रियाल में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट से हिला ईरान, 1 डॉलर की वैल्यू 14 लाख पहुंची, करेंसी क्राइसिस से सड़कों पर बिजनेसमैन
ईरान में रियाल की डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट से महंगाई बेकाबू हो गई है और आम लोगों की क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. करेंसी क्राइसिस से भड़के विरोध प्रदर्शन अब कई शहरों में फैल चुके हैं और आर्थिक असंतोष सामाजिक तनाव में बदलता दिख रहा है.
Iran Currency Collapse: ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन छठे दिन भी जारी हैं. हालात ऐसे समय बिगड़े हैं जब देश क्षेत्रीय संघर्षों, अंतरराष्ट्रीय दबाव और सत्ता के शीर्ष पर अनिश्चितता से जूझ रहा है. इस इस्लामिक देश की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है. ईरान की करेंसी रियाल में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट आई है. ये डॉलर के मुकाबले 14 लाख के स्तर तक गिर गया है, जिससे महंगाई बेकाबू हो गई और आम लोगों की खरीदारी की क्षमता प्रभावित हुई है.
करेंसी गिरते ही सड़कों पर उतरे व्यापारी
रियाल की तेज गिरावट का सबसे पहला असर तेहरान के पारंपरिक बाजारों में दिखा. आयात पर निर्भर सामान, खाद्य पदार्थ और दवाइयों के दाम अचानक बढ़ गए. कई व्यापारियों ने घाटे के डर से दुकानें बंद कर दीं और आर्थिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया. जल्द ही यह विरोध अन्य शहरों शिराज, इस्फहान, केरमानशाह और फासा तक फैल गया.
आर्थिक जानकारों के अनुसार रियाल की कमजोरी सिर्फ ताजा संकट नहीं है, बल्कि वर्षों से जमा हो रहे दबाव का नतीजा है. विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव, तेल निर्यात में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने रियाल को लगातार कमजोर किया है.
प्रतिबंध से अर्थव्यवस्था की टूटी कमर
2018 में अमेरिका ने परमाणु समझौते से हटने और कड़े प्रतिबंध दोबारा लगाने के बाद से ही ईरान की अर्थव्यवस्था लगातार संघर्ष कर रही है. ईरान की तेल से होने वाली कमाई सीमित हो गई, वहीं डॉलर की आवक घटी और सरकार को मुद्रा बाजार में भारी दखल देना पड़ा. मल्टी रेट एक्सचेंज सिस्टम से कुछ वर्गों को फायदा मिला, लेकिन आम जनता की मंहगाई ने कमर तोड़ दी.
सरकार का कदम साबित हुआ नाकाफी
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने हालात काबू में करने के लिए आर्थिक ढांचे में बदलाव किए हैं. जिसके तहत सेंट्रल बैंक में नेतृत्व बदला गया और मल्टी रेट सिस्टम को खत्म करने की प्रक्रिया तेज की गई है. साथ ही जरूरी आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी वाली दर भी हटाई गई है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ये कदम शॉर्ट टर्म में रियाल को और दबाव में डाल सकते हैं. बाजार में भरोसे की कमी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण लोग विदेशी मुद्रा और सोने की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे रियाल पर दबाव और बढ़ रहा है.
फूटा लोगों का गुस्सा
करेंसी क्राइसिस यानी मुद्रा संकट से शुरू हुआ असंतोष अब केवल महंगाई तक सीमित नहीं है. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक बदहाली के लिए पूरे शासकीय ढांचे को जिम्मेदार ठहराया है. यह स्थिति सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. लोग सड़कों पर उतर आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं.
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंकाओं को फिर जगा दिया है. यह आंदोलन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विद्रोह के बाद से इस्लामिक रिपब्लिक यानी ईरान के सामने सबसे गंभीर मसला माना जा रहा है.