सौर ऊर्जा में भारत बना ग्लोबल साउथ का लीडर, अब बायो रिसोर्स में इनोवेशन की जरूरत

ऊर्जा की बढ़ती मांग और जलवायु संकट के बीच भारत किस रास्ते पर आगे बढ़ेगा? TV9 के मंच पर हुए खास पैनल में देश के शीर्ष विशेषज्ञों ने समाधान सुझाए. सौर ऊर्जा, बायो-फ्यूल और कॉर्पोरेट इनोवेशन के जरिए भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को कैसे पूरा करेगा, इस पर गहन चर्चा हुई.

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WITT Summit 2026: तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों, जलवायु परिवर्तन के दबाव और विकास की महत्वाकांक्षाओं के बीच भारत एक अहम मोड़ पर खड़ा है. सवाल साफ है, क्या देश विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना पाएगा? इसी बड़े सवाल का जवाब तलाशने के लिए TV9 के खास कार्यक्रम ‘What India Thinks Today’ में “Energy Conundrum, India’s Way Out” विषय पर एक अहम पैनल चर्चा हुई.

मंच पर शामिल रहे सेक्टर के दिग्गज

इस चर्चा की कमान संभाली भारत के पूर्व राजनयिक मंजीव सिंह पुरी ने, जिन्होंने शुरुआत में ही साफ कर दिया कि ‘विकसित भारत 2047’ और ‘नेट जीरो 2070’ जैसे लक्ष्य सिर्फ नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि एक कठिन लेकिन जरूरी यात्रा हैं.

पैनल में TERI की महानिदेशक डॉ. विभा धवन, AM Green के CTO डॉ. एस.एस.वी. रामकुमार, DCM श्रीराम लिमिटेड के Whole-Time Director के.के. शर्मा और टेक महिंद्रा के Chief Sustainability Officer संदीप चंदना शामिल रहे. सभी विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभवों के जरिए बताया कि भारत ऊर्जा संकट से कैसे बाहर निकल सकता है.

सौर ऊर्जा में ग्लोबल साउथ को लीड कर रहा भारत

चर्चा के दौरान वरिष्ठ राजनयिक पुरी ने याद दिलाया कि भारत ने एक दशक पहले ही सौर ऊर्जा को अपनाकर दूरदर्शिता दिखाई थी. आज भारत ग्लोबल साउथ में ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास के मामले में नेतृत्व कर रहा है. TERI की डॉ. विभा धवन ने बताया कि उनका संस्थान पिछले 50 वर्षों से ऊर्जा, संसाधन और जलवायु जैसे मुद्दों पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारत में पारंपरिक रूप से सर्कुलर इकोनॉमी की सोच रही है, जहां संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल स्वाभाविक है.

TERI के अभियान से जगमग हुआ गांव

डॉ. धवन ने TERI के ‘लाइट अ बिलियन लाइव्स’ अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे सौर लालटेन ने ग्रामीण इलाकों में लोगों की जिंदगी बदल दी. इससे न सिर्फ रोशनी मिली बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार के नए मौके भी बने. अब यह पहल ‘बिलियन लाइवलीहुड्स’ के रूप में आगे बढ़ रही है, जिसका मकसद साफ ऊर्जा के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.

बायो रिसोर्स के सही इस्तेमाल से बदलेगी तस्वीर

ऊर्जा के स्थानीय समाधान पर बात करते हुए डॉ. एस.एस.वी. रामकुमार ने भारत की बायो-रिसोर्स क्षमता को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि देश में हर साल करीब 22.8 करोड़ टन कृषि अवशेष और 10 करोड़ टन बैगास उपलब्ध होता है. अगर इनका सही इस्तेमाल हो तो इससे 42 गीगावॉट ग्रीन पावर, 60,000 किलोलीटर प्रतिदिन एथेनॉल और 60,000 टन प्रतिदिन कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जा सकती है. उनका मानना है कि भारत को अपने स्थानीय संसाधनों पर आधारित ऊर्जा मॉडल विकसित करना होगा, जिससे आयात पर निर्भरता घटे और लागत भी कम हो.

नेट जीरो के ओर बढ़ रहा टेक महिंद्रा

कॉर्पोरेट सेक्टर की भूमिका पर बात करते हुए टेक महिंद्रा के संदीप चांदना ने बताया कि उनकी कंपनी ने 2006-07 से ही सस्टेनेबिलिटी को अपने बिजनेस का हिस्सा बना लिया था. कंपनी का लक्ष्य 2035 तक नेट-जीरो बनना है, जो देश के तय टारगेट से 35 साल पहले है. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकों की मदद से ऊर्जा खपत को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है. टेक महिंद्रा न सिर्फ खुद यह कर रही है, बल्कि अपने ग्राहकों को भी नेट-जीरो की दिशा में सलाह दे रही है.

बैगास से बनती बिजली से मिल रहा सहारा

वहीं, पारंपरिक उद्योगों में बदलाव का उदाहरण देते हुए DCM श्रीराम के के.के. शर्मा ने बताया कि उनकी कंपनी 135 साल पुरानी होने के बावजूद सस्टेनेबिलिटी को तेजी से अपना रही है. उन्होंने कहा कि गन्ना उद्योग में बैगास से बिजली बनाई जाती है और शीरे से एथेनॉल तैयार किया जाता है, जो पेट्रोल में मिलाया जाता है. कंपनी ने 2030 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य रखा है और नवीकरणीय ऊर्जा में लगातार निवेश कर रही है.

शर्मा ने यह भी बताया कि उनकी ‘मीठा सोना’ परियोजना के जरिए किसानों को टिकाऊ खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उत्पादन में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है और पानी की बचत भी कई गुना बढ़ी है.

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भारत में बढ़ेगी ऊर्जा की मांग

चर्चा के अंत में यह बात साफ हुई कि भारत के सामने ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ने वाली है और इसे पूरा करने के लिए बहु-आयामी रणनीति जरूरी होगी.

TERI के अरुपेंद्र नाथ मुल्लिक ने कहा कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा, पहुंच और जलवायु जोखिम. तीनों के बीच संतुलन बनाना होगा. पैनल के सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत सिर्फ योजनाएं नहीं बना रहा, बल्कि जमीन पर काम भी कर रहा है. छोटे सप्लाई चेन, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और टेक्नोलॉजी के जरिए ऑप्टिमाइजेशन, यही भारत के ऊर्जा भविष्य की असली ताकत है.