FDI में रियायत चीनी कंपनियों के लिए नहीं, सरकार ने किया साफ; ऐसी यूनिट्स को मिलेगा फायदा

भारत के साथ जमीनी बॉर्डर साझा करने वाले चीन/हांगकांग या अन्य देशों में रजिस्टर्ड यूनिट्स पर आसान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियम लागू नहीं होंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को इस संबंध में जानकारी दी. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इस संबंध में प्रेस नोट-3, 2020 में संशोधन किया.

एफडीआई में ढील चीनी कंपनियों के लिए नहीं. Image Credit: Money9live

सरकार ने बुधवार को साफ कर दिया कि बदले हुए प्रेस नोट-3 के तहत आसान इन्वेस्टमेंट नियम उन चीनी कंपनियों पर लागू नहीं होंगे जो भारत में निवेश करना चाहती हैं. देशी कंपनियों में चीन की अगर 10 फीसदी तक हिस्सेदारी है, तो वे भारत में ऑटोमैटिक रूट से सभी सेक्टर्स में निवेश करने के लिए पात्र होंगी. हालांकि, भारत के साथ जमीनी बॉर्डर साझा करने वाले चीन/हांगकांग या अन्य देशों में रजिस्टर्ड यूनिट्स पर आसान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियम लागू नहीं होंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को इस संबंध में जानकारी दी.

किसे लेनी होगी मंजूरी

पहले, जमीनी सीमा साझा करने वाले सीमावर्ती देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को, यहां तक ​​कि एक भी शेयर रखने पर भी, भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य मंजूरी लेनी पड़ती थी. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इस संबंध में प्रेस नोट-3, 2020 में संशोधन किया. इस प्रेस नोट के अनुसार, भारत के साथ जमीनी बॉर्डर साझा करने वाले देशों के निवेशकों को किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य मंजूरी लेनी होगी.

ऐसे निवेशकों के लिए रियायत नहीं

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने संवाददाताओं से कहा, ‘भूमि सीमा साझा (एलबीसी) करने वाले देशों के निवेशकों पर लागू सभी प्रतिबंध अभी भी लागू हैं. भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में स्थित यूनिट्स या निवेशकों के लिए कोई छूट नहीं है. यह छूट केवल गैर-एलबीसी इकाइयों के लिए है जिनमें भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में 10 फीसदी से कम लाभकारी स्वामित्व हैं और जिनकी गैर-नियंत्रणकारी हिस्सेदारी है. इसलिए जमीनी बॉर्डर साझा करने वाले देशों से निवेश के संबंध में कोई छूट नहीं है.’

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले किसी देश की कोई कंपनी टेक्नोलॉजी प्रदान करती है और उसमें एक प्रतिशत तक की हिस्सेदारी रखती है, जिसके माध्यम से वह किसी प्रकार का नियंत्रण कर सकती है, तो भी निवेश के लिए सरकारी मार्ग से मंजूरी की आवश्यकता होगी.

ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति

संशोधित प्रेस नोट के अनुसार, 10 फीसदी तक के गैर-नियंत्रणकारी भूमि सीमा साझा करने वाले लाभकारी स्वामित्व वाले निवेशकों को लागू क्षेत्रीय सीमाओं, प्रवेश मार्गों और अन्य शर्तों के अनुसार ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी जाएगी. ऐसा इन्वेस्टमेंट केवल निवेश प्राप्त करने वाली इकाई द्वारा DPIIT को केवल संबंधित जानकारी या डिटेल देने पर निर्भर करेगा.

हालांकि, सरकार ने भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन समेत अन्य देशों की कंपनियों के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी देने की घोषणा की है.

60 दिन के भीतर होगा फैसला

कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट-वेफर, अत्याधुनिक बैटरी उपकरणों, रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट और रेयर मिनिरल प्रोसेसिंग में मैन्युफैक्चरिंग के निर्दिष्ट क्षेत्रों और गतिविधियों में भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश के प्रस्तावों पर 60 दिन के भीतर कदम उठाने के साथ निर्णय लिया जाएगा.

DPIIT सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति इस सूची को बढ़ा या घटा सकती है.

600 आवेदन लंबित

वर्तमान में, प्रेस नोट-3 के अंतर्गत लगभग 600 आवेदन लंबित हैं.इन आवेदनों के बारे में पूछे जाने पर सचिव ने कहा कि इनमें से कई आवेदन दो श्रेणियों में से किसी एक 10 प्रतिशत की सीमा से नीचे और त्वरित प्रक्रिया के अंतर्गत आएंगे.

10 फीसदी से नीचे की सीमा के तहत आने वाले आवेदन नोटिफिकेशन जारी होने के बाद निवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं और बाद में आवश्यक जानकारी जमा कर सकते हैं, जबकि त्वरित प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाले अपने आवेदन दोबारा जमा कर सकते हैं.

भाटिया ने कहा कि त्वरित मंजूरी के लिए एक विशिष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है ताकि 60 दिन की समयसीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके, क्योंकि इससे संभावित निवेशकों को निश्चितता मिलेगी.

किस तरह की कंपनियों को मिलेगी रियायत

उन्होंने कहा, ‘अब हम उन लोगों के लिए गैर-पीएन-3 रूट प्रदान कर रहे हैं जो स्वामित्व और नियंत्रण की सीमा से नीचे हैं. यदि जमीनी बॉर्डर साझा करने वाले देशों की कोई कंपनी भारत में निवेश करना चाहती है, तो उस स्थिति में पीएन-3 मार्ग लागू होगा. सचिव ने कहा कि लाभकारी स्वामित्व का विचार उन कंपनियों के लिए प्रासंगिक है जो भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के बाहर स्थित हैं.

उन्होंने कहा कि ब्लैक रॉक जैसी कंपनियां प्रेस नोट में ढील देने की मांग कर रही थी. त्वरित प्रक्रिया का लाभ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के बाहर की कंपनियां भी उठा सकती हैं. सचिव ने कहा, ‘त्वरित प्रक्रिया में कुछ चरण हटा दिए गए हैं, लेकिन मोटे तौर पर, जहां तक ​​सुरक्षा मंजूरी और राजनीतिक मंजूरी की बात है, वह प्रक्रिया बनी रहेगी.’ उन्होंने बताया कि एक पोर्टल तैयार किया जा रहा है ताकि आवेदक जानकारी दर्ज कर अपने निवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकें.

विशिष्ट क्षेत्र जैसे अन्य मामलों के लिए पोर्टल में एक अलग प्रावधान बनाया जा रहा है ताकि उन्हें 60 दिन के भीतर मंजूरी मिल सके. विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान के लिए अपनाए गए मानदंडों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, ‘इन क्षेत्रों में हमने पाया कि हमें भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की आवश्यकता है.’

मैन्युफैक्चरिंग को गति देने की जरूरत

भाटिया ने कहा, ‘हमें भारत में मैन्युफैक्चरिंग को गति देने आवश्यकता है. चाहे वह सिलाई मशीन हो, या सोलर सेल असेंबल करने वाली इंडस्ट्री 4.0 से जुड़ी मशीनें हों, या स्विचगियर आदि. इसलिए, ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हमें साझेदारी और संयुक्त उद्यमों की व्यापक संभावनाएं दिखाई देती हैं. इसीलिए क्षेत्रों को जोड़ने या घटाने को लेकर फ्लेक्सिबल रखा गया है.

मंत्रिमंडल से मंजूर बदलावों को DPIIT और आर्थिक मामलों के विभाग अधिसूचित करेंगे. इसके बाद, यह लागू हो जाएगा. उन्होंने कहा, ‘हम इसे जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास करेंगे.’

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