Hormuz से ऐसे बिगड़ी LPG सप्लाई, पहले थी डेली 90000 टन खपत, फिर आया 13000 का गैप, ये जुगत जलाएगी चूल्हा
ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच गया है. LPG सप्लाई अचानक घट गई है, जबकि मांग को जबरन कम करना पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना हजारों टन गैस की कमी बनी हुई है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है.
Hormuz Shutdown Triggers India LPG Crisis: रसोई गैस यानी LPG, जो आम दिनों में भारत के हर घर तक बिना रुकावट पहुंचती है, आज युद्ध की आग में फंसकर लड़खड़ा गई है. ईरान-इजरायल-अमेरिका के टकराव ने भारत की रसोई तक असर डाल दिया है. Emkay Research की ताजा रिपोर्ट बताती है कि जो सिस्टम 90,000 टन रोज की मांग को संभालता था, वही अब अचानक घाटे में आ गया है.
आम दिनों में LPG की डिमांड-सप्लाई कैसी थी?
रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध से पहले भारत में रोजाना कुल LPG मांग करीब 90,000 टन रहती थी. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा घरेलू खपत का है. घरेलू सेक्टर कुल मांग का 85% (76,500 टन/दिन) खपत करता है, जबकि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर का हिस्सा 15% (13,500 टन/दिन) है.
यह आंकड़ा यह भी दिखाता है कि भारत में LPG मुख्य रूप से घरों की जरूरत है, इसलिए किसी भी संकट में सरकार सबसे पहले घरेलू सप्लाई को बचाने की कोशिश करती है.
युद्ध के बाद डिमांड में कैसे कटौती हुई?
सप्लाई संकट बढ़ते ही मांग को भी रेशनलाइज्ड किया गया. घरेलू खपत में करीब 20% कटौती (15,300 टन/दिन) हो गई, जबकि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर में 50% कटौती (6,750 टन/दिन) हुई. इसका मतलब है कि कुल प्रभावी मांग घटकर 67,950 टन/दिन (75.5%) रह गई.
यह साफ संकेत है कि संकट इतना गंभीर था कि बाजार को संतुलित करने के लिए खपत ही कम करनी पड़ी, खासतौर पर उद्योगों की कीमत पर.
युद्ध से पहले सप्लाई का पूरा गणित
युद्ध से पहले भारत की कुल सप्लाई भी करीब 90,000 टन/दिन थी. इसमें तीन बड़े सोर्स थे:
- Hormuz रूट से आयात: 55% (49,500 टन/दिन)
- अन्य आयात स्रोत: 5% (4,500 टन/दिन)
- घरेलू उत्पादन: 40% (36,000 टन/दिन)
यानी भारत की LPG सप्लाई का सबसे बड़ा हिस्सा सीधे Hormuz Strait पर निर्भर था.
युद्ध के बाद सप्लाई कैसे बदल गई?
युद्ध के चलते सबसे बड़ा झटका Hormuz रूट को लगा. नई स्थिति में सप्लाई का गणित पूरी तरह बदल गया. अन्य स्रोत का आंकड़ा वही रहा यानी 5% सप्लाई होती रही, लेकिन सबसे बड़ी बढ़ोतरी घरेलू उत्पादन में की गई जो बढ़कर 56% (50,400 टन/दिन) हो गया, यानी करीब 40% की बढ़ोतरी. यह दिखाता है कि भारत ने अपने स्तर पर उत्पादन बढ़ाया, लेकिन आयात के नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो सकी.
Emkay की रिपोर्ट 24 मार्च को जारी की गई, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई शून्य दर्ज है. हालांकि बीते कुछ दिनों में नंदा देवी, शिवालिका जैसे 3-4 LPG टैंकर होर्मूज स्ट्रेट से होकर भारत पहुंचे हैं. जिससे असल आंकड़े में फर्क आ सकता है.
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मांग और सप्लाई के बीच बड़ा गैप
अब अगर डिमांड और सप्लाई को साथ देखें, तो तस्वीर और गंभीर हो जाती है.
- डिमांड (कटौती के बाद): 67,950 टन/दिन
- सप्लाई (युद्ध के बाद): 54,900 टन/दिन
यानी रोजाना 13,050 टन की कमी (करीब 14.5%) बनी हुई है.
Emkay की रिपोर्ट के मुताबिक यही गैप फिलहाल स्पॉट कार्गो, सीमित ट्रांजिट और वैकल्पिक ईंधनों से भरा जा रहा है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल इस कमी को अस्थायी उपायों से संभाला जा रहा है. PNG, कोयला, लकड़ी जैसे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब अमेरिका, रूस जैसे देशों से भी LPG लेने की कोशिश कर रहा है ताकि सप्लाई डायवर्सिफाई हो सके.
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