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RBI सर्वे: नौकरियों और खर्च को लेकर लोगों में अधिक निराशा, लगातार गिर रहा ग्राहकों का भरोसा

RBI के अर्बन कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे (UCCS) से पता चला है कि मौजूदा समय के लिए कंज्यूमर कॉन्फिडेंस लगातार तीसरे दौर में गिरा है. इसमें 'करंट सिचुएशन इंडेक्स' (CSI) मार्च के 95.7 से गिरकर मई में 90.7 पर आ गया है.

कम हुआ ग्राहकों का भरोसा. Image Credit: Getty image

5 जून को जारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सर्वे के अनुसार, मई में शहरी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था, नौकरियों और खर्च को लेकर अधिक निराश हो गए. वहीं, प्रोफेशनल्स अनुमान लगाने वालों ने भारत की ग्रोथ का अनुमान कम कर दिया, क्योंकि मांग में कमी और लोगों के भरोसे में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं. RBI के अर्बन कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे (UCCS) से पता चला है कि मौजूदा समय के लिए कंज्यूमर कॉन्फिडेंस लगातार तीसरे दौर में गिरा है. इसमें ‘करंट सिचुएशन इंडेक्स’ (CSI) मार्च के 95.7 से गिरकर मई में 90.7 पर आ गया है.

कंज्यूमर कॉन्फिडेंस में गिरावट

RBI के अर्बन कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे (UCCS) से पता चला है कि मौजूदा समय के लिए कंज्यूमर कॉन्फिडेंस लगातार तीसरे दौर में गिरा है. इसमें ‘करंट सिचुएशन इंडेक्स’ (CSI) मार्च के 95.7 से गिरकर मई में 90.7 पर आ गया है.

फ्यूचर एक्सपेक्टेशन्स इंडेक्स (FEI) भी 120.2 से गिरकर 118.7 पर आ गया, जो सितंबर 2023 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है. यह सर्वे 2 मई से 11 मई के बीच 19 शहरों में किया गया था और इसमें 6,086 लोगों की राय ली गई थी.

करंट सिचुएशन इंडेक्स

RBI ने कहा कि मौजूदा समय के लिए कंज्यूमर कॉन्फिडेंस (उपभोक्ता भरोसा) लगातार तीसरी बार गिरा है. ‘करंट सिचुएशन इंडेक्स’ (CSI) पिछले दौर के 95.7 से घटकर 90.7 पर आ गया है. RBI ने यह भी कहा कि आने वाले साल के लिए भरोसा अब भी उम्मीद भरा है, लेकिन इसमें थोड़ी कमी आई है. FEI 1.5 प्वाइंट गिरकर 118.7 पर आ गया है, जो सितंबर 2023 के बाद सबसे कम है.

GDP ग्रोथ के अनुमान में कटौती

ये नतीजे RBI के ‘प्रोफेशनल फोरकास्टर्स के 100वें सर्वे’ के साथ आए हैं. इस सर्वे में 2026-27 के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया गया है, जो आर्थिक हालात को लेकर बढ़ती सावधानी को दिखाता है.

नेट रिस्पॉन्स में गिरावट

लोगों ने मौजूदा आर्थिक हालात के बारे में अपनी राय को और खराब बताया है. आम आर्थिक स्थिति पर नेट रिस्पॉन्स मार्च में -8.6 से गिरकर मई में -16.5 हो गया, जबकि अगले एक साल के लिए उम्मीदें 23.1 से घटकर 19.5 रह गईं. रोजगार को लेकर भी लोगों का नजरिया कमजोर हुआ है. मौजूदा रोजगार हालात पर नेट रिस्पॉन्स -9.1 से गिरकर -14.4 हो गया और भविष्य की उम्मीदें 25.2 से घटकर 21.8 रह गईं.

महंगाई बड़ी चिंता

महंगाई एक बड़ी चिंता बनी रही. सर्वे के अनुसार, 91.6 फीसदी लोगों ने कहा कि पिछले साल कीमतें बढ़ी हैं, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 89.1% फीसदी था. ज्यादातर परिवारों को यह भी लगा कि कीमतें बढ़ने की रफ्तार तेज हो गई है. महंगाई पर नेट रिस्पॉन्स -72.2 से गिरकर -77.1 हो गया.

आय बढ़ने को लेकर लोगों की सोच भी कमजोर हुई. मौजूदा आय पर नेट रिस्पॉन्स मार्च के 3.0 से गिरकर 0.9 हो गया, जबकि अगले एक साल में आय बढ़ने की उम्मीद 48.4 से घटकर 47.1 रह गई.

गैर-जरूरी खर्च में कमी

उपभोक्ताओं के खर्च करने की रफ्तार भी धीमी पड़ गई. कुल खर्च पर नेट रिस्पॉन्स 78.4 से घटकर 74.0 हो गया, जबकि भविष्य में खर्च करने की उम्मीद 81.2 से गिरकर 76.6 हो गई. RBI ने कहा कि यह गिरावट मुख्य रूप से गैर-जरूरी खर्चों को लेकर लोगों की सोच में आई कमी की वजह से आई.

खास बात यह है कि गैर-जरूरी खर्चों को लेकर लोगों की सोच नेगेटिव हो गई. मौजूदा गैर-जरूरी खर्च पर नेट रिस्पॉन्स मार्च में +0.8 था जो मई में गिरकर -0.8 हो गया, जिससे पता चलता है कि परिवार अब जरूरी चीजों के अलावा अन्य चीज़ों की खरीदारी को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं. हालांकि, जरूरी चीजों पर खर्च का स्तर काफी हद तक स्थिर रहा.

आशावादी बने हुए हैं कंज्यूमर

RBI के सर्वे बताते हैं कि जहां उपभोक्ता आने वाले साल को लेकर आशावादी बने हुए हैं, वहीं महंगाई, रोजगार और आय से जुड़ी चिंताएं उनकी सोच पर असर डाल रही हैं और साथ ही अर्थशास्त्री भी भारत की विकास संभावनाओं को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहे हैं.

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