्ड में तेज तेजी देखने को मिली और CAGR करीब 23% रहा. यह इतिहास बताता है कि गोल्ड में मजबूत तेजी के बाद लंबे समय तक कमजोर रिटर्न का दौर भी आ सकता है.

इंफ्लेशन को ध्यान में रखकर कितना रिटर्न मानें

फंड्सइंडिया के अनुसार, कम से कम 21 वर्षों की इन्वेस्टमेंट होराइजन में गोल्ड ने लंबे समय में इंफ्लेशन को करीब 5-6% तक पीछे छोड़ा है. हालांकि, भविष्य के लिए अधिक कंजर्वेटिव अनुमान लगाना बेहतर माना गया है. रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक इंफ्लेशन से 2-4 परसेंटेज प्वाइंट अधिक गोल्ड रिटर्न को लॉन्ग-टर्म एक्सपेक्टेशन के तौर पर मान सकते हैं.

अगस्त 2026 में भारत की सीपीआई इंफ्लेशन 4.82% रही. इस आधार पर गोल्ड के लॉन्ग-टर्म रिटर्न का अनुमान करीब 6.82% से 8.82% सालाना के बीच लगाया जा सकता है. हालांकि, यह अगले एक-दो वर्षों का फोरकास्ट नहीं है, बल्कि लंबी अवधि के लिए एक अनुमानित फ्रेमवर्क है.

गोल्ड में निवेश से पहले किन बातों पर दें ध्यान

गोल्ड के रिटर्न पर कई फैक्टर्स असर डालते हैं. इनमें सेंट्रल बैंक डिमांड, यूएस रियल यील्ड्स, माइनिंग कॉस्ट्स, मनी सप्लाई और यूएसडी/आईएनआर एक्सचेंज रेट प्रमुख हैं. इसलिए हाल के वर्षों में मिले 23% CAGR को भविष्य के लिए स्थायी रिटर्न मानना उचित नहीं होगा.

निवेशकों के लिए मुख्य बात यह है कि गोल्ड लंबी अवधि में परचेजिंग पावर बनाए रखने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके रिटर्न में लंबे समय तक कमजोरी भी आ सकती है. इसलिए गोल्ड में निवेश करते समय इन्वेस्टमेंट होराइजन, इंफ्लेशन और संभावित वोलैटिलिटी को ध्यान में रखकर ही रिटर्न की उम्मीद तय करनी चाहिए.

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