सिंगापुर-जापान-दक्षिण कोरिया सबको ले डूबेगा ईरान संकट! रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी; भारत-चीन भी जद में
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर खतरा बढ़ गया है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाली तेल और गैस सप्लाई में बाधा की आशंका से बाजार चिंतित हैं. जापान, साउथ कोरिया और भारत जैसे देश आयातित एनर्जी पर निर्भर हैं. कीमतें बढ़ने से महंगाई, व्यापार घाटा और करेंसी पर दबाव बढ़ सकता है. लंबा संघर्ष उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी नया संकट खड़ा कर सकता है.
Iran Israel War: पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब एशिया के कई अमीर देशों पर दिख सकता है. हाल की सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं. मूडीज एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एशिया की बड़ी और अमीर अर्थव्यवस्थाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. इसका मुख्य कारण इन देशों की इंपोर्ट होने वाला तेल और गैस पर भारी निर्भरता है. अगर हालात और बिगड़ते हैं तो तेल, गैस और फूड आइटम की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर आम लोगों की जेब और महंगाई पर पड़ेगा.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ी चिंता
दुनिया के करीब एक तिहाई समुद्री कच्चे तेल का निर्यात स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर गुजरता है. इसके साथ ही लगभग 20 फीसदी ग्लोबल LNG सप्लाई भी इसी रास्ते से जाती है. अगर इस मार्ग पर रुकावट आती है तो तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. बाजार में इसकी शुरुआती झलक भी दिखी है और ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेजी आई है. शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई है.
अमीर अर्थव्यवस्थाएं सबसे ज्यादा प्रभावित
जापान, साउथ कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देश अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा एनर्जी आयात करते हैं. ये देश फूड आइटम के लिए भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं. अगर ग्लोबल लेवल पर तेल और अनाज की कीमत बढ़ती है तो इन देशों में महंगाई तेजी से बढ़ सकती है. इससे आम लोगों का खर्च बढ़ेगा और उद्योगों की लागत भी ऊपर जाएगी.
महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव
एनर्जी और फूड आइटम कीमतों में बढ़ोतरी से कंज्यूमर और प्रोडक्शन दोनों तरह की महंगाई बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती रोक सकते हैं या सख्त कदम उठा सकते हैं. बढ़ता आयात बिल व्यापार संतुलन को कमजोर कर सकता है. साथ ही विदेशी निवेश निकलने से लोकल एनर्जी पर भी दबाव बन सकता है.
चीन और भारत की अलग स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार चीन के पास तेल के रिजर्व और ईरान से रियायती तेल की उपलब्धता के कारण उसे थोड़ी राहत मिल सकती है. हालांकि अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव उसके व्यापार पर असर डाल सकता है. भारत के लिए स्थिति थोड़ी जटिल है क्योंकि वह मध्य पूर्वी तेल पर निर्भर है. साथ ही उसे रूस से तेल आयात कम करने की दबाव को भी ध्यान में रखना होगा.
उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए फिर खतरा
अगर संघर्ष लंबा चला तो एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर फिर से दबाव बढ़ सकता है. रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी एनर्जी और फूड कीमतों ने श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में संकट खड़ा कर दिया था. अगर खाड़ी क्षेत्र से तेल सप्लाई बाधित होती है तो ऐसी स्थिति दोबारा बन सकती है. इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिख सकता है.
