Gold-Silver इंपोर्ट पर सरकार का बड़ा फैसला, SBI-HDFC सहित 15 बैंकों को मंजूरी; ज्वेलरी स्टॉक्स पर रखें नजर
सरकार ने 2026-2029 के लिए 15 बैंकों को सोना-चांदी आयात की अनुमति दी है, जबकि कुछ बैंकों को केवल गोल्ड इंपोर्ट की इजाजत मिली है. इस फैसले और सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितता का असर ज्वेलरी शेयरों पर दिखा, जहां Kalyan Jewellers और Titan में गिरावट आई, जबकि MMTC में तेज उछाल देखने को मिला.

Govt Approves 15 Banks Gold Silver Import: केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात को लेकर एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक कुल 15 बड़े बैंकों को बुलियन (सोना-चांदी) आयात करने की अनुमति दी गई है. इन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं. वहीं, इस अवधि के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और रूस के Sberbank को सिर्फ सोना आयात करने की विशेष मंजूरी दी गई है.
रिपोर्ट्स ने तोड़े ज्वेलरी कंपनियों के शेयर
इस फैसले से पहले स्थिति कुछ अलग थी. रायटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि सरकारी नोटिफिकेशन में देरी के कारण भारतीय बैंकों ने विदेशों से सोने और चांदी के नए ऑर्डर रोक दिए थे, जिससे कई कंसाइनमेंट कस्टम पर अटक गए थे. इस अनिश्चितता का असर बाजार पर भी देखने को मिला. ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, कल्याण ज्वेलर्स का शेयर करीब 6 फीसदी तक टूटकर 415 रुपये के आसपास पहुंच गया, जबकि टाइटन के शेयर में भी लगभग 3 फीसदी की कमजोरी आई और यह करीब 4,330 रुपये पर ट्रेड करता दिखा. दूसरी ओर, सरकारी ट्रेडिंग कंपनी MMTC के शेयर में करीब 16 फीसदी की तेज उछाल देखी गई, जो बाजार की अलग प्रतिक्रिया को दर्शाती है.
डिमांड में कमजोरी
ग्लोबल और घरेलू स्तर पर सोने की मांग में कमजोरी भी इस पूरे घटनाक्रम की बड़ी वजह मानी जा रही है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2025 के दौरान सोने की कुल मांग घटकर 710.9 मीट्रिक टन रह गई, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है. ऐसे में आयात में कमी से वैश्विक कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है. साथ ही, इससे भारत का ट्रेड डेफिसिट कम करने और रुपये को सहारा देने में मदद मिल सकती है, जो इस साल एशिया की कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा है.
कम हो रहा सोने-चांदी का स्टॉक
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पहले से आयात किए गए सोने-चांदी का स्टॉक धीरे-धीरे कम हो रहा है और फिलहाल बाजार में सप्लाई का बड़ा हिस्सा एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) से आ रहा है, जहां निवेशक पैसे निकाल रहे हैं. इसके अलावा, ईरान से जुड़े जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है. ऐसे में सरकार ने सोने-चांदी के आयात को नियंत्रित करने की रणनीति अपनाई है, ताकि व्यापार घाटे को संतुलित रखा जा सके.
किन बैंकों को मिली अनुमति?
जिन बैंकों को सोना और चांदी दोनों आयात करने की अनुमति दी गई है, उनमें एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, डॉयचे बैंक, फेडरल बैंक, एचडीएफसी बैंक, ICBC, ICICI बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, करूर वैश्य बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, RBL बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक शामिल हैं. वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और Sberbank को केवल सोने के आयात की अनुमति मिली है. यह कदम सरकार की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बाजार संतुलन बनाए रखना और बाहरी आर्थिक दबावों से निपटना है.
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