भारत-EU डील से देखते रह जाएंगे ट्रंप, अमेरिका से शिफ्ट हो जाएगा $11 अरब का एक्सपोर्ट; भारतीयों को सीधा फायदा

भारत अमेरिका को जो टॉप 15 कैटेगरी का सामान भेजता है, उसकी कीमत करीब 45 अरब डॉलर है. इनमें से 12 सेगमेंट ऐसे हैं जिनकी EU में मौजूदगी अभी कम है और इनकी कीमत करीब 21 अरब डॉलर है. अगर इनका आधा हिस्सा भी धीरे-धीरे EU की ओर भेजा जाए तो दोनों पक्षों के बीच व्यापार की तस्वीर बदल सकती है.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड एग्रीमेंट. Image Credit: Getty image

EU trade pact: दुनिया के बदलते व्यापार समीकरणों के बीच भारत और EU के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अब सिर्फ कूटनीतिक बातचीत नहीं रह गया है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता भारत के निर्यातकों के लिए बड़ा मौका साबित हो सकता है. अगर कुछ सामान, जो अभी अमेरिका को भेजे जाते हैं, उन्हें यूरोप की तरफ मोड़ा जाए तो भारत 10 से 11 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त निर्यात कर सकता है. सिर्फ टैरिफ में राहत, नियमों में तालमेल और बाजार तक आसान पहुंच से यह बदलाव संभव हो सकता है. यह मौका भारत और EU दोनों के लिए नए दरवाजे खोल सकता है.

रिपोर्ट ने बताई बड़ी संभावना

BT के हवाले से Rubix Data Sciences की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका को जो टॉप 15 कैटेगरी का सामान भेजता है, उसकी कीमत करीब 45 अरब डॉलर है. इनमें से 12 सेगमेंट ऐसे हैं जिनकी EU में मौजूदगी अभी कम है और इनकी कीमत करीब 21 अरब डॉलर है. अगर इनका आधा हिस्सा भी धीरे-धीरे EU की ओर भेजा जाए तो दोनों पक्षों के बीच व्यापार की तस्वीर बदल सकती है.

भारत-EU व्यापार क्यों रुका हुआ है

रिपोर्ट बताती है कि FY2023 से FY2025 के बीच भारत और EU के बीच सालाना व्यापार करीब 136.5 अरब डॉलर पर ही अटका रहा. यह तब है जब FY2025 में EU, अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया. पहले EU की ओर से कुछ भारतीय प्रोडक्ट को GSP के तहत टैक्स में छूट मिलती थी, लेकिन इसे हटाए जाने से भी व्यापार बढ़ाने की जरूरत और तेज हो गई है.

EU बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी कम

EU की अर्थव्यवस्था करीब 21 ट्रिलियन डॉलर की है और उसका बाहरी देशों से व्यापार 5.4 ट्रिलियन डॉलर का है. इसके बावजूद भारत का हिस्सा EU के आयात में सिर्फ 2.9 फीसदी और निर्यात में 1.9 फीसदी ही है. चिंता की बात यह भी है कि भारत का 70 फीसदी से ज्यादा निर्यात सिर्फ पांच EU देशों में जाता है. इससे इन देशों की आर्थिक सुस्ती का असर सीधे भारत पर पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2024 में EU को अमेरिका के साथ व्यापार में 164 अरब डॉलर का फायदा हुआ था.

टैरिफ का अंतर बना सबसे बड़ी रुकावट

फिलहाल कई भारतीय प्रोडक्ट, खासकर कपड़ा और रेडीमेड कपड़ों पर EU में 12 से 16 फीसदी तक शुल्क लगता है. वहीं EU से भारत आने वाले सामानों पर औसतन 9.3 फीसदी टैक्स है, जो खासकर कार और औद्योगिक सामानों को प्रभावित करता है. यही अंतर व्यापार में तनाव की बड़ी वजह माना जाता है. EU भारत में बड़ा निवेशक भी है. साल 2000 से 2024 तक EU से भारत में करीब 119 अरब डॉलर का निवेश आया है. अगर FTA में सेवाओं, निवेश सुरक्षा और नियमों पर सहमति बनती है तो यह रिश्ता और मजबूत हो सकता है.

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