अब प्लास्टिक के होंगे भारतीय नोट! RBI जल्द शुरू कर सकता है पॉलिमर करेंसी, जानिए कागज से कैसे अलग?

RBI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने पर 6,372 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए, जबकि पिछले साल यह खर्च करीब 5,100 करोड़ रुपये था. इसकी बड़ी वजह बाजार में नकदी की बढ़ती मांग रही. देश में डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद लोगों के बीच कैश की मांग लगातार बढ़ रही है. 15 मई तक देश में चलन में मौजूद कुल नकदी 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में बढ़ती नकदी की मांग को देखते हुए अब प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोट लाने की तैयारी कर रहा है. RBI का मानना है कि पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं और जल्दी खराब नहीं होते. इससे नोट छापने और बदलने का खर्च कम होगा. साथ ही, ये नोट पानी और गंदगी से भी कम प्रभावित होते हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की हाल की बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक अब देश के ATM भी ऐसे प्लास्टिक नोट देने के लिए तकनीकी रूप से तैयार किए जा सकते हैं.

नोट छापने का खर्च लगातार बढ़ रहा

RBI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने पर 6,372 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए, जबकि पिछले साल यह खर्च करीब 5,100 करोड़ रुपये था. इसकी बड़ी वजह बाजार में नकदी की बढ़ती मांग रही.

तेजी से बढ़ रही नकदी की जरूरत

देश में डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद लोगों के बीच कैश की मांग लगातार बढ़ रही है. 15 मई तक देश में चलन में मौजूद कुल नकदी 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. खासतौर पर 10 रुपये और 20 रुपये जैसे छोटे नोटों की मांग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है.

खराब नोट भी बने बड़ी समस्या

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, FY25 में करीब 23.8 अरब खराब और गंदे नोटों को हटाना पड़ा. इनमें सबसे ज्यादा 500 रुपये और 100 रुपये के नोट शामिल रहे. पॉलिमर नोटों की उम्र ज्यादा होने से यह समस्या काफी कम हो सकती है.

पहले भी हुई थी कोशिश

साल 2012 में सरकार ने 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया. अब RBI का कहना है कि तकनीक पहले से काफी बेहतर हो चुकी है और ATM भी ऐसे नोट पहचान सकेंगे.

दुनिया के कई देशों में चल रहे हैं प्लास्टिक नोट

ऑस्ट्रेलिया सबसे पहला देश था जिसने 1988 में पॉलिमर नोट शुरू किए थे. इसके बाद कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और रोमानिया समेत करीब 60 देशों में प्लास्टिक नोट इस्तेमाल हो रहे हैं. अगर RBI की यह योजना लागू होती है, तो आने वाले समय में भारतीयों के हाथ में भी कागज की जगह प्लास्टिक के नोट दिखाई दे सकते हैं.