₹50000 करोड़ का डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स बूम, मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ता मार्जिन;क्या आपके पोर्टफोलियो में हैं ये दो शेयर
भारत के डिफेंस सेक्टर में तेजी से बदलाव हो रहा है. अब फोकस केवल हथियार और प्लेटफॉर्म बनाने पर नहीं बल्कि उनके अंदर लगे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर है. बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स कंटेंट के कारण 50000 करोड़ रुपये का डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स अवसर उभर रहा है.
देश का डिफेंस सेक्टर तेजी से बदल रहा है. अब फोकस केवल फाइटर जेट, मिसाइल या रडार बनाने पर नहीं है. असली ताकत उन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में है जो इन प्लेटफॉर्म को स्मार्ट और सटीक बनाते हैं. हर नए डिफेंस इक्विपमेंट में इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है. इसी वजह से करीब 50000 करोड़ रुपये का डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स अवसर उभर रहा है. इस बदलते दौर में Kaynes Technology और Avalon Technologies जैसे नाम तेजी से चर्चा में आ रहे हैं. इन्हें डिफेंस के नए ब्रेन सप्लायर के रूप में देखा जा रहा है.
Metal से Silicon की ओर बढ़ता डिफेंस
मॉडर्न डिफेंस स्ट्रक्चर अब केवल मजबूत स्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं हैं. कॉकपिट सिस्टम, मिसाइल गाइडेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एम्बेडेड सिग्नल प्रोसेसिंग जैसी टेक्निक उन्हें असली ताकत देती है. इन सभी सिस्टम के पीछे हाई रिलायबिलिटी PCB और मिशन क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक्स काम करते हैं. जैसे- जैसे हर प्लेटफॉर्म में इलेक्ट्रॉनिक्स का यूज बढ़ रहा है, वैल्यू चेन भी ऊपर की ओर शिफ्ट हो रही है. अब कमाई केवल हार्डवेयर बनाने में नहीं बल्कि डिजाइन और इंटीग्रेशन में है. यही बदलाव इन कंपनियों के लिए अवसर बन रहा है.
मजबूत ऑर्डर बुक दे रही है लंबी विजिबिलिटी
डिफेंस सेक्टर में तिमाही नतीजों से ज्यादा अहम ऑर्डर बुक मानी जाती है. Kaynes Technology की ऑर्डर बुक लगभग 9000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है. Avalon Technologies के पास करीब 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑर्डर है. यह कई साल की रेवेन्यू विजिबिलिटी दिखाता है. खास बात यह है कि अब काम केवल असेंबली तक सीमित नहीं है बल्कि सब सिस्टम और डिजाइन लेवल तक पहुंच चुका है. इससे कंपनियों की पकड़ मजबूत होती है और दोबारा ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ती है.
मार्जिन और रिटर्न में सुधार
डिजाइन आधारित काम में मार्जिन ज्यादा होता है और यही रुझान इन दोनों कंपनियों में दिख रहा है. Kaynes Technology का ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले कुछ समय में बढ़ा है और RoE तथा RoCE भी स्थिर स्तर पर हैं. Avalon Technologies ने भी अपने मार्जिन में सुधार दिखाया है. यह संकेत देता है कि कंपनियां वैल्यू चेन में ऊपर जा रही हैं. बेहतर मार्जिन का मतलब है मजबूत प्रॉफिट ग्रोथ की संभावना. यही वजह है कि बाजार इन कंपनियों को प्रीमियम वैल्यूएशन दे रहा है.
शेयरों का प्रदर्शन
अगर शेयरों के प्रदर्शन की बात करें तो 20 फरवरी को Kaynes के शेयरों में 0.19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 3871 रुपये पर बंद हुए. पिछले पांच साल में इस शेयर ने अपने निवेशकों को करीब 397 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं Avalon के शेयरों में शुक्रवार को 0.07 फीसदी की तेजी देखने को मिली, जिसके बाद यह 1028 रुपये पर बंद हुए. इस शेयर ने पिछले पांच साल में अपने निवेशकों को लगभग 135 फीसदी का रिटर्न दिया है.
एक्सपोर्ट और भविष्य की संभावनाएं
दोनों कंपनियां केवल घरेलू बाजार पर निर्भर नहीं हैं. Kaynes का निर्यात नॉर्थ अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में है. Avalon भी ग्लोबल एयरोस्पेस सप्लाई चेन से जुड़ी है. इससे उन्हें इंटरनेशनल क्वालिटी स्टैंडर्ड और विविध रेवेन्यू का फायदा मिलता है. डिफेंस बजट बढ़ने के साथ साथ हर प्लेटफॉर्म में इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा बढ़ रहा है. ऐसे में आने वाले समय में असली वैल्यू उन्हीं कंपनियों को मिल सकती है जो प्लेटफॉर्म के अंदर का ब्रेन तैयार करती हैं. निवेशकों के लिए यह थीम आने वाले दशक में अहम साबित हो सकती है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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