महंगे तेल और सप्लाई संकट का असर, मई में 6.5% घटी देश की ईंधन खपत; LPG डिमांड में भी बड़ी गिरावट
मई 2026 में भारत की कुल ईंधन खपत 6.5 फीसदी घटकर 19.93 मिलियन टन रह गई. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार, LPG की मांग 20.5 फीसदी और नेफ्था की खपत 29.5 फीसदी घटी. वहीं पेट्रोल और डीजल की बिक्री में केवल मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई.
India Fuel Consumption: भारत में मई 2026 के दौरान पेट्रोलियम प्रोडक्ट की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल ईंधन खपत सालाना आधार पर 6.5 फीसदी घटकर 19.93 मिलियन टन रह गई. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों का असर घरेलू मांग पर भी देखने को मिला. खासकर LPG और नेफ्था की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग में भी सीमित बढ़ोतरी देखने को मिली.
LPG की मांग में सबसे बड़ी गिरावट
मई महीने में LPG की खपत 20.5 फीसदी घटकर 2.13 मिलियन टन रह गई. यह सभी प्रमुख ईंधनों में सबसे बड़ी गिरावट है. जानकारों का मानना है कि सप्लाई के दबाव और बढ़ती कीमतों का असर LPG की मांग पर पड़ा है. इसके अलावा नेफ्था को LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी दिशा में उपयोग किया जा रहा है. इससे बाजार में LPG की उपलब्धता और मांग दोनों प्रभावित हुई हैं.
करीब 30 फीसदी की कमी
नेफ्था की मांग में भी भारी गिरावट दर्ज की गई. मई में इसकी खपत 29.5 फीसदी कम रही. नेफ्था का उपयोग गैस आधारित प्रोडक्ट के मैन्यूफैक्चिरिंग में किया जाता है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए नेफ्था की सप्लाई को मोड़ा जा रहा है. इसका सीधा असर इंडस्ट्रीयल डिमांड और कंजप्शन के आंकड़ों पर देखने को मिला है.
पेट्रोल और डीजल की मांग रही कमजोर
देश में पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी तो हुई, लेकिन यह सामान्य से काफी कम रही. मई में पेट्रोल की बिक्री 3.3 फीसदी और डीजल की बिक्री केवल 1.5 फीसदी बढ़ी. बढ़ती कीमतों और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट के कारण खपत पर दबाव बना रहा. प्राइवेट पेट्रोल पंपों पर ऊंची कीमतों ने भी कंज्यूमर की मांग को प्रभावित किया है.
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हवाई ईंधन की खपत में नहीं दिखी तेजी
एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बिक्री मई में लगभग स्थिर रही. इसकी खपत 7.83 लाख टन के स्तर पर बनी रही. रिपोर्ट के मुताबिक, कई एयरलाइंस ने ऑपरेशन कॉस्ट बढ़ने के कारण अपनी उड़ानों की संख्या सीमित रखी. इसका असर हवाई ईंधन की मांग पर देखने को मिला है.
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