अगर PNG में बदलने से मना किया गैस कनेक्शन, तो काट दी जाएगी LPG की सप्लाई
इस आदेश के तहत, अगर उपभोक्ता उन जगहों पर पाइप वाली नेचुरल गैस (PNG) पर नहीं बदलते हैं, जहां इसकी सुविधा उपलब्ध है, तो उनके घरों में कुकिंग गैस (LPG) की सप्लाई बंद कर दी जाएगी. PNG की सप्लाई पाइपलाइनों के जरिए सीधे किचन के बर्नर तक लगातार होती रहती है.
पश्चिम-एशिया में जारी तनाव के चलते देश में एनर्जी संकट की स्थिति पैदा हो गई है. हालांकि, सरकार कहना है कि एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं है. इस बीच सरकार ने बुधवार को एक नया आदेश जारी किया है, जिसका मकसद गैस नेटवर्क का विस्तार तेजी से करना और किसी एक ही ईंधन पर निर्भरता को कम करना है. इस आदेश के तहत, अगर उपभोक्ता उन जगहों पर पाइप वाली नेचुरल गैस (PNG) पर नहीं बदलते हैं, जहां इसकी सुविधा उपलब्ध है, तो उनके घरों में कुकिंग गैस (LPG) की सप्लाई बंद कर दी जाएगी.
LPG की सप्लाई में रुकावट
चूंकि भारत पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण मुख्य स्रोतों से सप्लाई में रुकावट आने से LPG की कमी का सामना कर रहा है, इसलिए सरकार घरों और कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों को पाइप वाली नेचुरल गैस (PNG) पर बदलने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. यह एक अधिक सुविधाजनक विकल्प है, जिसका उत्पादन देश के अंदर ही होता है और जिसकी सप्लाई अलग-अलग स्रोतों से की जाती है.
PNG की सप्लाई पाइपलाइनों के जरिए सीधे किचन के बर्नर तक लगातार होती रहती है, जिससे बार-बार गैस सिलेंडर बुक करने की जरूरत नहीं पड़ती.
पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का मकसद
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का वितरण (पाइपलाइनों और अन्य सुविधाओं को बिछाने, बनाने, चलाने और विस्तार करने के जरिए) आदेश, 2026’ जारी किया है. इसका मकसद पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाना, मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए LPG से PNG पर बदलाव को बढ़ावा देना है.
तीन महीने बाद बंद हो जाएगी सप्लाई
24 मार्च को जारी इस आदेश में कहा गया है कि अगर किसी घर में PNG की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद वे इसे नहीं अपनाते हैं, तो ‘तीन महीने बाद’ उनकी LPG सप्लाई बंद कर दी जाएगी. हालांकि, इस नियम में यह छूट भी दी गई है कि अगर किसी जगह पर पाइप वाला कनेक्शन देना ‘तकनीकी रूप से संभव नहीं’ है, तो वहां LPG सप्लाई जारी रखी जा सकती है, बशर्ते इसके लिए ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) ले लिया गया हो.
इस कदम का मकसद उन इलाकों से LPG की सप्लाई को हटाकर, जहां पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है, उन इलाकों में भेजना है जहां ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है. साथ ही, वैश्विक सप्लाई में आ रही रुकावटों, जैसे कि खाड़ी देशों में लिक्विफैक्शन सुविधाओं को हुए नुकसान और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में लगातार बनी रुकावट, के बीच ‘ईंधन के विकल्पों में डायवर्सिफिकेशन’ को बढ़ावा देना भी इसका एक अहम मकसद है.
संकट को अवसर में बदलने की कोशिश
इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए, तेल सचिव नीरज मित्तल ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार करने में आसानी) से जुड़े सुधारों के जरिए ‘एक संकट को अवसर में बदल दिया गया है.’
आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत जारी इस आदेश का मकसद मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाकर, शुल्कों को मानकीकृत करके और समय-सीमा के भीतर अनुमतियां सुनिश्चित करके पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में तेजी लाना है.
राइट ऑफ वे का अधिकार
काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए, सरकारी अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर ‘राइट ऑफ वे’ (रास्ता इस्तेमाल करने का अधिकार) या जरूरी अनुमतियां देनी होंगी. अगर वे ऐसा करने में नाकाम रहते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि मंजूरी मिल गई है. यह आदेश अधिकारियों को उन शुल्कों के अलावा कोई और शुल्क लगाने से भी रोकता है, जो पहले से तय किए गए हैं.
आवासीय इलाकों में, जिन संस्थाओं के पास प्रवेश को नियंत्रित करने का अधिकार है, उन्हें तीन कार्य दिवसों के भीतर अनुमतियां देनी होंगी, और PNG का कनेक्शन (अंतिम छोर तक की कनेक्टिविटी) 48 घंटों के भीतर उपलब्ध कराना होगा. ऐसे इलाकों में पाइपलाइन कनेक्शन के लिए दिए गए आवेदनों को किसी भी हाल में खारिज नहीं किया जा सकता है. इस आदेश में आगे यह भी प्रावधान है कि जमीन तक पहुंच से जुड़े विवादों को सुलझाने और जहां जरूरी हो, वहां ‘राइट ऑफ वे’ (रास्ता इस्तेमाल करने का अधिकार) देने के लिए, कुछ खास अधिकारियों को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां दी जाएंगी.
जिन संस्थाओं को मंजूरी मिली है, उन्हें मंजूरी मिलने के चार महीने के अंदर पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर देना होगा. ऐसा न करने पर उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है, और उनकी ‘एक्सक्लूसिविटी’ (विशेष अधिकार) भी छीनी जा सकती है.
प्रक्रिया की निगरानी के लिए नोडल एजेंसी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने वाली ‘नोडल एजेंसी’ बनाया गया है. इस निगरानी में मंजूरी, नामंजूरी और नियमों के पालन से जुड़ी हर चीज पर नजर रखना शामिल है.
अगर किसी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (आवासीय परिसर) का प्रबंधन करने वाली संस्थाएं, घरों तक PNG पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने की ‘राइट ऑफ वे’ या ‘इस्तेमाल का अधिकार’ वाली मंजूरी नहीं देती हैं, तो उन्हें एक नोटिस भेजा जाएगा. इस नोटिस के तीन महीने बाद, तेल मार्केटिंग कंपनियां उस जगह पर LPG की सप्लाई बंद कर देंगी.
कब बंद हो जाएगी LPG की सप्लाई?
आदेश में उन ‘परिणामों’ की भी जानकारी दी गई है, जो तब सामने आते हैं जब कोई घर, पाइपलाइन बिछाने वाली अधिकृत संस्था के सूचित करने के बाद भी PNG कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता या उसे हासिल नहीं करता. इसमें कहा गया है, ‘ऐसे पते पर LPG की सप्लाई, सूचना मिलने की तारीख से तीन महीने बाद पूरी तरह बंद कर दी जाएगी.’
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है, ‘किसी घर की LPG सप्लाई तब तक बंद नहीं की जाएगी, जब तक कि अधिकृत संस्था यह कहते हुए ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी न कर दे कि तकनीकी कारणों से उस घर तक पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस का कनेक्शन या गैस सप्लाई पहुंचाना संभव नहीं है.
अधिकृत संस्था को, तकनीकी कारणों से गैस सप्लाई न दे पाने की वजहों का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा. साथ ही, जब भी उस संस्था के लिए उन घरों तक पाइपलाइन वाली गैस कनेक्टिविटी पहुंचाना और उसे चालू करना संभव हो जाएगा, तो उसे जारी किया गया NOC वापस ले लेना होगा.
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