विवाद के बाद Lenskart ने बदली स्टाइल गाइड, बिंदी-तिलक-कलावा से नहीं है आपत्ति; जानें हिजाब और पगड़ी पर क्या कहा
Lenskart ने सोशल मीडिया विवाद के बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और नया इन-स्टोर स्टाइल गाइड जारी किया है. कंपनी पर वायरल इंटर्नल डॉक्यूमेंट में बिंदी, तिलक और धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध को लेकर विरोध हुआ था. अब कंपनी ने साफ किया है कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक, सिंदूर, हिजाब, पगड़ी समेत सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की अनुमति है.
Lenskart Controversy: आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart को हाल ही में सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. विरोध के बाद कंपनी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और कर्मचारियों के लिए नया इन-स्टोर स्टाइल गाइड जारी किया है. यह विवाद एक इंटर्नल डॉक्यूमेंट वायरल होने के बाद शुरू हुआ था, जिसमें कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों को लेकर कुछ प्रतिबंध बताए गए थे. ऑनलाइन विरोध बढ़ने के बाद कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान करती है.
क्या था पूरा विवाद?
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक डॉक्यूमेंट तेजी से वायरल हुआ, जिसे Lenskart की कर्मचारी ग्रूमिंग पॉलिसी बताया गया. इस दस्तावेज में कथित तौर पर कर्मचारियों के बिंदी, तिलक और अन्य धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर सीमाएं दिखाई गई थीं. जैसे ही यह दस्तावेज वायरल हुआ, सोशल मीडिया यूजर्स ने कंपनी की आलोचना शुरू कर दी. कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध जताया और कंपनी के खिलाफ बहिष्कार की मांग भी उठाई.
कंपनी ने मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद Lenskart ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी किया. कंपनी ने कहा कि यदि किसी पुराने या गलत कम्युनिकेशन से किसी कर्मचारी या ग्राहक को ठेस पहुंची है, तो उसे इसका गहरा दुख है. कंपनी ने कहा, “अगर हमारी किसी वर्कप्लेस कम्युनिकेशन से किसी को यह महसूस हुआ कि उसकी आस्था का यहां स्वागत नहीं है, तो हम दिल से माफी मांगते हैं. यह Lenskart की पहचान नहीं है.”
नई पॉलिसी में क्या बदलाव?
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने अब नया और पारदर्शी इन-स्टोर स्टाइल गाइड जारी किया है. इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि कर्मचारियों को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ कार्यस्थल पर आने की पूरी अनुमति होगी. नई गाइडलाइन में जिन प्रतीकों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- बिंदी
- तिलक
- सिंदूर
- कलावा
- मंगलसूत्र
- कड़ा
- हिजाब
- पगड़ी
कंपनी ने कहा कि यह नीति “स्पष्ट और बिना किसी भ्रम” के सभी आस्थाओं का स्वागत करती है.
संस्थापक ने भी दी सफाई
इस विवाद के बीच कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने भी बयान जारी किया था. उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज कंपनी की पुरानी और अप्रासंगिक पॉलिसी का हिस्सा था और वर्तमान दिशा-निर्देशों से उसका कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा, “हमारी मौजूदा पॉलिसी में किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है, चाहे वह बिंदी हो या तिलक.”
भारत से जुड़ाव पर जोर
कंपनी ने अपने नए बयान में कहा कि Lenskart भारत में बनी कंपनी है, जिसे भारतीयों ने भारतीयों के लिए बनाया है. उसके 2,400 से ज्यादा स्टोर्स में ऐसे लोग काम करते हैं, जो अपनी परंपराओं और विश्वासों के साथ रोज काम पर आते हैं. कंपनी ने कहा कि वह कभी किसी कर्मचारी से अपनी पहचान दरवाजे पर छोड़कर आने की उम्मीद नहीं करेगी.
आगे क्या करेगी कंपनी?
Lenskart ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में जारी होने वाली हर पॉलिसी, ट्रेनिंग मटेरियल और कम्युनिकेशन में समावेशी मूल्यों का पूरा ध्यान रखा जाएगा. कंपनी ने कहा कि वह ग्राहकों और कर्मचारियों का भरोसा दोबारा मजबूत करने के लिए लगातार बेहतर काम करेगी.
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