भारत अगले 90 दिनों में जर्मनी के साथ सबसे बड़ी डिफेंस डील के लिए तैयार, 8 अरब डॉलर के सबमरीन समझौते पर नजर
भारत और जर्मनी अगले तीन महीनों के भीतर 8 अरब डॉलर की सबमरीन डील को अंतिम रूप दे सकते हैं. भारत और जर्मनी ने इसके अलावा 'रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप' और 'UN शांतिरक्षा प्रशिक्षण में सहयोग के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था' पर हस्ताक्षर किए और उनका आदान-प्रदान किया.
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने बुधवार को उत्तरी बंदरगाह शहर कील में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत के बाद कहा कि भारत और जर्मनी अगले तीन महीनों के भीतर 8 अरब डॉलर की सबमरीन डील को अंतिम रूप दे सकते हैं. पिस्टोरियस ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में भारत में छह सबमरीन का प्रोडक्शन शामिल है और भारत में सरकार अभी इस समझौते को पूरा करने के लिए अगले कदमों पर तालमेल बिठा रही है.
पिस्टोरियस ने पत्रकारों से कहा कि मुझे पूरा-पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही इस समझौते पर दस्तखत कर पाएंगे. यह बात उन्होंने तब कही जब दोनों मंत्रियों ने थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स GmbH (TKMS) की एक फैसिलिटी का दौरा किया.
सही रास्ते पर डील
TKMS और भारत की सरकारी कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders Ltd. सबमरीन बनाने के लिए मिलकर काम करने को तैयार हैं. पिस्टोरियस ने कहा कि सिंह ने संकेत दिया है कि यह डील ‘सही रास्ते पर है’ और साथ ही यह भी कहा कि अगले तीन महीनों के अंदर, जैसा कि कहा जाता है, सब कुछ पूरा हो जाएगा और कागजों पर दस्तखत भी हो जाएंगे.
डील की वैल्यू
यह कॉन्ट्रैक्ट, जिसकी वैल्यू कम से कम 8 अरब डॉलर होने का अनुमान है, भारत की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील होगी. यह किसी गैर-यूरोपीय देश को जर्मन सबमरीन बनाने की टेक्नोलॉजी का पहला ट्रांसफर भी होगा. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इस साल की शुरुआत में भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी.
रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम
भारत और जर्मनी ने इसके अलावा ‘रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप’ और ‘UN शांतिरक्षा प्रशिक्षण में सहयोग के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था’ पर हस्ताक्षर किए और उनका आदान-प्रदान किया. यह दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है. भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से संस्थागत सहयोग और गहरा होने की उम्मीद है और साथ ही संयुक्त प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और रक्षा क्षमताओं के विकास में नए अवसर पैदा होंगे.
विशेष तकनीकों पर जोर
इससे पहले बर्लिन में राजनाथ सिंह और पिस्टोरियस ने द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें सुरक्षा सहयोग, रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन जैसे विषयों पर चर्चा हुई. इस दौरान विशेष तकनीकों (Niche Technologies) पर खास जोर दिया गया. दोनों पक्षों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के एक मुख्य स्तंभ के तौर पर ‘सैन्य-से-सैन्य जुड़ाव’ (Military-to-Military Engagement) को और विस्तार देने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया.
राजनाथ सिंह ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ‘बर्लिन में जर्मनी के संघीय रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई. हमने रक्षा सहयोग को और गहरा करने और उभरती हुई भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने सहित कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.
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