समंदर के सिकंदरों के लिए भारत का मास्टरस्ट्रोक! ₹12,980 करोड़ के ‘मरीन इंश्योरेंस पूल’ का ऐलान

भारत सरकार ने ₹12,980 करोड़ के मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल को मंजूरी दी है, जिससे जहाजों को वॉर रिस्क सहित बीमा सुरक्षा मिलेगी. 10 साल की अवधि वाले इस कदम से विदेशी निर्भरता घटेगी और वैश्विक तनाव के बीच भी भारत का समुद्री व्यापार सुरक्षित और निर्बाध बना रहेगा.

शिपयार्ड कंपनी Image Credit: cochinshipyard

वैश्विक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के युद्ध जैसे हालातों के बीच भारत ने अपने समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने ₹12,980 करोड़ (करीब 1.4 बिलियन डॉलर) के ‘मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल’ को मंजूरी दे दी है. खास बात यह है कि इस फंड को पूरी तरह से घरेलू संसाधनों से तैयार किया गया है और इसे सरकार की ‘सॉवरेन गारंटी’ हासिल है.

अब भारतीय जहाज दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों से भी बेखौफ होकर गुजर सकेंगे, क्योंकि उन्हें बीमा की सुरक्षा और सरकार का भरोसा, दोनों साथ मिलेंगे.

विदेशी निर्भरता होगी खत्म, युद्ध के खतरों से मिलेगी सुरक्षा

वर्तमान में भारतीय जहाजों को थर्ड-पार्टी देनदारियों (जैसे तेल रिसाव, मलबे को हटाना या चालक दल की चोट) के लिए ‘इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी’ (IGP&I) क्लब पर निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन अब भारत अपना खुद का सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है.

यह बीमा पूल न केवल जहाजों की मशीनरी और कार्गो (माल) को कवर करेगा, बल्कि इसमें ‘वॉर रिस्क’ यानी युद्ध के खतरों को भी शामिल किया गया है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों या भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी कंपनियां बीमा देने से मना कर देती हैं, तब भी भारत का व्यापार नहीं रुकेगा.

किसको मिलेगा इस योजना का लाभ?

इस इंश्योरेंस पूल का लाभ उठाने के लिए सरकार ने दो मुख्य शर्तें रखी हैं:

  • जहाज पर भारतीय झंडा लगा होना चाहिए.
  • या फिर उस जहाज का नियंत्रण किसी भारतीय इकाई (Indian Entity) के पास होना चाहिए.
  • यह पॉलिसी उन जहाजों के लिए उपलब्ध होगी जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह से भारत आ रहे हों या भारत से विदेश जा रहे हों. चाहे रास्ता कितना भी ‘वोलाटाइल’ (अस्थिर) क्यों न हो, यह बीमा कवर प्रभावी रहेगा.

10 साल का सुरक्षा कवच और भारी क्षमता

इस योजना को लंबी अवधि के विजन के साथ तैयार किया गया है. इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कार्यकाल: यह पूल 10 साल के लिए काम करेगा, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है.
  • क्षमता: इसमें शामिल बीमा कंपनियों की संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता लगभग ₹950 करोड़ होगी.
  • निगरानी: इसके संचालन और गठन की देखरेख के लिए एक विशेष गवर्निंग बॉडी (शासी निकाय) बनाई जाएगी.

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भारतीय शिपिंग के लिए गेमचेंजर इस कदम से न केवल शिपिंग कंपनियों को किफायती दरों पर बीमा मिलेगा, बल्कि भारत के भीतर समुद्री बीमा, दावों के निपटान और कानूनी विशेषज्ञता का एक नया ईकोसिस्टम भी विकसित होगा. यह फैसला सीधे तौर पर भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ को मजबूती देगा और वैश्विक सप्लाई चेन में देश की स्थिति को और सुरक्षित बनाएगा.

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