देश की फैक्ट्रियों की रफ्तार हुई सुस्त! अप्रैल में IIP ग्रोथ घटी, जानिए किन सेक्टरों ने बढ़ाई चिंता
सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में देश का औद्योगिक प्रोडक्शन 4.9 प्रतिशत बढ़ा. यह बढ़ोतरी पिछले साल अप्रैल में दर्ज 5.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कम है. एनर्जी सेक्टर में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला है.
IIP: भारत की Industrial activities में अप्रैल 2026 के दौरान बढ़ोतरी तो दर्ज की गई, लेकिन इसकी रफ्तार पिछले साल के मुकाबले कुछ धीमी रही. सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में देश का औद्योगिक प्रोडक्शन 4.9 प्रतिशत बढ़ा. यह बढ़ोतरी पिछले साल अप्रैल में दर्ज 5.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कम है. एनर्जी सेक्टर में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला है.
खास बात यह है कि यह आंकड़ा नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार जारी किया गया पहला औद्योगिक प्रोडक्शन डेटा है. सरकार का कहना है कि नई सिस्टम के जरिए देश के औद्योगिक क्षेत्र की अधिक सटीक और आधुनिक तस्वीर सामने आएगी. नए आंकड़ों में कई नए उत्पादों और उभरते उद्योगों को भी शामिल किया गया है, जिससे औद्योगिक विकास को बेहतर तरीके से मापा जा सकेगा.
क्या है IIP और कितना रहा उत्पादन
औद्योगिक प्रोडक्शन को मापने के लिए इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी IIP का इस्तेमाल किया जाता है. अप्रैल 2026 में IIP का Quick Estimate 118.9 रहा, जबकि अप्रैल 2025 में यह 113.1 था. इससे पता चलता है कि उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसकी गति पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी रही.
किन क्षेत्रों का प्रदर्शन कैसा रहा
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
- बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में 4.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.
- वहीं जल आपूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन क्षेत्र में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि रही.
- हालांकि खनन और खदान क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा.
- इस सेक्टर में 5.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसने कुल औद्योगिक प्रोडक्शन की रफ्तार को प्रभावित किया.
IIP का आधार वर्ष बदला
- MoSPI ने IIP का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है.
- यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि देश की बदलती औद्योगिक संरचना और नई तकनीकों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके.
- यह IIP के आधार वर्ष में किया गया 10वां संशोधन है.
- भारत में पहली बार IIP की गणना 1937 को आधार वर्ष मानकर की गई थी.
120 नए प्रोडक्ट हुए शामिल
नई IIP श्रृंखला में कुल 120 नए उत्पाद समूह जोड़े गए हैं. इनमें डेबिट और क्रेडिट कार्ड, CCTV कैमरा, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, स्टेंट और वैक्सीन जैसे आधुनिक उत्पाद शामिल हैं. वहीं 64 पुराने उत्पादों को सूची से हटा दिया गया है. इनमें केरोसिन, CFL बल्ब, फ्लोरोसेंट ट्यूब, सिलाई मशीन और कुछ पुराने प्रकार की मशीनरी शामिल हैं.
नई प्रणाली से क्या होगा फायदा
सरकार का कहना है कि नई IIP श्रृंखला पहले से ज्यादा व्यापक और आधुनिक है. इसमें Renewable और Non-renewable बिजली प्रोडक्शन, गैस आपूर्ति, धातु और गैर-धातु खनिज, जल आपूर्ति तथा कचरा मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सूचकांक उपलब्ध होंगे.
इससे औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझना आसान होगा और नीति निर्माण में भी मदद मिलेगी. सरकार हर महीने संदर्भ अवधि के 28 दिन बाद IIP आंकड़े जारी करती रहेगी, जिससे उद्योग जगत और निवेशकों को समय पर जानकारी मिल सकेगी.
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