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नोएल टाटा छोड़ेंगे 6 कंपनियों के बोर्ड्स की कमान, 12 नवंबर को होगा टाटा समूह में बड़ा फेरबदल!

नोएल टाटा जो अभी टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं वह ग्रुप के रिटायरमेंट नियमों के मुताबिक, 70 साल के होने पर बड़ी ऑपरेटिंग-कंपनी के बोर्ड से रिटायर हो जाएंगे. यह कदम टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के साथ बढ़ते गवर्नेंस विवाद के बीच उठाया गया है.

नोएल टाटा Image Credit: टीवी9 भारतवर्ष

Highlights

  • नोएल टाटा छह बोर्ड से हटेंगे.
  • एन चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति पर बढ़ा विवाद.
  • 2 जून 2028 को 65 साल के हो जाएंगे एन चंद्रशेखरन.

टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा 12 नवंबर को छह प्रमुख टाटा समूह कंपनियों के बोर्ड से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं. यह फैसला नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए टाटा समूह की सेवानिवृत्ति नीति के अनुसार लिया गया है.हालांकि, वह समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में बने रहेंगे. नोएल टाटा अभी टाटा ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, टाटा इंटरनेशनल और ट्रेंट हाइपरमार्केट प्राइवेट लिमिटेड के साथ-साथ दुबई में टाटा इंटरनेशनल वेस्ट एशिया डीएमसीसी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में काम करते हैं. यह बदलाव ऐसे वक्त पर हो रहा है जब कंपनी के भविष्य और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद चल रहा है.

वह टाटा स्टील और टाइटन कंपनी के नॉन एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन और स्पेनिश फैशन रिटेलर इंडिटेक्स के साथ जुड़े जॉइंट वेंचर इंडिटेक्स ट्रेंट रिटेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भी हैं. इसके अलावा, वह टाटा संस के बोर्ड में एक नॉन एग्जीक्यूटिव नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में काम करते हैं. हालांकि, वह टाटा की ट्रेंट लिमिटेड और टेस्को की जॉइंट वेंचर कंपनी ट्रेंट हाइपरमार्केट लिमिटेड में बने रहेंगे, जो स्टार बाजार और स्टार डेली बैनर के तहत खुदरा स्टोर संचालित करती है.

क्यों है एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर विवाद?

मनीकंट्रोल के मुताबिक, नोएल टाटा का रिटायरमेंट ऐसे समय में हुआ है जब टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच एन चंद्रशेखरन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर प्रस्तावित तीसरे टर्म को लेकर बढ़ती असहमति है. 17 सितंबर की मीटिंग में, टाटा संस बोर्ड ने टाटा के विरोध के बावजूद 21 फरवरी 2027 से शुरू होने वाले अगले पांच साल के लिए एन चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति को मंजूरी दे दी. यह विवाद टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मतलब को लेकर है, खासकर उन नियमों को लेकर जिनमें टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नॉमिनेट किए गए डायरेक्टर्स से पॉजिटिव सपोर्ट की जरूरत होती है.

टाटा और वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस बोर्ड में ट्रस्ट के दो नॉमिनेटेड डायरेक्टर हैं. जहां श्रीनिवासन ने एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया, वहीं नोएल टाटा ने इसका विरोध किया. टाटा ट्रस्ट्स ने बाद में प्रस्ताव की वैधता को चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि उसे कंपनी के आर्टिकल्स के तहत जरूरी ट्रस्ट के नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स के बहुमत का सकारात्मक समर्थन नहीं मिला. ट्रस्ट्स का कहना है कि चेयरमैन का वोट उनके नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स से जरूरी सकारात्मक मंजूरी का विकल्प नहीं हो सकता.

एन चंद्रशेखरन की उम्र को लेकर भी है चर्चा

नोएल टाटा के रिटायरमेंट से टाटा ग्रुप के उम्र से जुड़े गवर्नेंस के नियमों और एन चंद्रशेखरन पर उनके असर पर भी ध्यान गया है. 2 जून 1963 को जन्मे एन चंद्रशेखरन 63 साल के हैं और 2 जून 2028 को 65 साल के हो जाएंगे. ग्रुप के गवर्नेंस फ्रेमवर्क के तहत, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं. उनकी प्रस्तावित पांच साल की रीअपॉइंटमेंट, जो उनके कार्यकाल को फरवरी 2032 तक बढ़ा देगी, इसलिए उन्हें तय एग्जीक्यूटिव रिटायरमेंट उम्र से आगे ले जाएगी.

उस लिमिट से आगे एग्जीक्यूटिव रोल में बने रहने के लिए लागू गवर्नेंस पॉलिसी के तहत छूट या छूट की जरूरत होगी. यह अंतर इसलिए जरूरी है क्योंकि नोएल टाटा का 70 साल की उम्र में रिटायरमेंट नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टरशिप से जुड़ा है, जबकि एन चंद्रशेखरन के प्रस्तावित पद पर बने रहने में एक एग्जीक्यूटिव पद शामिल है. यह मुद्दा इसलिए ज्यादा अहम हो गया है क्योंकि एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को पहले से ही प्रोसेस के आधार पर चुनौती दी जा रही है.

एन चंद्रशेखरन, जो टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को लीड करने के बाद 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे, उन्होंने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल बिज़नेस में बड़े इन्वेस्टमेंट देखे हैं. उनके पद पर बने रहने के प्रस्ताव को लीडरशिप में स्थिरता की जरूरत से जोड़ा गया है क्योंकि इनमें से कई इन्वेस्टमेंट अभी भी डेवलपमेंट या विस्तार के फेज में हैं.

हालांकि, उनकी दोबारा नियुक्ति, टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग और होल्डिंग कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मतलब को लेकर मतभेदों ने लीडरशिप के सवाल को और मुश्किल बना दिया है. नोएल टाटा के लिए, नवंबर में होने वाला बदलाव 6 बड़े टाटा बिजनेस के बोर्ड से उनकी विदाई का इशारा है, जबकि उन्हें टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस में इसके रिप्रेजेंटेशन के जरिए अपना असर बनाए रखने की इजाजत देगा. यह डेवलपमेंट ग्रुप के गवर्नेंस फ्रेमवर्क के इस्तेमाल में एक जैसा होने की अहमियत को भी दिखाता है, ऐसे समय में जब इसकी रिटायरमेंट पॉलिसी, बोर्ड अपॉइंटमेंट प्रोसेस और शेयरहोल्डर राइट्स की कड़ी जांच हो रही है.

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