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एविएशन सेक्टर को मिलेगी राहत? ATF की कीमतें बढ़ने के बीच सरकार 10000 करोड़ रुपये का जारी कर सकती है फंड

मांग कम होने के कारण एयरलाइंस को मार्च और अप्रैल में अपनी उड़ानें कम करनी पड़ीं. देश आयातित कच्चे तेल और ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण कीमतें बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर सरकारी रिफाइनरियों पर पड़ रहा है.

पायलट डोप टेस्ट Image Credit: GettyImages

केंद्र सरकार एविएशन सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड का ऐलान कर सकती है. यह फंड पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच एयर टर्बाइन फ्यूल (विमान ईंधन) से जुड़े खर्चों में मदद के लिए होगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया है जब भारतीय एयरलाइंस ने इंडियन ऑयल कॉर्प. और भारत पेट्रोलियम कॉर्प. जैसी रिफाइनरियों से कहा था कि जब तक युद्ध खत्म नहीं हो जाता, तब तक वे घरेलू उड़ानों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी रोक दें.

कम करनी पड़ी हैं फ्लाइट्स

मांग कम होने के कारण एयरलाइंस को मार्च और अप्रैल में अपनी उड़ानें कम करनी पड़ीं. कई मुश्किलों, जैसे कि यात्रा की मांग में कमी और ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी के चलते अप्रैल में घरेलू हवाई यातायात मार्च के मुकाबले 4.2 फीसदी गिरकर 1.38 करोड़ से थोड़ा ही अधिक रह गया.

देश आयातित कच्चे तेल और ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण कीमतें बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर सरकारी रिफाइनरियों पर पड़ रहा है.

ATF की कीमतें

पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पहले पत्रकारों को बताया, ‘एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दरों के आधार पर तय की जाती हैं.’ उन्होंने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को घरेलू बाजार में बेचे जाने वाले जेट फ्यूल के हर लीटर पर अभी भी 30 रुपये का नुकसान हो रहा है.

एविएशन सेक्टर को सहारा

एविएशन सेक्टर को सहारा देने के लिए, सरकार पहले ही कई उपायों की घोषणा कर चुकी है, जैसे कि विमान पार्किंग शुल्क में छूट, और दिल्ली तथा मुंबई से उड़ान भरने वाली उड़ानों के लिए फ्यूल पर टैक्स में कटौती.

खौल रही हैं तेल की कीमतें

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते दुनिया भर के मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें खौल रही हैं, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से तेल की सप्लाई बाधित है. बुधवार को तेल की कीमतों में 2 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जिससे पिछले सत्र की बढ़त जारी रही. इसकी वजह यह थी कि पश्चिम एशिया में फिर से तनाव भड़क उठा और ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में बहुत कम प्रगति देखने को मिली.

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