IDFC बैंक फ्रॉड केस में बड़ी गिरफ्तारी, ₹590 करोड़ घोटाले का मुख्य आरोपी चढ़ा क्राइम ब्रांच के हत्थे!

चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को IDFC First Bank मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विक्रम वाधवा नाम के होटल कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर को गिरफ्तार किया है. विक्रम वाधवा की उम्र 52 साल बताई जा रही है और वह इस घोटाले के सामने आने के बाद से फरार था.

IDFC First Bank Image Credit: @Tv9

IDFC First Bank fraud: देश में बैंकिंग और सरकारी फंड से जुड़े घोटालों के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं. हाल ही में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया था जिसमें IDFC First Bank से करोड़ों रुपये के सरकारी पैसे के गबन का आरोप है. इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे एक होटल कारोबारी को गिरफ्तार किया है जिसे इस घोटाले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है.

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह मामला करीब ₹590 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें हरियाणा सरकार के कई विभागों के फंड शामिल थे. आरोप है कि सरकारी पैसों को बैंक में सुरक्षित रखने के बजाय अलग-अलग खातों के जरिए गलत तरीके से निकाल लिया गया. इस पूरे मामले में बैंक के कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत होने की भी आशंका जताई जा रही है.

मुख्य आरोपी होटल कारोबारी गिरफ्तार

HT की एक रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विक्रम वाधवा नाम के होटल कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर को गिरफ्तार किया है. विक्रम वाधवा की उम्र 52 साल बताई जा रही है और वह इस घोटाले के सामने आने के बाद से फरार था. पुलिस ने उसे पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ इलाके में एक ठिकाने से पकड़ा.

कैसे हुआ ₹590 करोड़ का घोटाला

जांच एजेंसियों के अनुसार करीब ₹590 करोड़ की रकम हरियाणा सरकार के कम से कम आठ विभागों के खातों से निकाली गई. यह पैसा IDFC First Bank की चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा होना था. लेकिन आरोप है कि यह रकम 12 अलग-अलग खातों के जरिए गलत तरीके से ट्रांसफर या निकाल ली गई.

बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप

जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में बैंक के कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत हो सकती है. आरोप है कि सरकारी अधिकारियों को बैंक में पैसा जमा करने के लिए राजी किया गया. इसके बाद फर्जी बैंक दस्तावेज और डेबिट मेमो के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में भेज दिया गया.

अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी

इस मामले की जांच Haryana State Vigilance और Anti-Corruption Bureau कर रहा है. अब तक इस घोटाले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार तथा एक विभागीय अधिकारी नरेश कुमार भुवानी भी शामिल हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक रिभव ऋषि ने कथित तौर पर कई शेल कंपनियां बनाकर इस पैसे को अलग-अलग खातों के जरिए ट्रांसफर किया था. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और पैसे के इस्तेमाल की गहराई से जांच कर रही है.

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