मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कतर में LNG उत्पादन रुका, यूरोप में गैस के दाम 45% तक उछले, जानें क्या होगा असर

कतर यूरोप को सीधे तौर पर पूरी गैस सप्लाई नहीं करता, लेकिन वह यूरोप के LNG आयात का लगभग 12 से 14 प्रतिशत हिस्सा देता है. अगर एशिया को जाने वाली सप्लाई प्रभावित होती है, तो वहां के खरीदार दूसरी जगह से गैस खरीदेंगे. इससे दुनिया भर में LNG की मांग बढ़ेगी और दाम और ऊपर जा सकते हैं.

LNG Image Credit: Canva, tv9

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब यूरोप की गैस कीमतों पर दिखने लगा है. कतर में दुनिया के सबसे बड़े गैस प्लांट से LNG उत्पादन रुकने के बाद यूरोप में नेचुरल गैस के दाम एक ही दिन में करीब 45 प्रतिशत तक उछल गए. यूरोप में गैस की बेंचमार्क कीमत, जो नीदरलैंड के डच टीटीएफ हब पर ट्रेड होती है, सोमवार दोपहर करीब 46 यूरो प्रति मेगावाट घंटा तक पहुंच गई. ब्रिटेन में भी एनबीपी बेंचमार्क के तहत गैस कीमतों में तेज बढ़त देखी गई. बाजार में इतनी हलचल रही कि दाम मिनट दर मिनट ऊपर नीचे होते रहे.

कतर ने क्यों रोका उत्पादन?

QatarEnergy ने सोमवार को बताया कि उसने अपने नॉर्थ फील्ड गैस रिजर्व से जुड़े LNG उत्पादन को रोक दिया है. यह कदम उसके प्लांट पर हुए हमले के बाद उठाया गया. हालांकि कंपनी ने यह साफ नहीं किया कि नुकसान कितना हुआ है और उत्पादन कब तक रुका रहेगा.

यह सब उस समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले किए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया. मिडिल ईस्ट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बहुत अहम इलाका है, इसलिए वहां का हर घटनाक्रम सीधे तेल और गैस बाजार को हिला देता है.

होरमुज बना चिंता की वजह

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और LNG की सप्लाई होती है, जिसमें कतर का निर्यात भी शामिल है. बताया जा रहा है कि ईरान ने इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही रोकने या धीमा करने की कोशिश की है.

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई और लगभग 38 प्रतिशत समुद्री कच्चे तेल का व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहा, तो तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.

सैटेलाइट आंकड़ों के अनुसार वीकेंड पर तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई थी. शिपिंग कंपनियां फिलहाल खतरा कम होने तक जहाज भेजने से बच रही हैं, क्योंकि जहाजों को नुकसान या बीमा कवर न मिलने का डर है.

यूरोप पर क्या असर पड़ेगा?

कतर यूरोप को सीधे तौर पर पूरी गैस सप्लाई नहीं करता, लेकिन वह यूरोप के LNG आयात का लगभग 12 से 14 प्रतिशत हिस्सा देता है. अगर एशिया को जाने वाली सप्लाई प्रभावित होती है, तो वहां के खरीदार दूसरी जगह से गैस खरीदेंगे. इससे दुनिया भर में LNG की मांग बढ़ेगी और दाम और ऊपर जा सकते हैं.

कतर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बाद. 2022 में रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूसी पाइपलाइन गैस पर निर्भरता कम की थी, तब से कतर की अहमियत और बढ़ गई है.

कम भंडार ने बढ़ाई चिंता

यूरोप के लिए एक और चिंता की बात यह है कि वहां गैस स्टोरेज का स्तर इस समय काफी कम है. यूरोपीय यूनियन में गैस भंडार अभी 30 प्रतिशत से भी कम भरा है, जबकि पिछले साल इसी समय करीब 40 प्रतिशत था.

जर्मनी और फ्रांस जैसे बड़े देश ज्यादा जोखिम में हैं. जर्मनी में गैस स्टोरेज करीब 20.5 प्रतिशत और फ्रांस में करीब 21 प्रतिशत भरा हुआ है. अगर सप्लाई में लंबी रुकावट आती है, तो दाम और तेजी से बढ़ सकते हैं.

आम लोगों के लिए इसका मतलब

अगर मिडिल ईस्ट का तनाव जल्दी कम नहीं हुआ, तो गैस और बिजली के बिल महंगे हो सकते हैं. उद्योगों की लागत बढ़ेगी और उसका असर सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है. यानी यह सिर्फ तेल और गैस कंपनियों की खबर नहीं है, बल्कि इसका असर आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है.