सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा टैरिफ पर संशय: 50%, 25%, 18%, 10% या 3% आखिर भारतीय सामानों पर कितना रहेगा शुल्क?
अमेरिका की बदलती टैरिफ नीति ने भारतीय निर्यातकों की चिंता फिर बढ़ा दी है. अगस्त में 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका शुल्क अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गया है. लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 10 प्रतिशत के नए वैश्विक टैरिफ से व्यापार जगत में फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया है.
Tariffs on Indian Goods: अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर चल रहे उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय निर्यातकों के सामने फिर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है. अगस्त में जहां भारतीय सामान पर प्रभावी शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था, वहीं अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह घटकर लगभग 3 प्रतिशत (एमएफएन स्तर) पर आ गया है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 10 प्रतिशत के नए वैश्विक टैरिफ से स्थिति फिर बदल सकती है. इससे यह संशय पैदा हो गया है कि भारतीय सामानों पर 3, 10, 18, 25 या 50 प्रतिशत में टैरिफ की कौन सी रेट लागू होगी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ा बदलाव
हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आपात प्रावधानों के तहत लगाए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को रद्द कर दिया. इसके बाद भारतीय सामान पर शुल्क फिर से ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) स्तर पर आ गया, जो औसतन लगभग 3 प्रतिशत है. इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. पहले औसत शुल्क करीब 3 प्रतिशत ही था, जो अब फिर से लागू हो गया है.
फिर आ सकता है 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ
राहत ज्यादा दिन टिकेगी या नहीं, यह साफ नहीं है. राष्ट्रपति ट्रंप ने 21 फरवरी को घोषणा की कि तीन दिन के भीतर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू किया जाएगा. यह टैरिफ ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 के तहत लगाया जाएगा और 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है, जब तक कि कांग्रेस इसे आगे न बढ़ाए. हालांकि मोबाइल फोन और फार्मा उत्पादों पर फिलहाल छूट जारी रहने की संभावना है. वहीं स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों पर राष्ट्रीय सुरक्षा प्रावधान (सेक्शन 232) के तहत अलग से शुल्क पहले की तरह लागू रहेंगे.
अप्रैल से अगस्त तक कैसे बढ़ता गया टैरिफ?
टैरिफ विवाद की शुरुआत अप्रैल में हुई, जब अमेरिका ने भारत पर 26 प्रतिशत शुल्क लगाया. बाद में इसे घटाकर 10 प्रतिशत किया गया. अगस्त में अमेरिका ने भारतीय सामान पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया. इसमें 25 प्रतिशत ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क शामिल था, जो भारत द्वारा रूस से तेल आयात से जुड़ा था. इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों, खासकर इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और ऑटो पार्ट्स सेक्टर में चिंता बढ़ गई थी.
रूस से तेल आयात पर जुड़ा अतिरिक्त शुल्क हटाया गया
6 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर रूस से तेल आयात से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क हटा दिया. अमेरिका ने कहा कि भारत ने रूस से सीधे या परोक्ष रूप से तेल आयात बंद करने और अमेरिका से ऊर्जा खरीदने का आश्वासन दिया है. साथ ही अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए भी सहमति बनी है. इस फैसले के बाद कुल प्रभावी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत रह गया था. फिर इसे 25 प्रतिशत से घटाकर 18 कर दिया.
कुल मिलाकर, भारतीय निर्यातकों के लिए स्थिति अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन 10 प्रतिशत के संभावित नए वैश्विक टैरिफ से कारोबारी फिर सतर्क हो गए हैं.
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