अमेरिकी टैरिफ मामले पर भारत की पहली प्रतिक्रिया, केंद्रीय मंत्री बोले – समीक्षा के बाद ही आधिकारिक बयान

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि भारत सरकार अदालत के फैसले का अध्ययन करेगी और औपचारिक प्रतिक्रिया संबंधित मंत्रालयों द्वारा दी जाएगी. उन्होंने कहा भारत सरकार उसका अध्ययन करेगी. जो भी औपचारिक प्रतिक्रिया देनी होगी, वह वाणिज्य मंत्रालय या विदेश मंत्रालय देगा.

भारत-अमेरिका Image Credit: Tv9 Network

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से जुड़े फैसले को निरस्त किए जाने के बाद भारत सरकार की ओर से पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि भारत सरकार अदालत के फैसले का अध्ययन करेगी और औपचारिक प्रतिक्रिया संबंधित मंत्रालयों द्वारा दी जाएगी.

प्रल्हाद जोशी ने क्या कहा?

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने मीडिया में पढ़ा है कि US की शीर्ष अदालत ने कुछ निर्णय दिया है. भारत सरकार उसका अध्ययन करेगी. जो भी औपचारिक प्रतिक्रिया देनी होगी, वह वाणिज्य मंत्रालय या विदेश मंत्रालय देगा, मैं नहीं.” यह बयान फिलहाल भारत सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से सामने आया एकमात्र आधिकारिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है.

US सुप्रीम कोर्ट का फैसला

US सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निर्णय देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया. अदालत ने कहा कि इस आपातकालीन कानून का उपयोग इस प्रकार के व्यापक व्यापारिक कदमों के लिए नहीं किया जा सकता.

फैसले का वैश्विक असर

यह निर्णय वैश्विक व्यापार नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिकी प्रशासन के टैरिफ लगाने के अधिकारों की सीमा स्पष्ट होती है. हालांकि, फैसले के तुरंत बाद भारत ने कोई औपचारिक सरकारी बयान जारी नहीं किया है. फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “कुछ भी नहीं बदलता. वे टैरिफ देंगे और हम टैरिफ नहीं देंगे.” उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को स्थिर बताते हुए इसे व्यापार संतुलन का हिस्सा बताया.

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इसके अलावा ट्रंप ने यह भी दावा दोहराया कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूस से तेल खरीद में कमी की. हालांकि, भारत सरकार ने इस दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि ऊर्जा से जुड़े फैसले राष्ट्रीय हित पर आधारित होते हैं.






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