ईरान संकट से बाजार सहमा! फिर भी फार्मा समेत 5 सेक्टर्स में रिकॉर्ड तेजी; जानें किन वजहों से मिल रहा बूस्ट?
फार्मा सेक्टर को कई बड़े फैक्टर्स का फायदा मिल रहा है. कमजोर रुपये से दवा निर्यात करने वाली कंपनियों की कमाई बढ़ रही है. इसके अलावा China+1 रणनीति के चलते दुनिया की बड़ी कंपनियां अब चीन पर निर्भरता घटाकर भारत की फार्मा कंपनियों से सप्लाई बढ़ा रही हैं. भारतीय फार्मा कंपनियों को API और CDMO कारोबार में नए ऑर्डर्स मिल रहे हैं.
जियो पॉलिटिकल टेंशन, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर होते रुपये के बीच भारतीय शेयर बाजार मुश्किल दौर से गुजर रहा है. लेकिन इस कमजोरी के बीच भी पांच सेक्टरों ने बाजार को चौंका दिया है. फार्मा, Energy, Defence, Capital Markets और Metals सेक्टर के शेयर लगातार मजबूती दिखा रहे हैं और 52 हफ्ते के नए हाई पर पहुंच गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि जहां NIFTY 50 इस दौरान 7 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है, वहीं इन सेक्टर्स में मजबूत तेजी बनी हुई है.
ईरान युद्ध और Hormuz Strait संकट का असर
ईरान युद्ध, Strait of Hormuz में बाधा और कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से वैश्विक बाजारों में दबाव बना हुआ है. Strait of Hormuz दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई का सबसे अहम रास्ता माना जाता है. यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया के बाजारों में चिंता बनी हुई है. इसी बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने भी भारतीय बाजार से बड़ी निकासी की है. साल 2026 में अब तक FIIs भारतीय शेयर बाजार से 22 बिलियन डॉलर से ज्यादा निकाल चुके हैं. यह पिछले साल के 19 बिलियन डॉलर के आउटफ्लो से भी ज्यादा है और दो दशक में सबसे बड़ी बिकवाली मानी जा रही है.
फिर भी क्यों चमक रहे हैं ये सेक्टर्स?
जानकारों का कहना है कि इन सेक्टर्स में तेजी सिर्फ सुरक्षित निवेश यानी Safe Haven Buying की वजह से नहीं है, बल्कि इनके पीछे मजबूत लॉन्ग टर्म ग्रोथ और कमाई की स्पष्ट संभावना भी है.
फार्मा सेक्टर को मिल रहा बड़ा फायदा
जानकारों के मुताबिक फार्मा सेक्टर को कई बड़े फैक्टर्स का फायदा मिल रहा है. कमजोर रुपये से दवा निर्यात करने वाली कंपनियों की कमाई बढ़ रही है. इसके अलावा China+1 रणनीति के चलते दुनिया की बड़ी कंपनियां अब चीन पर निर्भरता घटाकर भारत की फार्मा कंपनियों से सप्लाई बढ़ा रही हैं. भारतीय फार्मा कंपनियों को API और CDMO कारोबार में नए ऑर्डर्स मिल रहे हैं. साथ ही Biosimilars और GLP-1 Generic दवाओं जैसे नए सेगमेंट भी कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बन रहे हैं.
Defence सेक्टर में लंबी अवधि की कहानी
जानकारों का ये भी कहना है कि डिफेंस सेक्टर की तेजी सिर्फ ईरान युद्ध की वजह से नहीं है. निवेशक अब भारत की रक्षा क्षमताओं और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर बड़ा दांव लगा रहे हैं. सरकार की Indigenisation यानी स्वदेशीकरण नीति, बढ़ते ऑर्डर बुक और रक्षा निर्यात पर फोकस से डिफेंस सेक्टर को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है.
Energy सेक्टर में लंबी मांग का फायदा
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बिजली उपभोक्ता है, लेकिन प्रति व्यक्ति बिजली खपत अभी भी चीन के मुकाबले काफी कम है. शहरीकरण, इंडस्ट्रियल विस्तार, एयर कंडीशनर की बढ़ती मांग और Data Centres के विस्तार से आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी.
- भारत की Data Centre क्षमता 2025 के आखिर तक 1,700 MW पहुंच चुकी थी और 2030 तक इसके 4-5 GW तक पहुंचने का अनुमान है.
- AI आधारित Data Centres 24 घंटे बिजली की मांग पैदा करते हैं, जिससे Energy कंपनियों को लंबी अवधि का फायदा मिल सकता है.
Capital Market सेक्टर में बढ़ रही भागीदारी
निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है. म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM FY16 के 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अप्रैल 2026 तक करीब 82 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है. मंथली SIP निवेश भी एक दशक पहले के 3,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 31,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. इससे Capital Market सेक्टर की कंपनियों की कमाई को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है.
Metals सेक्टर में सप्लाई की चिंता
Metals सेक्टर में सप्लाई की चिंता और मजबूत मांग का फायदा मिल रहा है. इन सेक्टर्स में तेजी केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल्स के कारण बनी हुई है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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