अमेरिका के राष्ट्रपति अब अपनी मर्जी से नहीं लगा पाएंगे टैरिफ, जानिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्यों हुआ भारत का जिक्र

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रपति इमरजेंसी कानून के तहत दूसरे देशों पर टैरिफ नहीं लगा सकते. कोर्ट के अनुसार टैरिफ एक तरह का टैक्स है और टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. यह फैसला Learning Resources Inc v Trump मामले में आया.

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रपति इमरजेंसी कानून के तहत दूसरे देशों पर टैरिफ नहीं लगा सकते Image Credit: @Money9live

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है जिसका असर सीधे राष्ट्रपति की ट्रेड पॉलिसी पर पड़ा है. इस फैसले में भारत का नाम भी सामने आया. मामला यह था कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति इमरजेंसी कानून के तहत दूसरे देशों पर टैरिफ लगा सकते हैं. कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा करना राष्ट्रपति के अधिकार में नहीं आता. यह फैसला Learning Resources Inc v Trump केस में आया. इस दौरान रूस यूक्रेन युद्ध और भारत द्वारा रूसी तेल आयात का भी जिक्र हुआ.

क्या था पूरा मामला

यह विवाद इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) से जुड़ा था. अमेरिकी सरकार का तर्क था कि इस कानून के तहत राष्ट्रपति को इमरजेंसी हालात में आर्थिक कदम उठाने का अधिकार है. इसमें टैरिफ भी शामिल हो सकते हैं. सरकार ने कहा कि टैरिफ को विदेश नीति के टूल की तरह इस्तेमाल किया गया. खासकर बड़े व्यापारिक साझेदार देशों के साथ बातचीत में इसका यूज हुआ.

भारत का नाम क्यों आया

फैसले में भारत का जिक्र रूस यूक्रेन संघर्ष के बारे में हुआ. रिकॉर्ड के अनुसार 6 अगस्त 2025 को भारत पर टैरिफ लगाया गया था. आरोप था कि भारत सीधे या इनडायरेक्ट रूप से रूसी तेल आयात कर रहा है. बाद में 6 फरवरी 2026 को इन टैरिफ को कम कर दिया गया. अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि भारत ने रूसी तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता जताई थी.

जजों की अलग-अलग राय

सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने कहा कि टैरिफ असल में टैक्स का एक रूप है. अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. इसलिए राष्ट्रपति IEEPA जैसे कानून के जरिए टैरिफ नहीं लगा सकते. वहीं जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने असहमति जताई. उनका कहना था कि इतिहास में टैरिफ को विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है.

बहुमत ने क्या कहा

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि विदेश नीति का हवाला देकर संविधान की सीमाओं को नहीं बदला जा सकता. अगर कांग्रेस ने साफ शब्दों में राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी है तो यह अधिकार नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछले करीब 50 साल में किसी राष्ट्रपति ने IEEPA के तहत टैरिफ नहीं लगाए थे. इससे साफ है कि कानून का मकसद ऐसा अधिकार देना नहीं था.

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फैसले का असर क्या होगा

इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति की ट्रेड पॉलिसी से जुड़ी पावर पर स्पष्ट सीमा तय हो गई है. अब इमरजेंसी स्थिति का हवाला देकर सीधे टैरिफ लगाना आसान नहीं होगा. साथ ही यह फैसला दिखाता है कि टैरिफ जैसे आर्थिक कदम विदेश नीति और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन का विषय हैं.