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इंपोर्ट के जाल में उलझा भारतीय डीपटेक का ड्रीम, लंबा हुआ चिप्स और रेयर अर्थ मैग्नेट का इंतजार; सप्लाई में बाधा से बढ़ीं मुश्किलें

आयात पर इस निर्भरता के कारण भारतीय कंपनियों के लिए सप्लाई में रुकावट आने का खतरा बना रहता है. यह स्थिति तब है जब देश इलेक्ट्रिक वाहनों, उपग्रहों, रोबोट और एनर्जी-स्टोरेज सिस्टम का उत्पादन बढ़ा रहा है. भू-राजनीतिक तनावों की वजह से जरूरी सामान मंगाने में लगने वाला समय हफ्तों से बढ़कर महीनों तक पहुंच गया है.

सेमीकंडक्टर चिप्स Image Credit: Money9 Live

Highlights

  • भू-राजनीतिक तनावों ने अहम पुर्जों की सप्लाई को बाधित कर दिया है.
  • भारत हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये के रेयर-अर्थ मैग्नेट का आयात करता है.
  • स्टार्टअप्स के लिए डेवलपमेंट और टेस्टिंग शेड्यूल की योजना बनाना मुश्किल हुआ.

भारतीय डीपटेक कंपनियां चिप्स, बैटरी सेल, रेयर-अर्थ मैग्नेट और विशेष सामग्रियों जैसे अहम पुर्जों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं. जियो-पॉलिटिकल तनावों के कारण इन चीजों को मंगाने में लगने वाला समय हफ्तों से बढ़कर महीनों तक पहुंच गया है, जिससे डेवलपमेंट और टेस्टिंग की शेड्यूल में बाधा आ रही है.

सप्लाई में रुकावट

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, राकेट बनाने वाले एक स्पेस-टेक स्टार्टअप के फाउंडर ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध समेत अन्य भू-राजनीतिक तनावों ने अहम पुर्जों की सप्लाई को बाधित कर दिया है.

उन्होंने कहा, ‘जो पुर्जे पहले कुछ हफ्तों में मिल जाते थे, उन्हें आने में अब महीनों लग रहे हैं. इससे स्टार्टअप्स के लिए अपने डेवलपमेंट और टेस्टिंग शेड्यूल की योजना बनाना मुश्किल हो गया है.’

क्या-क्या इंपोर्ट करता है भारत?

एवेंडस कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने लगभग सभी एडवांस्ड लॉजिक चिप्स और लिथियम-आयन सेल, 90% से अधिक रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट, और लगभग सभी कार्बन-फाइबर कंपोजिट व बैटरी सामग्री का आयात करता है.

बढ़ते प्रोडक्शन के बीच सप्लाई में बाधा

आयात पर इस निर्भरता के कारण भारतीय कंपनियों के लिए सप्लाई में रुकावट आने का खतरा बना रहता है. यह स्थिति तब है जब देश इलेक्ट्रिक वाहनों, उपग्रहों, रोबोट और एनर्जी-स्टोरेज सिस्टम का उत्पादन बढ़ा रहा है.

रिपोर्ट में छह सेक्टर्स – डिफेंस और एयरोस्पेस, स्पेस टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन, सेमीकंडक्टर, एनर्जी ट्रांजिशन और एडवांस्ड मैटेरियल्स- का आकलन किया गया. इसमें पाया गया कि इन क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के स्तर में काफी अंतर है.

रेयर-अर्थ मैग्नेट का इंपोर्ट

यह निर्भरता डायरेक्ट इंपोर्ट के आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये के रेयर-अर्थ मैग्नेट का आयात करता है. लेकिन, इसका एक बड़ा हिस्सा इन आंकड़ों में नहीं दिखता, क्योंकि कई मैग्नेट आयातित मोटरों और अन्य पुर्जों के हिस्से के रूप में देश में आते हैं.’

कंपोनेंट्स पर निर्भरता

रोबोटिक्स में भारत ने वेयरहाउस ऑटोमेशन में तरक्की की है, लेकिन अभी भी इम्पोर्टेड मोशन-कंट्रोल सिस्टम और प्रिसिजन कंपोनेंट्स पर निर्भर है. सेमीकंडक्टर में, रिपोर्ट में चिप डिजाइन, पैकेजिंग और टेस्टिंग में मौकों की पहचान की गई है, जबकि एडवांस्ड चिप्स की बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग अभी भी मुश्किल बनी हुई है.

एनर्जी ट्रांजिशन में घरेलू क्षमता भी बढ़ रही है, बैटरी और सोलर सप्लाई चेन के कुछ हिस्सों में इम्पोर्ट अभी भी काफी अधिक है. रेयर-अर्थ मैग्नेट और बैटरी मटीरियल सहित एडवांस्ड मटीरियल, कई इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने के बावजूद, घरेलू कंपनियों की संख्या के हिसाब से सबसे कमजोर एरिया में से हैं.

क्या करती हैं डीपटेक कंपनियां?

डीपटेक कंपनियां (Deep Tech Companies) ऐसी कंपनियां होती हैं, जो विज्ञान, इंजीनियरिंग और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर आधारित नए प्रोडक्ट्स, सर्विसेज या सॉल्यूशन डेवलप करती हैं. इनका मुख्य आधार सिर्फ सॉफ्टवेयर या मोबाइल ऐप नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी का आविष्कार और उसका व्यावहारिक इस्तेमाल होता है.

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